पड़ोस वाली भाभी को चोद कर प्रेग्नेंट किया

फिर मैं धीरे से अपना हाथ भाभी के पेट पर सहलाने लगा और धीरे-धीरे मेरे हाथ भाभी के स्तनों की तरफ बढ़ रहे थे और मुझे भाभी की गर्म सांस महसूस होने लगी थी. अब मैं स्तनों पर अपनी पकड़ बढ़ाता जा रहा था जिससे भाभी मुझसे चिपक गई थीं. जब मैंने स्तनों पर दबाव बढ़ाया तो भाभी हल्का सा दर्द महसूस करने लगी जिसके कारण भाभी कराहने लग गई थी…

हेल्लो दोस्तों, मेरा नाम दीपक है और मैं नोएडा उत्तर प्रदेश में रहता हूँ. मेरी उम्र 23 साल है और में M.sc का छात्र हूँ. यह कहानी आज से लगभग एक साल पहले की है जोकि मेरे जीवन की एक सत्य कहानी है और इसे मैं आप सब को बताना चहता हूँ. अगर कोई गलती हो तो माफ कर देना. मैं अन्तर्वासना को कई सालों से लगातार पढ़ रहा हूँ. यहां पर मैंने आप सबकी कहानी पढ़ी है और ये सब मुझे बहुत अच्छी लगीं. इन्हें पढ़ कर ही मैं भी आज लिखने की कोशिश कर पा रहा हूँ.

बात तब की है जब मेरे पड़ोस में एक नया परिवार रहने के लिए आया. उस परिवार में तीन लोग थे, पति-पत्नी और उनकी चार साल की लडकी. उन्हें मैं भैया और भाभी कहता हूँ. भाभी बहुत ही खूबसूरत थी. मैं तो उन्हें देखते ही पागल हो गया और कब मैं उन्हें पसंद करने लगा मुझे पता ही नहीं चला. उनका फिगर कुछ 26-34-28 का था. पर उनकी हाईट कम थी लगभग 5 फीट रही होगी और मेरी 5.10 है.

उनका नाम प्रीति और उनके पति का उत्तम तथा लडकी का नाम रोशनी है. भाभी की उम्र 25 और उत्तम भैया की उम्र 28 की है. उत्तम भैया A.C का काम करते थे और काम के चलते तीन-चार दिन घर से बाहर ही रहते थे. भाईया को शराब पीने की भी बुरी आदत थी. जिससे भाभी बहुत परेशान रहती थी. इसकी वजह से भैया और भाभी में लड़ाई भी होती थी.

भाभी से मेरी अच्छी बनती थी और मैं उनके पास कई-कई घण्टे बात करता रहता था. भैया या फिर भाभी को कोई भी काम होता तो भाभी मुझसे ही कहती और मैं भी कर दिया करता था. मेरे घर की छत और भाभी के घर की छत एक-दूसरे से मिली थी. हमारे बीच धीरे-धीरे हँसी मजाक भी चलता रहता था. फिर एक दिन भाभी ने मुझसे पूछा – तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड हैं क्या?

मैंने कहा – हाँ, भाभी थी.

भाभी बोली – थी मतलब, अब नहीं है क्या?

मैं बोला – हाँ भाभी, अब नहीं है.

वो बोली – क्यों, क्या हुआ?

मैं बोला – ऐसा कुछ खास नहीं है.

भाभी बोली – कोई नहीं, चलो अच्छा बताओ क्या नाम था उसका?

मैं बोला – दिव्या.

भाभी बोली – कुछ किया उसके साथ या नहीं?

मैं बोला – हाँ भाभी, किया था.

भाभी – क्या किया था?

मैं – वही जो होता है. वो सब कुछ किया भाभी.

भाभी बोली – कैसा लगा?

मैं – भाभी, बहुत अच्छा लगा और मजा भी आया था.

भाभी बोली – अब मन नहीं करता क्या कुछ करने का.

