पड़ोसी से बना रिश्ता-भाग 1

रोज रोज मैं उसको  या यूँ कहें…. उसके गठीले बदन को,  अपनी निगाहों से चोदती थी. लेकिन वो एक खास दोपहर थी जब उसने मुझे चोदा…. और क्या खूब चोदा? अब तो पति का लंड भी अपनी चूत में उसी का समझ कर लेती हूँ……..

नमस्कार दोस्तों!! मैं रश्मी जोशी. मुंबई में अपने पति संजय और बच्चे पप्पू के साथ रहती हूँ.
अभी मेरी उम्र 35 है. फिर भी दिखने में एकदम जवान लगती हूँ. मेरी खूबसूरती के बारे में सभी तारीफ करते है. खैर कहानी पे आते है. ये कहानी दरअसल अक्षय और मेरे बीच की है.

अक्षय हमारे पड़ोस में रहने आया एक नया लड़का है. दिखने कुछ खास नहीं था. रंग काला था. लेकिन उसकी बॉडी थी. वाह क्या कसरती शरीर था. मैं तो बस अपनी बालकनी से देखती ही रह जाती थी जब वो नहाकर नंगे बदन सिर्फ तौलिया पहने अपनी बालकनी में आता था.

मैं चोर निगाहों से उसके शरीर को निहारा करती थी. कभी-कभार वो भी हाय-हेलो बोल दिया करता था. मन में तो बहुत ख्याल आते थे पर मैं अपने आप को कंट्रोल करती थी क्योंकी पति और बच्चे का ख़याल आ जाता था.

एक दिन मैं मार्केट से सामान ले कर आ रही थी तो देखा लिफ्ट आउट ऑफ़ आर्डर थी. हमारा अपार्टमेंट 20 मंजिल का था और मेरा फ्लैट 18 वीं मंजिल पे. अब सीढियाँ चढ़कर मैं जैसे- तैसे 16वीं मंजिल तक तो पहुँच गयी, लेकिन अब आगे चला नहीं जा रहा था. मैं वहीँ सीढ़ियों पे बैठकर सुस्ताने लगी तभी अक्षय सामने आया.

अक्षय- अरे आंटी आप यहाँ? इतना सामान लेकर? चलिये दीजिये मुझे.

मैं-नहीं अक्षय ठीक है.

इतना कहकर मैं खड़ीं होने को हुयी. तभी मेरे पैर में दर्द हुआ और अक्षय ने मुझे सहारा दिया. उसके छूते ही मुझे एकदम करंट लगा. क्या गठीला बदन था उसका. खैर उसने मुझे सहारा देते हुए ऊपर उठाया और किसी तरह मेरे फ्लैट के पास ले आया.

फिर बोला- आप रुकिए. मैं दरवाजा खोलता हूँ. चाबी कहा है?

मैं- हाँ अभी देती हूँ.

और चाबी ढूंढने लगी तो मिली नहीं. शायद चाबी कही गिर गयी थी मुझसे.

मैं- अक्षय शायद चाबी कही गिर गयी है मुझसे.

क्षय-अब क्या करेंगी आप??

मैं- अब पप्पू के डैडी के आने तक इंतज़ार करना होगा.

अक्षय-लेकिन उन्हें आने में तो बहुत टाइम है तब तक क्या आप यहाँ पे खड़ी रहेंगी? आप मेरे घर चलिए. वहाँ आराम से इंतज़ार करिये.

मैं- नहीं अक्षय इट्स ओके.

अक्षय-प्लीज़ चलिए न. आप पहले ही बहुत थक गयी है. यहाँ खड़े- खड़े आप और थक जाएँगी.

उसकी बात तो सही थी. मैंने सोचा उन्हें आने में टाइम भी बहुत है तो इसके घर ही इंतज़ार कर लेती हूँ. मैंने अक्षय को हाँ कह दिया और उसके घर चली गयी.

