पड़ोसन भाभी का प्यारा तोहफा

मेरा पति तो सिर्फ बस मुझे चूत चुदाई ही करता है। बाकी कुछ नहीं। माहजबीं ने बताया मुझे कि कैसे तुम उसकी चूत और गांड चाटते हो? कैसे अपना लण्ड उसके मुँह में देते हो? मुझे भी यह सब करने का बहुत शौक है……..

दोस्तों मैं मोहसिन खान नाशिक, महाराष्ट्र से आपके सामने फिर एक बार हाजिर हूँआ हूँ एक नयी दास्ताँ लेकर। उम्मीद है आपको पसंद आएगी।

अब मै कहानी पर आता हूँ। दोस्तों! मै अपनी पड़ोसन माहजबीं भाभी की चुदाई तो करता ही रहता हूँ। अगर उसे चुदाई का मन हो, तो वो मुझे फोन करके बुला लेती है। और मैं भी भागा भागा उन के पास चला जाता हूँ।

एक दिन मैं ऐसे ही ऑफिस में बैठा था कि उतने में मुझे माहजबीं भाभी के नंबर से मिस्ड कॉल आया। मैंने तुरंत कॉल बैक किया।

मैंने कहा- कहिये भाभी!

लेकिन उस तरफ से कोई जवाब नहीं आया। मैंने काट करके दोबारा लगाया फिर उसने वहाँ से “हेलो” कहा। लेकिन आवाज़ कुछ अंजानी सी आ रही थी।

मैंने पूछा- जी कौन?

उसने दोबारा काट दिया।

अब मै फिर मैं फिर से ऑफिस के काम में लग गया। 10 मिनट बाद फिर भाभी का फोन आया मैंने कहा- कौन?

तो वहा से माहजबीं भाभी बोली- हाँ! मैं माहजबीं!!

मैंने कहा – इससे पहले कौन था?

भाभी कहने लगी- मेरी एक फ्रेंड।

मैं- अच्छा! कौन सी फ्रेंड है आपकी? आवाज़ तो अच्छी है उसकी।

भाभी कहने लगी- आफरीन नाम है उसका। मेरी पुरानी फ्रेंड है। और हम बहुत क्लोज़ फ्रेंड हैं। हम में कोई बातें नहीं छुपती है।

मैंने कहा- कोई बात?? मतलब क्या हमारे बारे में भी सब पता है उसको?

भाभी – हाँ मोहसिन! सॉरी यार, हमारे बीच जो भी होता है, वो मैंने तुम्हे बिना बताये सब उसको कह दिया है। सॉरी मोहसिन!

मैं- सॉरी छोड़ो! मुझे इस से कोई प्रॉब्लम नहीं है। अगर तुम्हे कोई दिक्कत नहीं तो मुझे क्या प्रॉब्लम है? वैसे उसने कॉल क्यों किया था भाभी??

हम अक्सर तुम्हारे बारे में बाते करते रहते है तो वो हमेशा मुझसे कहती है कि “कभी मोहसीन से मुझे भी मिलाओ यार! अकेले अकेले मज़े लेती हो। कभी हमें भी मौका दो।“ तो मैंने कह दिया “यह लो नंबर और बात करलो उस से।“

मैं – अच्छा! तो बात क्यों नहीं की उसने?

माहजबीं- वो शर्मा रही है अब।

मैं – ओके! तो मेरी उस से मुलाकात करा दो! शर्म दूर हो जायेगी उसकी।

माहजबीं – मुलाकात तो करा दूँगी! मगर मुझे भूल मत जाना। अब तुम मेरे हो और मेरे बन कर ही रहोगे यह मुझसे वादा करना होगा।

मैं-  यह भी कोई कहने की बात है क्या? भाभी मैं सिर्फ तुम्हारा हूँ। मगर कभी- कभी टेस्ट बदल भी लेना चाहिए।

भाभी- हाँ! वो तो है। बहुत जल्द आफरीन से मिला दूंगी।

मैंने कहा- शनिवार को मिलाना। मैं शनिवार को फ्री रहूँगा।

भाभी ने वादा किया और फोन रख दिया।

शनिवार की दोपहर 2:30 बजे की मीटिंग फिक्स हुयी। मैंने पहले ही अपने जिस्म की पूरी सफाई की और झांटों को भी साफ़ किया।

फिर दूसरे दिन ठीक 2 बजे भाभी का फोन आया। उसने आफरीन को मेरे बताये हुए पते पर भेज दिया। जैसे ही आफरीन आई, मैंने उसे बैठने को कहा।

मैंने कहा- पहले तो शर्माओ नहीं! और बताओ! पहले क्या लोगी? चाय! कॉफ़ी, नाश्ता वगैरा वगैरा??