मैं बोला – भाभी करता तो बहुत है, पर क्या किया जाए?

भाभी बोली – किसी और लड़की को पटा लो न.

मैं – किसको पटाऊँ.

फिर मैंने भाभी से कहा – भाभी मैं आप से बहुत प्यार करता हूँ.

भाभी बोली – दीपक, तुम पागल हो गए क्या?

मैं चुप रहा और कुछ नहीं बोला. फिर कुछ दिन निकल गए. एक दिन भाभी किचन में खाना बना रही थी. तभी मैं भाभी के घर गया और उन्हें पीछे से अपनी बाँहो में ले लिया. अचानक हुई इस प्रतिक्रिया के कारण भाभी घबरा गई और जोर से चिल्लाईं. जिससे मैं डर गया और मैंने भाभी से सॉरी बोला और उसने घर पर कुछ नहीं बताने का आग्रह किया.

फिर भाभी ने कहा – ठीक है, पर दोबारा ऐसा नहीं होना चाहिये. नहीं तो मैं तुम्हारे मम्मी-पापा को सब बता दूँगी.

मैंने कहा – ठीक है भाभी, नहीं होगा दुबारा ऐसा.

इतना कह कर फिर मैं अपने घर आ गया.

26 जून का दिन था और भैया काम से बाहर गए हुए थे. मैं भाभी के घर पहुंच गया और फिर मैं भाभी से बात करने लगा. तभी भाभी ने मुझसे कहा – तुम सच में मुझसे प्यार करते हो क्या?

मैं – हाँ भाभी, मैं आप से बहुत प्यार करता हूँ.

भाभी बोली – यह गलत है. मैं तुम्हारी भाभी हूँ. तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते हो.

फिर मैंने भाभी से कहा – ऐसा कुछ नहीं होता है. फिर मैंने भाभी को अन्तर्वासना पर देवर-भाभी की कुछ सेक्स कहानी पढ़ाने लगा. जिसे पढ़ने से भाभी गर्म होने लगी और फिर मैंने भाभी के पैरों पर धीरे-धीरे हाथ से सहलाने लगा भाभी ने कुछ नहीं कहा और फिर मैंने धीरे से आपने हाथ को भाभी की जांघों पर सहलाने लगा. फिर भी उन्होंने कुछ नहीं कहा. तब फिर मैं भाभी के चूचों को हल्के से दबाने और सहलाने लगा तो भाभी क़े मुंह से सिसकारी निकलने लग गई.

फिर क्या था, मैंने मन में सोचा अब तो बात बन गई यार मजा आ गया. फिर मैंने भाभी के गालों पर एक किस कर दिया. भाभी फिर भी कुछ नहीं बोली और धीरे से मुस्कराने लगी फिर मुझे हरा सिग्नल मिल गया. मैंने और देर न करते हुए भाभी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनके होंठों का रस पीने लग गया. भाभी भी मेरा साथ देने लगीं.

फिर मैं धीरे से अपना हाथ भाभी के पेट पर सहलाने लगा और धीरे-धीरे मेरे हाथ भाभी के स्तनों की तरफ बढ़ रहे थे और मुझे भाभी की गर्म सांस महसूस होने लगी थी. अब मैं स्तनों पर अपनी पकड़ बढ़ाता जा रहा था जिससे भाभी मुझसे चिपक गई थीं. जब मैंने स्तनों पर दबाव बढ़ाया तो भाभी हल्का सा दर्द महसूस करने लगी जिसके कारण भाभी कराहने लग गई थी.

तब भाभी के मुंह से निकला – दीपक, धीरे-धीरे दबाओ न. दर्द हो रहा है. मैं कहीं भागी थोड़े जा रही हूँ.

अब भाभी एक दम गर्म होती जा रही थी और कुछ दर बाद भाभी कहने लगी – दीपक और जोर से दबाओ. मजा आ रहा है.

