पति और पत्नी का अमर प्रेम

सुहाना ने जैसे ही खिड़की के परदे हटाये सुबह सुबह सूरज की किरने आँखें मीचते हुए अश्विन के चेहरे पे पड़ी. एक हल्की मुस्कान दोनों के ही चेहरे पे तैर गयी. रविवार की ये सुबह कुछ ज्यादा ही रोमांटिक लग रही थी. क्यों?…….ये जानने के लिए कहानी को थोडा बैक फ़्लैश में ले चलते हैं……….

कॉलेज के समय से दोस्त रहे सुहाना और अश्विन एक दुसरे से बेइन्तहा मोहब्बत करते हैं. उनकी शादी घर वालों की मर्जी के बगैर हुयी थी. इसलिए दोनों अब अपने अलग आशियाने का तिनका तिनका जोड़ रहे थे. अश्विन एक सॉफ्टवेर कंपनी में सेल्स मेनेजर की पोस्ट पे था और अच्छा कमा लेता था. शादी  के बाद उसी शहर में दोनों एक किराये के फ्लैट में शिफ्ट हो गए थे.

शाम को जब थका हारा अश्विन काम से लौटता तो उसका इंतजार कर रही सुहाना की मुस्कान उसकी सारी  थकान मिटाने के लिए काफी होती. एक परी कथा सरीखी कहानी अपनी गति से एक सफल जीवन गाथा में परिवर्तित हो रही थी. सुहाना और अश्विन दोनों ही सुदर्शनिय थे.

अश्विन एक गोरा चिट्टा जवान मर्द था तो सुहाना एक गोरी छरहरी काया वाली सेक्सी लड़की. बिस्तर में भी वो दोनों एक दुसरे का साथ बखूबी निभाते थे. हर रात बिस्तर पे गिरते ही दोनों में स्फूर्ति और ऊर्जा का संचरण अपने चरम पर होता था. उनकी काम क्रिया की गतिशीलता पूरे कमरे को गर्म कर देती थी.

रविवार का तो दोनों बेसब्री से इंतजार करते. क्योंकि यही वो दिन होता जिस दिन दोनों खुल कर पूरा समय एक दुसरे के साथ खुल्लम खुल्ला सेक्स करने में बिताते. आज वाला रविवार भी कुछ अलग नहीं है. लेकिन कल शनिवार को अश्विन कुछ पोर्न ब्लू फिल्म की सी डी  ले आया था जिसमे सम्भोग के नए नए तरीकों को इस्तेमाल करते विदेशी जोड़ों को देखकर दोनों ने काफी उत्तेजित होकर एक दुसरे के साथ सेक्स किया लेकिन वही पुराने तरीकों से. लेकिन नींद की गहराईयों में खोते वक़्त अश्विन औए सुहाना ने तय किया की, रविवार को वो हर वो तरीका इस्तेमाल करेंगे जो इन पोर्न ब्लू फिल्म में है.

नित्य क्रिया कर्म के बाद नाश्ते  के टेबल पर लगभग अपना पूरा नाश्ता फिनिश कर चुके अश्विन ने सुहाना को अपनी और खींचा और उसके रसीले होठों का चुम्बन करने लगा. लेकिन तभी उसे कल रत वाली फिल्म का एक सीन याद आया और उसने टेबल पर पड़े प्लेट में से अंगूर का एक दाना उठाया और अपने दांतों के बीच रखकर दुबारा से सुहाना के होठों का चुम्बन लेने लगा. सुहाना भी मदमस्त होकर अश्विन का साथ देने लगी. इस वक़्त तक सुहाना ने सिर्फ एक झीनी नाइटी पहन रखी थी. धीरे धीरे अश्विन ने सुहाना की कपड़ों के ऊपर से ही उसकी  बड़ी चूच पे अपने हाथ फिराने शुरू किये. चूचियों के मसलने से सुहाना के मुह से भी सिस्कारियां निकलने लगीं. दोनों एक दुसरे में इतना खोये हुए थे की किसी और चीज का उन्हें होश ही नहीं था.

फिर अश्विन ने सुहाना को वही टेबल पे लिटा दिया और उसकी नाइटी को नीचे सरका दिया. अब सुहाना सिर्फ काली ब्रा पैंटी में थी, जो उसके गोरे बदन पे खूब फब रही थी. अश्विन भी अपने कपडे उतार कर सिर्फ अंडरवियर में हो गया. उसने सुहाना की दोनों टांगों को चौड़ा किया और पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को काटने लगा. सुहाना की उत्तेजना अब अपने चरम पे पहुँच गयी थी. उसने इशारे से अश्विन को अलग किया और खुद ही अपनी पैंटी अपने जिस्म से अलग कर दी. अश्विन ने फिर सुहाना की ब्रा भी उतर दी. अब अश्विन की नजर टेबल पे रखे फ्रूट बास्केट में पड़े केले पर गयी उसे फिर से पोर्न ब्लू फिल्म का वो सीन याद आ गया जिसमे एक लड़की केले को अपनी चूत की गहराईयों में उतार लेती है.