अंदर जाते ही उसने मुझे पानी दिया और चाय नाश्ता भी ले आया. मुझे अच्छा महसूस हुआ. बाद मे मैं कुर्सी पे ही आराम करने लगी तो अक्षय बोला- बेडरूम में जा कर आराम कीजिये.

मैंने कहा-  इट्स ओके अक्षय.

पर उसने कहा- प्लीज़ जाइये.

और मैं चली गयी. तभी मेरे पैर में दर्द उठा और मैं कराहने लगी. अक्षय ने झट से मुझे सहारा दिया और उठा के बेड पे ले गया. मुझे लिटाया और मलहम ले आया. फिर मेरे पैरों की मसाज करने लगा.
मुझे अच्छा तो बहुत लाग रहा था लेकिन मैंने उसे रोका और कहा- प्लीज़ अक्षय तुम मत तकलीफ उठाओ.

अक्षय-इट्स ओके आंटी.

और मेरी साड़ी थोड़ी उपर करके वो मसाज करने लगा. उसने पहले तो अच्छे से मसाज की. मुझे भी आराम मिला. बाद में वो मसाज करते करते जांघ से ऊपर आने लगा. मेरी जांघ सहलाने लगा.

मैं-अक्षय ये क्या कर रहे हो तुम?

अक्षय- कुछ नहीं आंटी बस आपके पैरों को मसाज दे रहा हूँ. मुझे लगता है सारा दर्द यहीं से शुरू होता है.

उसकी बातों में शरारत थी. सच बताऊँ तो उसकी छुवन ने मेरे अन्दर एक अजीब सी सिहरन पैदा कर दी थी. लेकिन फिर भी मैंने कहा- अब बस करो ना.

अक्षय-करने दीजिये ना.

मैं-अब मेरा दर्द ठीक है. लेकिन अब उसकी हिम्मत बढ़ गयी और वो मेरे पैंटी पे हाथ फेरने लगा और मेरी चूत ऊपर से ही दबाने लगा.

मैं-अक्षय अब बस करो ना. ये सब ठीक नहीं है.

अक्षय- क्या आप भी. कुछ नहीं होगा. आप ऐसे ही लेटे रहो.

मैं उसका हाथ पकड़ के रोकने लगी- नहीं अक्षय! ये ठीक नहीं है. मैं शादीशुदा औरत हूँ. ये गलत है…. मैं चिल्ला दूँगी…..

मेरी बात पूरी होने से पहले ही वो मेरे ऊपर आया और मुझे किस करने लगा. उसने इतने जोर से मेरे होंठ चूसे की क्या कहूँ?

उसने कहा- चिल्लाना होता तो आप अब तक चिल्ला चुकी होतीं…..दरअसल आप का मन भी यही चाहता है.

शायद वो सही कह राह था. फिर वो उठा और अपनी टी-शर्ट निकाला. मैं तो उसकी बॉडी देखती ही रह गयी. तभी उसने मेरी साड़ी का पल्लू हटाया और मेरे ब्लाउज के हुक खोल के ब्रा के उपर से ही मेरे मम्मो पे किस करना शुरू कर दिया.

मैं- अक्षय बस ना. अब छोड़ दो. मुझे.जाने दो.

अक्षय-नहीं मेरी जान! अभी तो मजा शुरू हुआ है, जरा तुम भी एन्जॉय करो ना.

और उसने मेरी साड़ी में हाथ डाल के मेरी पैंटी निकाल दी और मेरी चूत को सहलाने लगा.
मेरी सिस्कारिया निकलने लगी…

मैं- आह्ह्ह्ह अमह्ह्ह्ह् अक्षय नाआअ.प्लीज़ नहीं ना अह्ह्ह…मेरी….नहीं अक्षय… छोड़ो मुझे…. आह्ह्ह्ह

मैं उसे अनमने मन से धकेलने लगी.