अब मैंने भाभी के होंठ को चूसना शुरू कर दिया था. दस मिनट तक भाभी के होंठों का अपने होंठ से रस निचोड़ता रहा और धीरे से मैंने भाभी की पैंटी में हाथ डाल दिया तो पाया कि भाभी की चूत एक दम चिपचपी हो रही थी और उनकी चूत में से लगातार का पानी निकल रहा था.

अब मुझसे और कन्ट्रोल नहीं हो रहा था और मैं उसके कपड़ों को खोलने लगा. जल्द ही मैंने उसके कपड़े निकाल दिए और फिर भाभी मेरे सामने सिर्फ़ पैंटी और ब्रा में थी. तभी भाभी ने कहा – तुम अपने कपड़े नहीं निकालोगे क्या?

मैंने कहा – भाभी आप ही निकल दो न.

फिर भाभी ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और फिर मैं भाभी को उनकी ब्रा और पैंटी के ऊपर से ही दबाने और चूसने लगा और फिर बाद में मैंने भाभी की ब्रा और पैंटी निकाल दी और उनके बूब्स को जोर-जोर से चूसने लगा. भाभी मुंह से जोर-जोर से सिसकारी निकलने लगी. फिर कुछ देर बाद हम दोनों नंगे खड़े थे. फिर हम दोनों बेड पर लेट गए और हम दोनों एक-दूसरे को बेहताशा चूमने लगे.

भाभी बोली – आई लव यू दीपक. तुम बहुत सेक्सी हो.

मैं बोला -आई लव यू टू भाभी. मैंने जब से तुम्हें देखा है तब से मैं तुमको पाना चाहता था. आई लव यू सो मच.

अब वो मुझे पागलों की तरह जोर से चूम रही थी.

मैं बोला – प्रीति भाभी, मेरा लंड चूसो न जान.

फिर वो मेरा लण्ड मुंह में लेकर चूसने लगी.

फिर मैंने कहा – भाभी, मुझे भी तुम्हारी चूत का स्वाद चखना है.

भाभी ने हामी भरी और हम दोनों 69 की अवस्था में आ गए और अब हम दोनों एक-दूसरे में खो गए थे. उसकी चूत पर भूरे-भूरे रेशमी बाल उगे थे. उसकी चूत से हल्का-हल्का पानी बाहर निकल रहा था. मुझे उनकी चूत का पानी का टेस्ट नमकीन सा लग रहा था. मुझे चूत चाटने में बहुत मजा आ रहा था.

करीब 5 मिनट बाद भाभी के पैर अकड़ गए और वो मेरे सर को चूत में दबाते हुए सिसकारती हुई बोली – ऊईईई आह मेरी जान दीपक, मैं आ रही हूँ लव यू. आह आह और फिर वो झड़ गई. पर अभी तक मेरा नहीं हुआ था तो मैं बोला – भाभी, अभी तक मेरा नहीं हुआ है.

भाभी बोली – तुम रुको, मैं करती हूँ.

फिर वो जोर से लन्ड दबा कर मुठियाने लगी और चूसने लगी. दस मिनट बाद मैं झड़ने वाला था तो बोला – भाभी, मैं आ रहा हूँ. और जोर से करो और जोर से.

मैं अब भाभी के सर को जोर से अपने लन्ड पर दबा रहा था. तभी मेरा माल निकल गया और पूरा माल भाभी के मुंह में चला गया. जिसे वो पी गई. अब हम दोनों एक-दूसरे के ऊपर लेट गए.

तभी भाभी – लव यू दीपक

मैं बोला – लव यू टू भाभी.

दस मिनट के बाद भाभी फिर से मेरा लण्ड चूसने लगी. जिससे अब मेरा लण्ड फिर रॉड की तरह कड़क हो गया और मैं लगातार प्रीति भाभी को चुम्बन कर रहा था. फिर भाभी बोली – अब और मत तड़पा दीपक, कर दे.

मैंने पूछा – क्या कर दूँ?

