सलीम की शराफत और शबनम की शरारत – 2

अभी तक आप लोगों ने पढ़ा कि आग दोनों तरफ लग चुकी थी, दोनों के बदन इस आग में झुलस रहे थे, दोनों एक दूसरे की बांह में समा जाने चाहते थे. अपना – अपना पानी निकाल कर दोनों ने कुछ वक्त के लिये अपनी इस आग को बुझा तो दिया था पर अंदर दबी हुई चिंगारी किसी भी वक्त उसे फिर से भड़का सकती थी…

इस कहानी का पिछला भाग – सलीम की शराफत शबनम की शरारत – भाग 1
अब आगे …

अपने भाई की आज की हरकत देखकर शबनम कुछ ज्यादा ही मचल गयी थी. एक ही वक्त उसके मन ने प्यार और वासना की चरम सीमा छू ली थी. उसका मन अपने भाई के साथ शरारत करने के लिए मचल रहा था. वो अपने दिल की सारी बातें खुलकर अपने भाई को बताना चाहती थी.

आज जैसे ही सलीम अपने प्यार को बहा कर बाहर आया तो शबनम ने सलीम को छेडना चालू कर दिया…

शबनम – क्यों सलीम हो गये फारिक? फिर से कर दिया अपनी आपा के कपड़े गीले. क्या करते रहते हो तुम ? सब शरम बेच के खा गए क्या?

सलीम – क्या बोल रही हो तुम?

शबनम (आंखे बड़ी करके शरारती अंदाज में) – चुप रहो. तुम्हें क्या लगता है, मुझे पता नहीं कि तुम अंदर जाकर कुंडी लगाकर क्या करते हो? मैंने सब देखा है.

सलीम – अच्छा! क्या सब देखा तुमने?

शबनम – बेशरम, अब ये भी तुझे बताना पडे़गा. तूने मेरी कमीज के साथ क्या किया? खैर वो सब मैंने देखा.

सलीम – और चड्डी के साथ जो किया वो भी देखा?

शबनम – हां, वो भी देखा.

सलीम – तुम्हें बुरा लगा क्या?

शबनम – चल ठीक है, इस उमर में ऐसा हो जाता है, फिर मत करना ये सब. वरना…

सलीम – वरना क्या आपा?

शबनम – अच्छा बेटा, अब शबनम से आपा हो गई? आ गए न लाइन पर. अब सुनो मैं नहाने जा रही हूं. मेरे आने तक तुम ये सारा बिखरा सामान इनकी जगह पर रख दोगे. क्या समझे?

यह कहकर शबनम सीधा बाथरूम में चली गई. यह तो सलीम के लिये मौका था अपनी बहन के नंगे बदन को देखने का, तो वो बाथरूम के होल में आंख लगाकर बैठ गया. अंदर जाते ही शबनम ने अपनी बॉक्सर, गीली चड्डी, ब्रा और टी शर्ट उतार दिया. अब वह पूरी तरह नंगी थी. शबनम का नंगा जिस्म देखकर सलीम का लंड हवा में फिर से उड़ने लगा.

शबनम को देखकर लग रहा था कि जैसे वो कोई परी हो. जब शबनम ने अपने बदन पर पानी की धार छोड़ी तो बाहर भी जैसे सावन बरसने लगा. सलीम की चड्डी में मोर नाचने लगा था. उधर अन्दर शबनम का सुनहरा गोरा रंग और भी चमकने लगा था. साबुन का झाग उसके पूरे बदन को और भी खूबसूरत बना रहा था. उसके बोबो पर साबुन का झाग बर्फीले पहाड़ जैसा दिख रहा था. उसकी नाभि में साबुन मोती जैसे चमक रहा था. उसके चूत से फिसलते हुए जब पानी की लहर उसके जांघ पर उतरती तो पानी भी शराब बन रहा था. उसके बदन से गिरने वाली हर एक बूंद अपना नसीब सवांर कर जा रही थी. उधर बाहर अपने खडे़ लंड के नसीब को लेकर सलीम बाथरूम के दरवाजे पर आंख लगाकर बैठा था.

शबनम का नहाना खत्म हो गया था. चूंकि जल्दी- जल्दी में वो बिना कपड़ों और टॉवल के ही बाथरूम में घुस गई थी. तो शबनम अपने टी-शर्ट से ही अपने अंग को पोछ्ने की कोशिश की और फिर उसी गीले टी-शर्ट बिना ब्रा के और बॉक्सर बिना चड्डी के ही पहन लिया.

