पड़ोसी से बना रिश्ता- भाग 3

दोस्तों मैं रश्मि जोशी! एक बार फिर से हाजिर हूँ आपकी आगे की कहानी जानने की जिज्ञासा को शांत करने के लिए. मेरी आपबीती “पड़ोसी से बना रिश्ता” के भाग 1 व 2 में आप ने जाना कि किस तरह मेरे पडोसी अक्षय की ओर मैं आकर्षित हुयी. किस तरह उसने पहले मेरी अपने घर पे ले जाकर चुदाई की और फिर मेरे पति के 5 दिनों तक शहर से बाहर रहने का फायदा उठा कर मेरे घर पे ही मेरी चुदाई की. अब आगे……

झमाझम चुदाई के बाद हम दोनों की कुछ देर के लिए आँख लग गयी थी. जब मेरी आँख खुली तो देखा घडी 11 बजा रही थी. अक्षय भी उठ गया और मुझे पीछे से पकड़ने लगा.

मैंने पूछा- क्या खाओगे?
अक्षय- तुम्हें.
मैंने हँसते हुए पूछा- अरे बाबा खाने में क्या खाओगे?
अक्षय- जो भी तुम बनाओगी.

अब मैं कपडे पहनने लगी तो उसने मुझे रोका.

मैं- क्या हुआ?

अक्षय- खाना बनाने के लिए कपड़े पहनने की क्या जरूओरत. ऐसे ही जाओ.

मैं- क्या पागलपन है? मुझे कपड़े पहनने दो!

अक्षय- बिलकुल नहीं.

फिर मैंने कई बार अक्षय से कहा पर वो नहीं माना. तो मैंने भी सोचा कि वैसे भी ये तो मेरा सब कुछ देख ही चुका है. अब छुपाने के लिए बचा भी क्या है? और हम दोनों के सिवाय वहां कोई था भी नहीं. पप्पू को भी अभी स्कूल से आने में थोड़ा समय था तो मैं बिलकुल नंगी ही किचेन में खाना बनाने चली आई.

मैं अभी सब्जी ही काट पाई थी की आक्षे भी वहां आ गया. वो भी बिलकुल नंगा ही था. उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया और मेरी गर्दन पे किस करने लगा.

मैंने कहा- अब खाना तो बना लेने दो.

अक्षय – पर मुझे तो अभी किसी और चीज की भूख लगी है.

फिर उसने मुझे उठा कर किचेन के स्लैब पे बिठा दिया और फ्रिज से एक बर्फ का टुकड़ा निकाल कर मेरे बदन पे घुमाने लगा. मेरे पूरे बदन में सिहरन होने लगी. मेरा खुद पे नियंत्रण खोने लगा. मैं उससे लिपट गयी. उसने फिर खुद को मुझसे अलग करते हुए मेरी टांगों को फैलाया और बर्फ का टुकड़ा मेरी चूत के ऊपर फिराने लगा. मेरी तो हालत ही खराब कर दी जालिम ने.

मैंने कहा- अब बस भी करो अक्षय!

अक्षय- मेरी जान! अभी तो मजा आना शुरू हुआ है सेक्स का.

फिर उसने छोटे हो गए बर्फ के टुकड़े को मेरी चूत में डाल दिया और अपने लंड से मेरी चूत में धक्का देते हुए उस टुकड़े को बिलकुल अन्दर तक पहुंचा दिया. बर्फ की थंधक से मुझे काफी गुदगुदी हो रही थी. लेकिन मुझे काफी मजा भी आ रहा था. मैं उससे लिपटना चाह रही थी पर वो मेरी चूत की ठुकाई में लगा हुआ था. अब तक मैं काफी गर्म हो चुकी थी और कुछ ही देर बाद मैं झड़ने वाली थी.

अचानक अक्षय ने अपना लंड बाहर निकाल लिया.

मैंने कहा- क्या हुआ? बाहर क्यों निकाल लिया?

अक्षय ने कहा- मैं जा रहा हूँ. मुझे एक काम याद आ गया.

उसकी इस हरकत से मै बिलकुल बिफर उठी. मैं अपनी चूत रगडती हुयी बोली- नहीं आभी चोद कर जाओ.

वो हँसने लगा और बोला- तो जैसा कहता हूँ वैसा बोलोगी?