फिर हमारे बीच बाते होने लगी। थोड़ी ही देर में आफरीन भाभी मुझसे खुलकर बातें करने लगी।

वो कहने लगी- माहजबीं और मेरे बीच अक्सर तुम्हारी बातें होती है। मैं उसे सुन कर उत्तेजित हो जाती हूँ। मेरा पति तो सिर्फ बस मुझे चूत चुदाई ही करता है। बाकी कुछ नहीं। माहजबीं ने बताया मुझे कि कैसे तुम उसकी चूत और गांड चाटते हो? कैसे अपना लण्ड उसके मुँह में देते हो? मुझे भी यह सब करने का बहुत शौक है। पर मेरे पति यह सब नहीं करते।

मैंने कहा- मैं तो माहजबीं की गांड चुदाई भी करता हूँ। क्या तुमने कभी गांड चुदाई की है?

उसने कहा- हाँ! एक बार की है। मगर बहुत दर्द हुआ तो मैंने उन्हें मना कर दिया था।

मैं- मगर तुम्हे मेरे साथ सेक्स करते वक्त गांड भी देनी होगी। फिकर मत करो! मैं ऐसा डालूँगा कि तुम्हे पता ही नहीं चलेगा।

और ऐसी सब बाते करते करते मैंने उसे अपनी बाहो मैं भर लिया और उसे चूमने लगा। चूमते हुए मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए और खुद भी नंगा हो गया। उसे चूमता हुआ मै उसकी नाभि तक पहूँच गया। लेकिन, जैसे ही उसकी मखमली चूत पर मेरी नज़र पड़ी तो मैं तो पागल हो गया। क्या मद मस्त चूत थी उसकी? मानो कोई बटर क्रीम है।

मैं देखते ही उछल कर उस पर टूट पड़ा और पागलों की तरह उसे चूसने लगा। वो भी मदहोश हुए जा रही थी। और सेक्सी आवाजें निकाल रही थी “आआअह्हह्हह आआआअह्हह्हह्ह आहह और ज़ोर से मेरे राजा! और ज़ोर से! आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह”

मैंने भी भाभी की चूत और गांड चूसने मैं कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी तब तक चूमता रहा जब तक उसने खुद नहीं कहा – बस मोहसिन बस!!

वो भी पूरी तरह गर्म हो चुकी थी और उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था। मज़ा भी आखिर क्यों नहीं आता? पहली बार चूत और गांड की चुसाई जो हो रही थी। अब हम 69 की अवस्था में आ गये। वो मेरा लन्ड चूसे जा रही थी और मैं उसकी चूत चूसते हुए उसकी चूत के नमकीन पानी का स्वाद ले रहा था। दोस्तों क्या मज़ा आ रहा था?

अपनी चूत चुसवाते हुए वो मेरे मुह में ही झड़ गयी। थोड़ी देर बाद, मैं भी उसके मुँह में झड़ गया। मगर यह क्या? उसने पानी पीने की जगह मेरा सारा माल थूक दिया।

मैंने कहा- क्यों आपको माल पसंद नहीं आया?

उसने कहा- नहीं मैंने ऐसा कभी किया नहीं है तो अजीब सा लगा मुझे।

मैंने कहा- कोई बात नहीं! पहली बार ऐसा ही लगता है।

फिर हम थोड़ी देर तक ऐसे ही लेटे रहे।

आफरीन- मोहसिन! सच में लण्ड चूसने में इतना मज़ा आता है, पहली बार तुमसे ही मालूम हुआ। सच में, आज तुमने मुझे बहुत मज़ा दिया है।