वो बोली – जालिम, चोद दे मुझे, मेरी जान चोद न. प्लीज़, अब और सहा नहीं जा रहा है. प्लीज और मत तड़पा मुझे.

अब मैंने उसको लिटा दिया और भाभी के चूतड़ों के नीचे एक तकिया लगाया और भाभी के पैर को खोल कर पैरों के बीच में आ गया. फिर भाभी ने अपने हाथ से लौड़े को चूत के छेद में सेट करके कहा – डाल दो अब.

फिर मैंने जोर से झटका मारा. मेरा लण्ड 2 इंच अन्दर घुस गया और भाभी के मुँह से हल्की सी चीख निकल गई और वो बोली – उई माँ, बाहर निकाल इसे. दर्द दे रहा मुझे.

मुझे भी गुस्सा आ गया तो मैंने भी उसको गाली देते हुए एक और जोर से झटका मार दिया – ले बहन की लौड़ी ले. और अब मेरा लण्ड 5 इंच अन्दर तक घुसता चला गया और फिर एक झटके में मैंने अपना 7 इंच तक लन्ड भाभी की चूत में जड़ तक घुसा दिया.

भाभी के मुंह से चीख निकल गई – उई माँ, मार डाला रे.

चूंकि भाभी लगभग 2 महीनों से चुदी नहीं थी. जिसके कारण चूत टाइट हो गयी थी. 5 मिनट तक रुक कर मैं भाभी को किस करता रहा. फिर मैं एक और झटका मारा और अबकी बार पूरा लण्ड अन्दर चूत की जड़ तक चला गया था. जोकि वभाभी की बच्चे दानी से टकराया. जिसके कारण भाभी के मुंह से एक आह निकल गयी.

मेरा मुंह उसके मुंह में था. इसलिए अबकी बार चीख़ नहीं निकल पाई थी. फिर वो अपनी गाण्ड हिलाने लगी थी और मैंने भी लौड़े को धीरे-धीरे आगे-पीछे करना चालू किया. वो धीरे-धीरे सिसक कर आह भर रही थी. कुछ ही पलों बाद नजारा बदल गया. भाभी बोलने लगी – दीपक, जोर से करो और जोर से. आह, और जोर से जान. जोर से करो, बहुत मजा आ रहा है.

अब मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी. इस बीच भाभी 2 बार झड़ गई थी. पर मेरा अभी तक नहीं हुआ था. मैं जोर से चुदाई कर रहा. भाभी एक बार फिर अकड़ गई और फिर झड गई. अब मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में आने को कहा. फिर वो डॉगी स्टाइल में आ गई. अब मैं उसके पीछे से दनादन चोट मार रहा रहा था. भाभी सिसक रही थी – आह हरामी आह.

अब उसके मुंह से अजीब सी आवाजें आ रही थीं. मेरा माल आने वाला था, मैंने उससे बोला – अब मेरा होने वाला है. कहाँ गिराऊँ?

भाभी बोली – मेरे अंदर ही गिराना. मुझे तुम्हारा बच्चा पैदा करना है.

फिर मैं उसकी चूत के अंदर ही झड गया और भाभी भी साथ में ही झड़ गई. झड़ कर मैं भाभी के ऊपर ही लेट गया. हम दोनों की कुछ एक घंटे तक घमासान चुदाई चली थी. इसके बाद मैंने भाभी को कई बार चोदा है. अब जब भी मौका मिलता हैं या भैया कहीं काम से जाते हैं तो हम चुदाई कर लेते हैं.

अभी कुछ महीने पहले ही भाभी को एक लड़का हुआ है. भाभी कहती हैं कि वह बच्चा मेरा ही है.

दोस्तों, ये मेरी पहली और सत्य कहानी है. अगर अच्छी लगे तो मुझे बताना जरूर. मुझे इन्तजार रहेगा.
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इस कहानी का अगला भाग – छत फांद कर भाभी की चुदाई करने गया

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