पड़ोसन आंटी और मेरे बीच संबंध

मेरा लंड़ तो मेरी पैंट में ही खड़ा हो गया था और मैं उसे ऊपर से ही मसल रहा था. अब आंटी के मुंह से यह सुनते ही मैंने तुंरत अपने जींस का चैन खोला और अंदर वियर को नीचे सरका कर धीरे – धीरे मैंने अपने लंड को बाहर निकाला और फिर मैं शुरू हो गया…

हेल्लो फ्रेंड्स, मेरा नाम अभिषेक है और आज मैं आपको मेरे यौन जीवन में पहली बार घटी बिलकुल सत्य घटना बताने जा रहा हूँ.

दोस्तों, मैं इंदौर का रहने वाला हूँ. हमारे घर के पास वाले मकान एक फैमिली रहती है. उनके घर में अंकल, आंटी और उनका 9 साल का बेटा था. अंकल मार्केटिंग के कारण अक्सर सिटी से बाहर रहते हैं इसलिए धीरे – धीरे आंटी मेरी फैमिली की बहुत अच्छी दोस्त बन गईं.

मैंने तो जिस दिन पहली बार आंटी को देखा था मैंने उसी दिन से ही आंटी के नाम की मुठ मरना शुरू कर दिया था और अपने सपनों में रोज उन्हें खूब चोदता था. धीरे – धीरे मेरी उनके साथ सम्भोग करने की इच्छा बढ़ती चली गई. आंटी देखने में भी काफी अच्छी हैं. उन्हें देख कर ही लगता है कि वो मेरी सम्भोग की इच्छा को बहुत अच्छे से पूरा कर सकती हैं.

धीरे – धीरे मैंने आंटी से बहुत अच्छी दोस्ती कर ली और अब बस मैं उन्हें पटाने की कोशिश में लगा रहता था. मैं आंटी के अंगों का जितना दर्शन करता मेरी उनसे सम्भोग करने की इच्छा उतनी ही बढ़ती जाती थी.

जब भी आंटी मेरे सामने होती मैं आंटी को और उनके अंगों को गन्दी नजरों से देखता ताकि वो आसानी से उनके प्रति मेरे भाव को समझ जाएं. कुछ समय तक ऐसा ही चलता रहा और मेरी आंटी के साथ बहुत गहरी दोस्ती हो गई. अब मैं बस यही सोचता था कि कैसे आंटी के कोमल, मस्त बदन का स्पर्श करूँ.

अब अक्सर मुठ मरते समय मैं यही सोचता कि आंटी जब मेरा लंड अपने कोमल हाथों से सहलाएंगी तो कितना आनंद आयेगा! और जब मैं उनके नर्म स्तनों को मस्ती में डूब कर मुंह में भर कर चूसूंगा तो वो मुझसे कहेंगी ‘बेटा अच्छे से करो वर्ना डाट पड़ेगी।’ दिनों – दिन मेरी ऐसी कल्पना का विस्तार होता गया. बस इसी तरह कुछ और दिन निकल गये. अब आंटी मुझसे अपनी हर बात शेयर करने लगी थीं.

इसलिए अब मैंने सोचा कि यही सही समय है अब मुझे आंटी को अपने लंड के दर्शन करा देना चाहिए ताकि फिर उनसे लंड़ – चूत के विषय में भी बात शुरू की जा सके. इसलिए यह सोच कर मैंने प्लान बनाया और देखा कि आंटी मेरे कमरे की तरफ आ रही हैं तो मैंने अपने रूम का गेट खोल दिया और अंदर मुठ मरने लगा.

आंटी मेरे कमरे की तरफ आईं और उन्होंने मुझे मुठ मारते देखा और बिना कुछ कहे चली गई. मैं उसी तरह मुठ मारता रहा और ऐसा दिखाने का प्रयास किया कि इस बात से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. खैर, इससे हमारी बातचीत पर बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ा.

फिर एक दिन मौका देख कर मैंने आंटी से पूछ ही लिया – आंटी, क्या अपने मुझे उस दिन मुठ मारते हुए देख लिया था?

तो इस पर उन्होंने एक हल्की सी स्माइल देकर कहा – हाँ.

तो फिर मैंने उन्हें सॉरी कहा और बोला – आंटी, मैं फिर कभी ऐसा नहीं करूँगा.

तो वो बोली – अरे कोई बात नहीं, तुम्हारी उम्र में ये सब नार्मल बात है.

इतना बोलने के बाद फिर थोड़ी देर रुक कर बोली – फिर तो तुम एडल्ट मूवी भी देखते होगे है न?

यह सुन कर मैं शर्मा गया और मैंने कहा – अरे आंटी, अब आप मेरी टांग मत खींचिए.

फिर उन्होंने बात को और आगे बढ़ा दिया और फिर हम बिल्कुल खुल गये. अब आंटी और मैं बिना किसी हिचक के बिना किसी बात की परवाह के इस बारें में अक्सर बातें करने लगे.