बिना चड्डी के बॉक्सर और बिना ब्रा के टी-शर्ट में शबनम नंगी से भी ज्यादा सेक्सी लग रही थी. उसका पूरा बदन जैसे उन कपड़ों से बाहर झांक रहा हो. उसके तने हुये बोबे और उनपर सजी हुई लाल चेरी, किसी नामर्द का लंड भी खडा कर दे. उस की खुली जुल्फें और उनसे टपकता पानी आग में घी डालने का काम कर रहा था. आज उसके बॉक्सर से उसकी चूत की दरार भी साफ देखी जा सकती थी.

ये सब देखकर सलीम का सारा खून उसके लंड मे जमा हो गया था. सलीम को कुछ भी सूझ नहीं रहा था. जैसे ही उसने देखा कि शबनम बाहर आ रही है सलीम अपने लंड को दबाकर जल्दी से हॉल के सोफे पर आ कर लेट गया.

बाथरूम से बाहर आकर शबनम ने हॉल में देखा कि सारा का सारा बिखरा हुआ सामान वैसे ही पड़ा है और सलीम सोफे पर टांगे फैलाकर सो रहा है. उसे सलीम पर बहुत गुस्सा आया, लेकिन जैसे ही शबनम की नजर उसके लंड पर गई तो शबनम को पूरा किस्सा समझ में आ गया और थोड़ी देर पहले उसके द्वारा गवांया हुआ मौका उसे फिर मिल गया था. इसबार वो उसे गवांना नहीं चाहती थी.

वो चाहती थी कि सलीम पहल करे और उसे वो सारा सुख दे जो वो चाहती थी. पहले ना-नुकर करके बाद में वो सलीम से खूब चुदवाना चाहती थी. पर सलीम की चुपके से शबनम की चड्डी सूंघने के आगे हिम्मत ही नहीं हो रही थी और शबनम का धीरज अब जवाब देने लगा था. उसके बदन में लगी आग अब सुलगने लगी थी. उसे किसी भी हालत मे सलीम का लंड अपनी चूत में डलवाना था. फिर भी उसने सलीम को उकसाने के लिये एक आखिरी ट्रायल मारने का सोचा.

वो जानती थी कि सलीम सो नहीं रहा है और चुपके से उसके आधे नंगे जिस्म को देख रहा है. उसने झूठ मूठ का सलीम को डांटना शुरू कर दिया और अपना बदन उसे अच्छी तरह से दिखाने लगी. वो बड़बडयाते हुए सोफे के सामने आ गई और नीचे झुक कर फर्श पर पड़ा सामान उठाने लगी.

अब शबनम अपने चूतड़ सलीम को दिखा रही थी. उसके गोरी – गोरी गांड की दरार भी बॉक्सर मे फंस रही थी और इससे उसकी गांड की खूबसूरती और बढ़ रही थी. झुकने से उसकी टी-शर्ट थोड़ी सी ऊपर खिसक गई जिसके कारण सलीम को उसकी लचकती गोरी कमर साफ दिख रही थी. उसकी बल खाती कमर देखकर सलीम अपने लंड पर बल लगा रहा था. न जाने कैसे वो अपने आप को कंट्रोल कर रहा था.

शबनम कब से इंतजार कर रही थी कि सलीम उठेगा और उसे पीछे से दबोच लेगा फिर वो पहले नखरे करेगी और बाद मे अपना बदन उसके हवाले कर देगी. पर सलीम हिम्मत ही नहीं जुटा पा रहा था. आखिर शबनम ने खुद ही शुरआत करने की सोची.

शबनम – सलीम… सलीम, चुपचाप उठ जाओ. एक काम बोला था वो भी तुम ढ़ंग से कर नहीं सकते? अब और सोने का नाटक मत करो, मुझे पता है कि तुम जाग रहे हो. तुम्हारा ये खडा लंड सब कहानी बता रहा है. जरूर तुम मुझे नहाते वक्त देख रहे थे. अभी भी मेरी गांड को घूर रहे थे और खडे लंड पर हाथ रखकर सोने का नाटक कर रहे हो? मैंने तुम्हें कहा था कि ऐसी हरकत दोबारा ना करना, वरना. और तुमने पूछा था ना कि वरना क्या?तो सुनो, वरना मैं तुम्हारा ये लंड खा जाऊंगी और वो भी चबा-चबा कर.