अश्विन के हाथ में केले को देखकर सुहाना भी अश्विन का मतलब समझ गयी. उसने अश्विन से पूछा- क्या तुम्हे भूख लगी है?

अश्विन ने हाँ में जवाब दिया तो सुहाना ने केले के छिलके को केले से अलग करते हुए अश्विन के होठों की और बढाया, लेकिन ये क्या? उसने तो केले को अपनी दोनों टांगों के बीच में सेट कर लिया. धीरे धीरे उसने लगभग पूरा केला अपनी गोरी चिकनी मुंडा चूत में उतार लिया और कुछ हिस्सा बाहर ही निकले रहने दिया.

सुहाना के दिल की हर धड़कन पहचानने वाले अश्विन के लिए ये इशारा काफी था. अश्विन ने सुहाना की चूत में घुसे केले को धीरे धीरे खाना शुरू किया. उसके होठों की रगड़ से उत्तेजित होकर सुहाना की चूत पानी पानी हो रही थी. पूरा केला ख़त्म होने तक सुहाना की चुदास एकदम चरम पे पहुँच चुकी थी. सुहाना ने अश्विन से कहा – अब तुम्हारा पेट भर गया हो तो मेरी भूख मिटाओ.

लेकिन इतना कहने के बाद उसने इंतजार न करते हुए टेबल से उठकर अश्विन के शरीर पे बचे एक मात्र कपडे को उतार दिया. अब तक अश्विन का बड़ा लंड भी तन कर एकदम कड़क हो चुका था. सुहाना ने एक ही झटके में पूरा लंड अपने मुह में गटक लिया और मुखमैथुन करने लगी.

अश्विन को एक सुखद आश्चर्य हुआ क्योंकि अभी तक सुहाना ने कभी भी अश्विन का लंड अपने मुह में नहीं लिया था. लेकिन आज तो वो बड़े मजे से इसे चूस रही थी. शायद ये कल रात वाली फिल्म का कमाल था.

कुछ देर बाद अश्विन ने सुहाना को खड़ा करके टेबल के ऊपर ही झुका दिया. ये झुकाव इतना था की सुहाना की गुलाबी चूत आराम से अश्विन को नजर आ रही थी. अश्विन ने सुहाना की टांगों को थोडा और चौड़ा किया और अपने लंड को सुहाना की चूत पे सेट करके एक धक्का दिया. पूरा लंड एक बार में ही सुहाना की चूत के अंतिम हिस्से तक पहुच गया. पूरा लंड सुहाना की चूत में ऐसे फिट हो गया था, मानो सिर्फ इसी चूत के लिए बना हो. अश्विन ने अब धक्के लगाने शुरू किये. हर धक्के के साथ सुहाना की सिसकारियाँ और भी कामुक होती जा रही थी.

अश्विन का एक हाथ सुहाना की बड़ी चूच के मसाज में लगा हुआ था. फिर उसने अपने दुसरे हाथ की ऊँगली को सुहाना की गांड की छेदा पे रखा और दबाव बनाते हुए उसे रगड़ने लगा. अश्विन की बड़ी इच्छा थी की एक दिन वो सुहाना की गांड चुदाई भी करे. लेकिन फ़िलहाल तो अश्विन के अंगूठे की रगड़ से सुहाना को और भी मजा आने लगा. अचानक उसका बदन अकड़ने लगा. अश्विन को भी लगा की सुहाना झड़ने वाली है तो उसने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी. दोनों बेतहाशा अपने उन्माद को एन्जॉय कर रहे थे. सुहाना झड चुकी थी. अश्विन का लंड निकाल कर उसने फिर से उसे अपने मुह में ले लिया. एक ही रात में सुहाना मुखमैथुन की उस्ताद हो गयी थी. अश्विन को तो जैसे परमानन्द की अनुभूति हो रही थी. फिर वो समय भी आया जब उसके लंड से वीर्य की धार छूट पड़ी. सुहाना ने भी उसकी एक एक बूँद का वीर्यपान कर लिया.

दोनों पति और पत्नी निढाल होकर वहीँ पड़ी कुर्सियों पे बैठ गए, और एक दुसरे की आखों में अपने लिए अमर्त्य प्रेम का अनुभव करने लगे.

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