पसन्द अपनी-अपनी-भाग१

दोनों नग्न देहों की कामुक सित्कारें पूरे कमरे में गूँज रही थी. ये आवाजें तब तक गूंजती रहीं जब तक दोनों के अन्दर उठता वासना का तूफ़ान शांत नहीं पड़ गया…….

सभी अन्तार्वासना पाठकों को मेरा सप्रेम नमस्कार!! मेरा नाम उदय है. जीवन के 26 बसंत देख चुका हूँ. कद काठी औसत है. अब तक का जीवन भी औसत ही गुजरा है. मतलब पढने में औसत रहा. नौकरी भी औसत मिली और जब शादी हुयी तो बीवी भी औसत. भरे शरीर वाली और कद में थोड़ी छोटी. सुनीता नाम है उसका. बड़ा बोरिंग सा चल रहा था. अन्तर्वासना की कहानियाँ पढने के सिवाय कुछ भी रोमांचक नहीं लग रहा था.

फिर धीरे-धीरे किस्मत के दरवाजे खुलने शुरू हुए. या यूँ कहिये कि मैंने खुद अपनी औसत बोरिंग जीवन को कुछ किस्मत के सहारे तो कुछ आपने दिमागी कीड़े का इस्तेमाल करते हुए ख़ास बनाना शुरू कर दिया.

बात पिछले वर्ष की है. जब मेरे बॉस की पोस्ट पे अमन आया. वो दूसरे शहर का था. मेरा हमउम्र था या शायद एक आध वर्ष छोटा था. अभी हाल ही में उसकी भी शादी हुयी थी. मेरे मैनेजिंग डायरेक्टर ने मुझे बुलाकर उससे परिचय कराया और उसकी हर सम्भव मदद करने को कहा.

आब अमन को अपने लिए किराए का कमरा चाहिये था. मेरे सामने के मकान में ही एक फ्लैट खाली हो रहा था तो मैंने मकान मालिक से बात करके उसे वो फ्लैट दिलवा दिया.

अगले दिन अमर अपने घर का सामान और अपनी पत्नी को लेकर उस फ्लैट में शिफ्ट हो गया. हाय! लेकिन जब मैंने उसकी बीवी नेहा को देखा तो देखता ही रह गया. क्या कमाल का फिगर था. स्लिम- ट्रिम. बिलकुल मॉडल जैसी. दूध के जैसी गोरी और उसपे भूरे लम्बे बाल. मैं तो फ़िदा हो गया था.

जिस दिन मैंने उसे देखा तो ये हाल था कि जो आदमी हफ्ते में एक आध बार अपनी पत्नी की चुदाई करता था, उस दिन मैंने नेहा के नाम की दो बार मुठ मारी.

अब रोजाना अमन के साथ ही ऑफिस जाना होता था. अमन वैसे तो मेरा बॉस था लेकिन रोजाना साथ में आते जाते हममे एक दोस्ती जैसा रिश्ता बन गया था. हालाँकि ऑफिस में हम प्रोफेशनल रहते.

अमन को पोर्न फ़िल्में देखने का बड़ा शौक. शौक तो मुझे भी था लेकिन जहाँ अमन को भारतीय सेक्स क्लिप देखने में मजा आता था तो मुझे विदेशी स्लिम ट्रिम माहिलाओं को लंड पे कूदते देखना ज्यादा भाता था. अमन और मैं अब सेक्स के बारे में भी अब खुल के बातें करने लगे थे.

अमन को भारतीय नारियों का भरा मांसल देह भाता था. उसे लजाती – शरमाती – सकुचाती भारतीय महिला का किसी पुरुष के नीचे लेट कर चुद्वाते देखना ज्यादा पसंद था. और मेरी पसंद इसके ठीक विपरीत थी. भई ! हर किसी की अपनी अपनी पसन्द होती है. ऑफिस से लौटते वक़्त भी अमन रास्ते में जब किसी बड़ी चूची वाली या चौड़े नितम्बों वाली महिला को देखता तो उसपे से निगाह नहीं हटा पाता.

एक दिन संडे को मैंने और सुनीता ने अमन और नेहा को खाने पे बुलाया. हमने आपस में खूब हंसी मजाक किया. मैंने नोटिस किया कि अमन चोर निगाहों से मेरी पत्नी सुनीता के चूचियों को ताड़ता. जब सुनीता का पीठ अमन की ओर होता तो अमन की निगाहें सुनीता के चूतडों पे टिक जातीं. यही हाल मेरा भी था. मैं भी नेहा गोरे बदन को रह रह कर निहार लेता.

उस रात मैं नेहा की अदाओं के बारे में ही सोचता रहा. फिर मेरे दिमाग में एक तरकीब सूझी. अगले दिन से मैंने अमन के सामने अपने सुनीता के बीच सेक्स के झूठे सच्चे किस्से ब्यान करने शुरू कर दिए. जिसमे मै उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों और बड़ी सी गांड की खूब तारीफ़ करता. इसी तरह घर पे अमन की खूब तारीफ करता.

धीरे- धीरे मैंने नोटिस किया कि अमन का आना- जाना मेरे घर में यकायक बढ़ गया. बालकनी में भी आने पे अमन की निगाहें सुनीता पे होतीं. प्लान ने शायद काम करना शुरू कर दिया था. इधर रात में मैं जब सेक्स करता तो सुनीता को जानबूझ कर अतृप्त ही छोड़ देता था.