फिर थोडा आराम के बाद, मैं फिर से उसके होठों को चूमने लगा। वो भी मेरा साथ देने लगी। अबकी  बार मैंने ज़्यादा समय वेस्ट न करते हुए, सीधा अपना लन्ड उसकी चूत में पेल दिया। और फिर धीरे- धीरे धक्के लगाने लगा। आफरीन भाभी की आवाजें पूरे कमरे में गूँजने लगी, “आआह्हह्हह आह्ह्ह्ह इइइ  ऊऊऊ”

उसकी आवाज़ों से मेरा जोश और बढ़ने लगा। मै भी अपनी पूरी रफ़्तार लगा कर उसे चोदे जा रहा था। कभी-कभी चोदते हुए लण्ड को बुर के बाहर निकालता और उसके मुँह में देकर उसके मुँह को चोदता। फिर वापिस चूत में डाल देता। वो भी पूरी जोश में आ गयी थी और मेरा साथ दे रही थी। तक़रीबन ऐसे ही 15-20 मिनट की धुआंधार चुदाई के बाद भाभी झड़ गयी और थोड़ी देर बाद मैं भी भाभी की चूत के ऊपर झड़ गया और थक कर भाभी के ऊपर ही लेट गया।

थोड़ी देर बाद मैंने कहा- भाभी! एक और राउण्ड हो जाये?

भाभी ने बड़े ही सेक्सी अंदाज़ में कहा- मैं तो यहाँ तुमसे चुदवाने ही आई हूँ। चोदते रहो राजा! आज मेरी चूत की प्यास को बुझा दो, तुम्हारे लन्ड से।

मैंने कहा- भाभी इस बार गांड चुदाई हो जाए।

पहले तो भाभी ने थोड़ा नाटक किया। फिर बाद में मेरे कहने पर मान गयी।

मैंने कहा- भाभी डरो नहीं! आराम से करूँगा।

मैं पहले धीरे- धीरे उसके मम्मे सहलाता हुआ उसके ऊपर आ गया और थोडा भाभी को गर्म होने दिया। जब भाभी पूरी तरह गर्म हो गयी तो मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा।

इसके बाद थोडा क्रीम भाभी की गांड के छेद पर लगाया और थोडा अपने लन्ड पर। फिर लंड को  उसकी गान्ड पर सेट किया। गांड काफी टाइट थी। लन्ड बार- बार फिसल रहा था।

मैने भाभी को अब कसके अपनी पकड़ में ले लिया और एक ज़ोर का झटका मारा तो भाभी की आह निकल गयी वो रोने लग गयी। मैं थोडा रुक गया और उसे समझाने लगा।

थोड़ी देर तो मै भाभी के ऊपर ऐसे ही लेटा रहा। उन्हें चूमने और उनके मम्मो को दबाने लगा। फिर धीरे- धीरे भाभी और गर्म होने लगी। मैंने फिर से अपने लंड के ऊपर क्रीम लगाया और उसकी गांड के छेद पर सेट किया। इस बार एक झटके में लंड आधा अंदर चला गया तो मैंने बिना भाभी की परवाह किये लंड और तेज़ी से घुसाता चला गया और देखते- देखते लंड पूरा भाभी की गांड में पेल दिया।

भाभी ज़ोर- ज़ोर से रोने लग गयी तो मैं ऐसे ही लंड को भाभी की गांड में डाले रखा और उनके बोबे मसलता रहा। थोड़ी देर ऐसे ही लंड को गांड में रखने के बाद भाभी जब शांत हूँयी तो मैंने धीरे- धीरे धक्के लगाने चालू कर दिये। मगर भाभी का दर्द कुछ ज़्यादा था तो मैंने जल्दी ही लंड गांड से निकल कर चूत में डाल दिया और चूत में ही ढेर हो गया।

फिर बाद में मैंने भाभी को अपनी गोद में बिठाया और उनसे माफ़ी मांगी।

भाभी ने कहा- सॉरी तो मुझे कह्ह्नी चाहिए की तुमने इतना सुख दिया पर मैंने तुम्हें अपनी गांड चोदने का मौका नहीं दिया। पर अगली बार मैं तुमसे बहूँत जल्द मिलूंगी और तुम्हे अपनी गांड का तोहफा दूँगी।

और इस तरह भाभी को मैंने एक और ज़बरदस्त चुम्मी देकर अलविदा किया।
दोस्तों और भाभियों! मेरी ये दास्ताँ कैसी लगी? मुझे ज़रूर मेल करें।

Khan।[email protected]

 

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