मैंने कहा- जो बोलेगा सब बोलूंगी. जो कहेगा सब करूंगी. लेकिन अभी चोद मुझे.

उसने कहा- बोलो! मैं तुम्हारी रंडी हूँ.

मैंने कहा- मैं तुम्हारी रंडी हूँ.

अक्षय- मुझे दिन रात चोदो. मेरी चूत और गांड फाड़ दो!

मैं- मुझे दिन रात चोदो. मेरी चूत और गांड फाड़ दो!…… अब चोद भी दे साले. दिन रात चोद मुझे.

वो फिर से हंसने लगा लेकिन मेरे इस तरह उसकी हर बात मानने से वो खुश हुआ और मुझे फिर से चोदने लगा. लेकिन 2 मिनट बाद ही वो फिर से रुक गया. उसका लंड तो मेरी चूत में ही था पर वो रुका हुआ था.

मैंने कहा- चोद न मुझे रुक क्यों गया?
और उसे अपने और खीचने लगी. तभी उसने मेरी चोटी पकड़ कर मुझे उससे अलग किया और इधर-उद्हर कुछ खोजने लगा. फिर उसने सब्जी की दलीय से एक गाजर उठाया और बोला- ले डाल ले इसे अपनी चूत में.

मैं- ये क्या और क्यों कर रहे हो अक्षय?

अक्षय- चल डाल इसे.

मैंने उसके कहेनुसार उस गाजर को अपनी चूत में डाल लिया. 5 मिनट तक गाजर से मेर्री चूत चोदने के बाद उसने स्लैब पे मुझे ऐसे लिटाया की मेरा सर से कमर तक का हिस्सा तो स्लैब पे था और पैर नीचे. उसने फिर से गाजर को मेरी चूत में डालकर चोदने को कहा और खुद मेरी गांड में ऊँगली करने लगा. फिर उसने थोड़ा सा थूक अपने लंड पे लगाया और थोड़ा मेरी गांड में.

अब उसने अपना लंड मेरी गांड के छेद पे लगाया. मैं सांस रोककर और अपनी चूत में गाजर को यूँही छोड़ कर उसके धक्के का इन्तजार ककर रही थी कि उसने एक जोरदार धक्का मारा. मैंने जितना सोचा था उतना तो नहीं लेकिन फिर भी मुझे काफी दर्द हुआ. मेरी चीख निकल गई- आअ…..ईईई… धीरे अक्षय..

अब वो मेरी गांड चोद रहा था और मेरे उभारों को भी जोर- जोर से दबा रहा था. मुझे दर्द तो हो रहा था पर शायद काफी देर तक मोमबत्ती मेरी गांड में पड़ी रहने की वजह से शायद रास्ता बन चुका था. इसलिए अक्षय के लंड के धक्के ज्यादा कहर नहीं ढा रहे थे.

उसने कहा- खुद से अपनी चूत को गाजर से चोद. अब और मजा आएगा.

मैंने वैसा ही किया. सच में मुझे मजा आने लगा और अब तो गांड चुदाई के दर्द का एहसास भी नहीं हो रहा था. मुझे ताज्जुब हो रहा था कि अक्षय को इतना सब सेक्स के बारे में कैसे पता है.

अब मेरा चरम बिंदु आने वाला था. मैं झड़ने के कगार पे थी. मेरे मुँह से आआअ… उफ्फ्फ….चो…द  अक्षय ….. कस के चोद …. अआह… निकलने लगा.

उधर अक्षय भी धुंआ धार चुदाई करते हुए बडबडा रहा था- चुद साली रंडी… लंड बदल-बदल के चुद. आगे पीछे दोनों से चुद. अभी तो ये तेरी ट्रेनिंग है. आअ….ह… चुदवा ले अपनी गांड… चुद मेरी जान… चुद.

थोड़ी देर बाद हम दोनों झड़ गए. कुछ देर हम यूँ ही पड़े रहे. फिर मिनी बाथरूम में जाकर खुद को साफ किया. फिर अक्षय ने भी खाना बनाने में मेरी मदद की. फिर हम दोनों ने नंगे ही एक दुसरे के गॉड में बैठकर खाना खाया.

खाना खाने के बाद थोड़ी देर हमने बेडरूम में जाकर आराम किया. फिर मैं उठी तो वो भी उठकर अपने घर चला गया. मैं भी तैयार होकर पप्पू को लेने स्कूल चली गयी.

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