एक दिन जब हम बात कर रहे थे तो आंटी से अचानक Sके मुझसे पूछा – आज किया कि नहीं?

तो मैंने कहा – नहीं आंटी.

अब आंटी फिर से बोली – मेरी उस दिन की बातों का बुरा तो नहीं मान गए?

मैंने कहा – नहीं आंटी ऐसा कुछ नहीं है, आप कहो तो अभी कर लूँ. करने में क्या जाता है.

तो वो बोली – जैसी तुम्हारी इच्छा. करने का मन हो तो कर लो.

मेरा लंड़ तो मेरी पैंट में ही खड़ा हो गया था और मैं उसे ऊपर से ही मसल रहा था. अब आंटी के मुंह से यह सुनते ही मैंने तुंरत अपने जींस का चैन खोला और अंदर वियर को नीचे सरका कर धीरे – धीरे मैंने अपने लंड को बाहर निकाला और फिर मैं शुरू हो गया.

मेरे लंबे और मस्त लन्ड को देख कर आंटी बोली – क्या बात है, तुम्हारा लंड़ तो बहुत बड़ा है! किसने किया है इसे इतना बड़ा? और ये बताओ ये हमेशा खड़ा ही रहता है क्या?

फिर इतना बोल कर वह हंसने लगी तो मैंने भी स्माइल दे दी और आंटी की तरफ देख कर बोला – आंटी, क्या आप इसे थोड़ा अच्छे से मसल देंगीं. आपको काफी अनुभव भी होगा और तो और अगर आप ऐसा करोगी तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा.

वो बोली – ठीक है, लेकिन केवल मसलूंगी और सहलाउंगी ही इसके अलावा और कुछ नहीं करुँगी. ठीक है न?

मैंने कहा – ठीक है आंटी.

फिर जब आंटी ने अपने कोमल हाथों से मेरा कडक लंड़ सहलाया तो मुझे कितना आनंद आया दोस्तों मैं आप लोगों को ये बता नहीं सकता. उनके सहलाने की वजह से कुछ देर में ही मैं झड गया. फिर मैंने आंटी को थैंक यू बोला तो उन्होंने कहा – कोई बात नहीं. फिर वो नाश्ता ले आईं और फिर हम दोनों ने नाश्ता किया और फिर मैंने आंटी से सेक्स के बारें में बहुत सारी बातें की और फिर मैं अपने घर आ गया.

अब धीरे – धीरे मुझे आंटी से प्यार होने लगा था. फिर कुछ दिन बाद मेरा बर्थ डे आ गया. मैंने जल्दी से सबके साथ अपना बर्थ डे मनाया और फिर आंटी के पास गया. उन्होंने मुझे बर्थ डे विश किया तो मैंने कहा – आंटी, सिर्फ विश करने से काम नहीं चलेगा.

तो वो बोली – अच्छा, फिर बताओ और क्या करना पड़ेगा?

तो मैंने उनकी तरफ देखा और उनके पेंट के ऊपर से ही लंड छुआ दिया तो वह समझ गई और बोली ‘बहुत शैतान हो गया है तू’. मैंने कहा – नहीं आंटी, सिर्फ इतने से काम नहीं चलेगा. आंटी, अब मैं बड़ा हो गया हूँ.

तो बोली – फिर और क्या चाहिए तुझे?

तो मैंने कहा – आंटी, आई लाइक यू.

यह सुन कर वो भी मुस्कुरा कर बोली – आई लाइक यू टू अभिषेक.

फिर मैंने कहा – अब मैं बड़ा हो गया हूँ अब मुझे लाइक नहीं प्यार चाहिए.

तो वो बोली – अच्छा बाबा ठीक है, रात को आना मैं, तुम्हें बहुत सारा प्यार दूंगी.

फिर मैंने कहा – आई लव यू आंटी.

तो उन्होंने कहा – अच्छा, सच में करते हो या बस ऐसे ही जरूरत पूरी करने के लिए बोल रहे हो?

तो मैंने कहा – आंटी आप एक दिन पूछ रही थी न कि मेरा इतना बड़ा कैसे है? तो आज मैं आपको बता देता हूँ. आप को याद करके मूठ मारने की वजह से हुआ है यह इतना बड़ा.

आंटी बोली – चल ठीक है, बहुत इमोशनल न बन. अच्छा लव यू टू. आज रात को तुझे बहुत सारा प्यार दूंगी ओके. चलो अब रात को आना.

फिर मैं रात को सब माहौल जमा कर उनके पास पहुंचा गया और रात भर उनको जम कर चोदा. पूरी रात में मैंने उनको तीन बार चोदा और फिर थक कर वहीं उनके पास ही सो गया.

आप सब को मेरी यह पहली कहानी कैसी लगी. मुझे मेल करके जरूर बताएं. मेरी मेल आईडी – [email protected]

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