एक दिन मैं अमन को लेकर एक लेडीज अंडर गारमेन्ट की दुकान पे गया. वहाँ से मैंने एक 38” की ब्रा और 100 सेमी की पैंटी खरीदी. ब्रा और पैंटी खरीदते वक़्त मैं जानबूझ कर अमन से पूछ रहा था कि ये ठीक है या वो ठीक. घर आकर मैंने बातों बातों में ही सुनीता को बता दिया कि अमन को भी ये ब्रा पैंटी ही ठीक लग रही थी. मैंने देखा कि सुनीता के चेहरे पे भी मुस्कान तैर गयी थी.

सब कुछ मेरे प्लान के मुताबिक़ ठीक चल रहा था. सुनीता को भी मैंने अन्तर्वासना पे बीवी की अदला-बदली से सम्बंधित कई कहानियाँ अपने मोबाइल पे पढ़वाने लगा.

एक दिन जब सुनीता नहा रही थी तो मैंने उसका मोबाइल चेक किया. मैंने देख कि अमन के उसमे ढेर सारे मैसेज थे. अमन के मैसेज काफी फ्लर्टी थे. सुनीता की तरफ से कोई शरारती मैसेज तो नहीं था लेकिन अमन के मैसेज का कोई विरोध भी नहीं था. मैं समझ गया कि माहौल टाईट हो गया है. अब बस मुझे मौका बनाना था.

मैंने शनिवार की छुट्टी के लिए ऑफिस में अप्लिकेशन दे दिया और अमन को भी बता दिया की शनिवार और इतवार दो दिन मैं घर से बाहर रहूँगा. मेरे घर में दो कमरे हैं. एक ड्राइंग रूम और एक बेडरूम. मैंने दोनों जगह हिडन कैमरे लगा दिए. और दो दिनों के लिए वाकई अपने माता-पिता के यहाँ गाँव पे चला गया.

सोमवार की सुबह जब मैं लौटा तो दोनों कैमरे की फाइल अपने लैपटॉप पे लोड कर लिया और अमन के साथ ऑफिस के लिए निकल गया. आज अमन काफी चुप-चाप था और मैं भी. अभी मैंने क्लिप देखी नहीं थी. इसलिए जानने की जल्दी थी की इन दो दिनों में क्या हुआ?

ऑफिस में अपने केबिन में जाकर मैंने रोजाना वाले कुछ काम निपटाए और अपनी कुर्सी पे बैठ कर पिछले दो दिनों वाली क्लिप चालू कर दी. शनिवार वाली क्लिप में तो कुछ भी नहीं था. उसमे सिर्फ ये दिख रहा था की सुनीता आज बार-बार किसी से बातें किये जा रही है. लेकी आवाज क्लियर नहीं आ रही थी. फिर मैंने सन्डे वाली क्लिप चला दी.

सन्डे को ठीक दोपहर 12 बजे अमन और सुनीता द्रविंग रूम में बैठकर बातें कर रहे थे. पहले तो दोनों आमने सामने बैठे थे. फिर अमन बातें करते-करते सुनीता के पास जाकर बैठ गया. फिर अमन ने सुनीता का हाँथ अपने हाथों में ले लिया. सुनीता ने अधूरे मन से हाथ छुड़ाने की कोशिश की. लेकिन अमन ने नहीं छोड़ा. फिर अचानक अमन ने सुनीता के चेहरे को अपने हाथों में ले लिया और उसे किस करने लगा. थोड़े से प्रतिरोध के बाद सुनीता भी अमन का साथ देने लगी.

अब अमन के हाथ सुनीता के स्तनों को कठोरता से निचोड़ रहे थे और सुनीता की सिस्कारियां साफ़ सुनाई दे रहीं थी. फिर अमन ने सुनीता की बड़ी-बड़ी चूचियों को उसके ब्लाउज और ब्रा से आजाद कर दिया. ये वही ब्रा थी जो मैंने उस दिन अमन के साथ खरीदी थी. अब अमन ने सुनीता की एक चूची अपने मुँह में ले ली और दूसरी चूची को बेतहाशा मसलने लगा. अपनी ही बीवी का ये दृश्य देखकर मेरा लंड भी मेरे पैन्ट में तम्बू बनाने लगा.

तभी मैंने देखा कि अमन ने सुनीता की साड़ी और बाकी के कपड़े उतार दिए और उसे अपनी बाहों में लेकर बेडरूम में जाने लगा. अब मैंने दुसरे कैमरे की फ़ाइल खोल ली और आआगे का सीन उत्सुकता से देखने लगा.

बेडरूम में जाकर अमन ने सुनीता को लिटा दिया. और अपने भी सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया. अमन का लंड इस वक़्त तक खड़ा हो चुका था. तकरीबन 6” का था. मेरे ही बराबर लेकी मोटाई मुझसे ज्यादा थी. सुनीता ने अपने दोनों हाथों से अपने चेहरे को ढका हुआ था.

अमन ने पहले सुनीता के चेहरे से उसके हाथों को हटाया और फिर सुनीता की टांगों को फैलाया. कुछ देर तक तो वो सुनीता की चूत को अपने हाथों से टटोल कर देखता रहा और फिर अपने लंड का धक्का सुनीता की चूत में लगाने लगा. दोनों नग्न देहों की कामुक सित्कारें पूरे कमरे में गूँज रही थी. ये आवाजें तब तक गूंजती रहीं जब तक दोनों के अन्दर उठता वासना का तूफ़ान शांत नहीं पड़ गया.

अमन वहां 5:00 बजे तक रहा और इस दौरान दोनों ने एक बार और चुदाई की. मैंने अपने लैपटॉप से इन दोनों की मूवी क्लिप अपने मोबाइल में डाउनलोड की और अमन के केबिन की ओर बढ़ चला….

आगे की कहानी जानने के लिए कहानी के अगले भाग का इन्तजार करिए और मुझे ढेरों मेल.

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