शबनम के मुंह से ये बातें सुनकर सलीम पागल हो रहा था. ये सच है कि सपना ये उसे समझ नहीं आ रहा था. शबनम के मुंह से लंड, चूत, गांड उसने सोचा भी नहीं था. एक्साइटमेन्ट या डर के कारण वो अपनी आंखें भी नहीं खोल रहा था. उधर शबनम के चूत की आग उफान पर थी.

शबनम – अब चुपचाप उठते हो या खा जाऊं तुम्हारा ये लंड? देखो मैं मजाक नहीं कर रही हूं. मैं तुम्हारे इस सांड जैसे लंड को निगल जाऊंगी. देखो मैं आ रही हूं. मैं पास आ रही हूं.

अब शबनम सोफे पर चढ़कर सलीम के ऊपर आ गयी थी. उसके हाथ सलीम की जांघ पर थे. अब सलीम उसकी सांसो को अपने लंड के पास महसूस कर रहा था, पर कंट्रोल तो देखो बंदे का. अभी भी सलीम अपने आंखें नहीं खोल रहा था. अब शबनम का हाथ सलीम के बॉक्सर के उपरी हिस्से पर था और वो सलीम के खडे़ लंड को मसल रही थी.

शबनम का हाथ अपने लंड पर पाते ही सलीम का दिल जोर – जोर से धड़कने लगा था पर अभी भी वो आंखें बंद करके लेटा था. अब शबनम ने बॉक्सर के ऊपर से ही उसका लंड चूमा और धीरे से उसकी बॉक्सर अंडरविअर के साथ नीचे खिसका दिया. अंडरविअर नीचे आते ही सलीम का लंड स्प्रिंग जैसे उछल कर बाहर आ गया जो बिलकुल शबनम के मुंह के सामने था.

शबनम के शरारतों के कारण सलीम का मोटा लंड आज कुछ ज्यादा ही मोटा लग रहा था. उसका गुलाबी टोपा गीला होकर चमकने लगा था. शबनम ने उसे आंखे भरकर प्यार से देखा और धीरे से अपने नाजुक हाथों से उसे पकड़ा.

जैसे ही शबनम के नाजुक हाथों ने लंड को टच किया तो सलीम की आंखें खुल गयी और वह बोल पड़ा – आह आपा!

शबनम और सलीम की आंखे मिली तो शबनम ने कहा – कहा था न, खा जाऊंगी.

जवाब में सलीम ने कहा – हां आपा, खा जाओ इसे, चबा डालो.

फिर सलीम अपने हाथों से शबनम की जुल्फों को सहलाने लगा. शबनम मदहोश होती जा रही थी. वह अपना चेहरा सलीम के लंड से घिसने लगी थी. कभी वो उसे अपने गोर – गोरे गालों पर रगड़ती तो कभी अपने लाल – लाल होठों पर. शबनम की गरम – गरम सांसे सलीम अपने लवडे़ पर महसूस कर रहा था. उसके होठों का गीलापन उसके लंड में आग लगाये जा रहा था.

शबनम ने अब अपनी जबान धीरे से बाहर निकाली और जैसे सांप दूध पीता है वैसे ही सलीम के गुलाबी टोपे का रस चखने लगी. उसने हल्के से सलीम के ओर ऊपर देखा तो सलीम आंखें बंद करके आहें भर रहा था – आ अ आह अह अह आह.

उसकी आहें सुनकर शबनम, और बेताब होने लगी उसने लंड का गुलाबी टोपा अपने मुंह में भर लिया और मदहोशी में आंख बंद करके धीरे – धीरे पूरा का पूरा लंड मुंह में ले लिया. उस वक्त शबनम को ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी ने लोहे की गर्म सलाई उसके मुंह में भर दी हो.

बिल्ली जैसे आंख बंद करके शबनम अपने भाई के लंड का चस्का ले रही थी, उसे चूस रही थी और बीच – बीच में अपनी जबान बाहर निकाल कर उसके लंड को जड़ से चाट रही थी.