तभी वो मेरे ऊपर आकर बोला- रश्मि क्या तुम मुझे बिलकुल पसंद नहीं करती? ये सब तुम्हे भी तो चाहिए ना. तुम भी तो रोज मुझे छुप छुप के देखा करती हो? मैं जानता हूँ इसलिए जो हो रहा है उसे होने दो.

उसने मेरे होंठ फिर से चूसना शुरू किया. उसकी बात मेरे दिल को छू गयी थी और फिर इसके बाद मैंने भी उसे नहीं रोका.

अब वो मेरे शरीर से खेलने लगा. उसने मेरे सारे कपडे उतार दिए. मैं भी उसका साथ देने लगी और उसे अपनी ओर खींच कर उसके होंठ चूसने लगी.मैंने उसकी पैंट उतार दी और उसके लम्बे, काले तगड़े लंड को हाथ में लेकर उसपे भी किस करने लगी. उसने मेरे बाल पकड़े और मेरा चेहरा अपने तरफ खीचा और मेरे होठो पे होंठ रख दिए.

अब हम खुल के एन्जॉय कर रहे थे. वो मेरे गोले चूसने लगा और काटने लगा. मुझे दर्द हो रहा था और मजा भी आ रहा था. अब मेरी कमर, पीठ और चूत को चाट और काट रहा था. उसने  मेरे पूरे शरीर पे अपने दांतों के निशान बना दिए. मैं भी अब उसके ऊपर आ गयी और उसके बदन से खेलने लगी. उसके छाती से पेट पर काटने लगी.

फिर मैंने उसके लंड को चूसना शुरु किया. 5 मिनट बाद मैं नीचे बेड पे लेटी थी और वो मेरे ऊपर आ गया. उसने फिर मुझे किस करते हुए मेरे चूत में अपना बड़ा सा लौड़ा घुसाने लगा.

मैं- उह्म्म्म…उम्ह्ह्ह्.अक्षय!! छोड़ोदर्द हो रहा है. निकालो ना.आह्ह्ह.

तभी उसने फिर से मुझे किस किया और जोरदार धक्का दिया. मुझे जबरदस्त दर्द हुआ. मैं छटपटाने लगी. पर वो मुझे चोदता रहा. थोड़ी देर बाद में मुझे भी मजा आने लगा. अब हम दोनों नंगे बिस्तर में एक दूसरे से लिपट कर सेक्स में डूबे एन्जॉय कर रहे थे.

15-20 मिनट बाद वो मेरे अंदर ही झड गया. अब मेरे ऊपर पड़े- पड़े मुझे किस करने लगा.
फिर वो मुझ से अलग हुआ और बाजू में लेट गया. थोड़ी देर बाद फिर से उसका भुजंग खड़ा हुआ और हम फिर से एक दूसरे में डूब गए. अब वो मुझे चोदते हुए मेरे गांड में उंगली घुमा रहा था. तभी उसने झट से मुझे उल्टा करके मेरे गांड में अपना लंड डाल दिया.

मैंने मना किया तो उसने जोर से धक्के मारे और मेरी गांड चोदने लगा. लेकिन जल्दी ही वो गांड में ही झड़ गया.

अब हम दोनों बहुत थक गए थे. हम वैसे ही सो गए. जब मेरी नींद खुली शाम हो चुकी थी. मैंने देखा कि हम दोनों नंगे एक दूसरे के साथ सो रहे थे. मैंने उसके माथे पे चूमा. तभी मेरे फ़ोन की भी रिंग बजी. देखा तो मेरे पति का फोन था. मुझे होश आया और मैं सोचने लगी की ये मैंने क्या कर दिया? और मुझे इस सब पे बहुत अफसोस हुआ.

अब अक्षय भी उठा और मुझे देख कर खुश हुआ. मुझे अपनी ओर खीचा और किस किया.

मैं-अक्षय अब मुझे जाना चाहिए. संजय भी पप्पू को स्कूल से लेकर आ रहे है.

फ्रेश होकर मैने कपडे पहने और वहा से निकल गयी…

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