सलीम की आहें उसे और मदहोश कर रही थी. सलीम के हांथ कभी शबनम के बालों को तो कभी उसके गालों को सहला रहे थे. सलीम के जज्बात बेकाबू होते जा रहे थे. अपनी बला की खूबसूरत बहन, जिसके नाम से आधा कॉलेज और वो खुद भी अब तक मुठ मारता था, आज वह उसका लंड चूस रही थी.

ये ख्याल उसे पागल बनाए जा रहा था. कभी अपनी कमर उछाल कर तो कभी उसके मुंह को अपने लंड पर दबाकर वो अपनी बेताबी दिखा रहा था और वह बड़बड़ाता जा रहा था – आपा, मेरी प्यारी आपा, चूसो चूसो न. आय लव यू आपा. तो वहीम शबनम के मुंह से हूं हूं की आवाजें आ रही थी.

सलीम अब अपने चरम सीमा के करीब था. उसकी आहें बढ़ती जा रही थी और एकदम से उसने शबनम का सर हल्के से अपने लंड पर दबाया और उसके मुंह में ही अपना प्रेम रस बहा दिया. जो रस अब तक उसके नाम पर बाहर बह रहा था, वही आज शबनम के होठों पर था.

सलीम आंखें बंद करके दुनिया का सबसे बड़ा सुख महसूस कर रहा था और शबनम अपने भाई के लंड का स्वाद ले रही थी. आधा रस तो वो पी गई थी और आधा उसके होठों से बहकर उसके चेहरे पर आ गया था. सलीम ने शबनम का वो रूप जब देखा तो वो और पागल हो गया. ये वही रूप था, जिसकी कल्पना वो अक्सर मुठ मारते वक्त अपनी बहन के लिये करता था.

बिना ब्रा के टी-शर्ट और बिना चड्डी के बॉक्सर में शबनम की गोरी – गोरी टांगे और जांघो पर काला तिल, सेक्सी अंदाज में बिखरे बाल और होठों से टपकता हुआ उसके लंड का रस. इसी सेक्सी रूप में वो अपनी आपा को याद करता. आज उसी रूप में शबनम उसके सामने खडी थी तो वो अपने आपको कैसे कन्ट्रोल करता.

सलीम ने उठकर शबनम को पकड़ लिया और उसे चूमने लगा. सलीम उसे हर जगह चूम रहा था. कुछ ही देर में सलीम शबनम के गाल से लेकर उसकी नाभि और चूत तक चाट कर साफ कर दिया. जब सलीम शबनम की चूत चाट रहा था उसी बीच वह झड़ गई और सलीम ने उसके चूत रस का भरपूर आनंद लिया.

इसी दरम्यान सलीम का लंड जो झड़ने की वजह से ढ़ीला हो गया था फिर से खड़ा हो गया. अब सलीम ने देर करना ठीक न समझा और वह अपनी आपा के ऊपर आ गया. वह एक हांथ से उसके एक बोबे को मसल रहा था और दूसरे को मुंह में लेकर चूस जा रहा था, जिसकी वजह से शबनम अपनी आंख बंद किए अपने भाई द्वारा किए जा रहे इस मर्दन का मजा ले रही थी.

इसी बीच सलीम ने अपना लंड शबनम की चूत पर सेट करते जोरदार धक्का लगाया. उसका रॉड जैसा लंड शबनम की चूत को फाड़ता हुआ पूरा अंदर घुस गया. शबनम दर्द से उछल पड़ी और छूटने की कोशिश करने लगी. लेकिन अब सलूम रुकने वाला नहीं था. बहुत इंतजार के बाद उसे अपनी बहन की चूत में लंड डालने का मौका मिला था.

सलीम लगातार झटके लगा रहा था. कुछ देर बाद जब शबनम का दर्द कम हुआ तो वह भी उछल कर लंड अंदर लेने लगी, आखिर वो भी काफी प्यासी थी. करीब 15 मिनट की जोरदार चुदाई के बाद सलीम, शबनम की चूत में ही झड़ गया. उसके वीर्य की गर्मी को महसूस करके शबनम ने भी अपना काम रस छोड़ दिया.

अब दोनों भाई – बहन फारिग हो चुके थे. सलीम उसी तरह शबनम के ऊपर पड़ा रहा और फिर दोनों वहीं सो गये.

अब क्या था, शबनम और सलीम दोनों की मुंह मांगी मुराद पूरी हो गई थी. दोनों मियां -बीबी की तरह रहने लगे थे.

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