पति की नौकरी के खातिर पत्नी बनी रखैल

एक बार एक औरत मेरे पास अपने पति को नौकरी देने के लिए कहने आई. वह गजब की खूबसूरत थी. मेरे सामने बैठ कर उसने मुझे अपने हुस्न के जलवे दिखाए. जिससे मैं उस पर मर मिटा. फिर मैंने उसके पति को नौकरी देने के बदले एक शाम मेरे नाम करने को कहा. वह तैयार हो गई. फिर मैंने उसके पति को नौकरी दे दी और उसे हमेशा के लिए अपनी रखैल बना लिया…

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम निखिल है और ये अन्तर्वासना पर मेरी पहली और सच्ची कहानी है. ये कहानी तब की है जब मैं एक प्राइवेट कंपनी में बड़े पद पर काम कर रहा था.

दोस्तों, मैं कंपनी के मलिक का सबसे करीबी और वफ़ादार था. इसलिए जब एक दूसरी जगह कंपनी का नया प्लांट लगने वाला था तो मुझे प्लांट की सारी जिम्मेदारी देकर उस नई जगह भेजा गया.

जहां पर प्लांट लगना था वो एक छोटा सा गांव था. उसके आसपास दूर तक कोई बड़ा शहर नहीं था. यही नहीं और भी तमाम जरूरी सुविधाओं का अभाव था. घर का सामान लाने के लिए भी दो घंटे तक का सफर तय करके दूर कस्बे तक जाना पड़ता था.

कंपनी ने मेरे लिए वहां पर एक ऑफिस और एक कार की व्यवस्था तो कर दी. लेकिन रहने का कोई ठिकाना नहीं था. इसलिए मैंने ऑफिस में ही एक जगह अपना बिस्तर लगाने का इंतज़ाम कर लिया था.

सब सही चल रहा था. दिन गुजर रहे थे. नये लोग आ रहे थे और सब मिल कर अच्छे से काम कर रहे थे. मैं भी अपने काम को पूरा ध्यान लगाकर करता था. इसी बीच एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिससे मैं पूरी तरह हवस में डूबता चला गया.

हुआ यूं कि एक दिन मैं अपने ऑफिस में बैठा काम कर रहा था. तभी अचानक एक औरत मेरे केबिन में घुस आई. काम में बिज़ी होने के काऱण पहले तो मैंने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया लेकिन जब एक बार उस पर मेरी नज़र पड़ी तो मेरे होश उड़ गये.

क्या माल लग रही थी! उसने साड़ी पहन रखी थी, जिसमें से उसका सफेद गोरा रंग कहर ढा रहा था. उसका भरा हुआ बदन, पतली और सपाट कमर के साथ – साथ उसके खरबूजे जैसे चूचे मेरे लंड को खड़ा करने के लिए काफी थे.

उसे देख के मेरे तन – बदन में आग लग चुकी थी. कुछ देर तक तो मेरा सारा ध्यान उसके चूचे पर ही था. ऐसा लग रहा था जैसे उसके 38 इंच के चूचे उसके ब्लाउज़ और ब्रा को फाड़ कर मेरे हाथ में आ जाने को बेताब हैं. वो क्या बोल रही थी, वह तो मुझे सुनाई ही नहीं दे रहा था. मेरा मन कर रहा था कि उसे पटक कर अभी के अभी चोद दूं.

उसने भी मेरी इस हरकत पर ध्यान दिया था लेकिन इसके बावजूद वो कुछ नहीं बोली. शायद वो समझ गई थी कि साहब कितना कमीना है! खैर, फिर किसी तरह खुद को कंट्रोल करके मैंने उससे पूछा कि क्या काम है? तब उसने बताया कि उसका नाम विद्या है और उसके पति को नौकरी की ज़रूरत है. इसलिए वो उसे नौकरी देने का अनुरोध करने आई है.

फिर मैं उससे उसके बारे में और जानकारी पूछने लगा. वह बताने लगी. उसके बात करने का तरीका देख के मैं भी समझ गया कि ये खेली – खाई औरत है. बात करते वक्त वो आंखों मे आंख डाल कर बात करती थी. उसकी आंखों में एक ललचा देने वाली कशिश थी. हर बार वो अपने ब्लाउज के ऊपर से उंगली में फंसा कर पल्लू को थोड़ा दूर सरका देती थी. मेरी नियत को अच्छी तरह समझ कर वो बोली – साहब, मेरे पति को काम पर लगवा दो. फिर आप जो मांगोगे मैं वो मांग पूरी कर दूंगी.

वो बोल रही थी और मैं उसके भरे हुए गोरे चूचों को निहार रहा था. मेरा तो जी कर रहा था कि उसे वहीं टेबल पर लिटा के अपना लंड उसकी चूत में डाल दूं. तब तक उसके बार – बार पल्लू खिसकाने से मुझे उसके दोनों चूचों की झलक मिलने लगी थी.

फिर मैंने उसे अपना मोबाइल नंबर वहीं लिखवा जाने को कहा. नम्बर लिखवा कर जब वो जाने लगी तब मुझे उसकी भरी हुई मदमस्त गांड के दर्शन हुए. अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. पहले ही मैं बहुत दिन से भूखा था. तभी मैंने उसे फिर से आवाज़ दी और कहा – विद्या जी, अगर आपके पति को काम चाहिए तो आपको मेरा एक काम करना पड़ेगा.

मेरी बात सुन कर वो खुशी से उछल पड़ी और बोली – साहब, आप जो भी बोलेंगे मैं वो सब करूंगी.

तब मैंने कहा – बस आज की अपनी शाम आप हमारे नाम कर दीजिए. साथ में एक कप चाय पी लेंगे.

वो मेरा इशारा समझ गई थी. फिर उसने एक स्माइल दी और मेरे एक दम करीब आकर खड़ी हो गई. इतना करीब की उसकी छाती की गर्माहट तक मुझे महसूस हो रही थी. फिर वो बोली – अगर चाय ही पीनी है तो यहीं पी लेते हैं, यहां तो चाय भी आपकी है और प्याली भी.

उसकी बात सुन कर और उसकी तरफ से हरी झंडी मिलने के बाद मैंने ज़्यादा कुछ ना सोचते हुए सीधा उसकी कमर में हाथ डाल दिया और उसके पेट पर हाथ घूमाते हुए एक जोरदार किस कर लिया. वो भी कुछ कम नहीं थी. फिर उसने भी झट से आपना पल्लू बाजू में कर लिया.

यह देख मैं पूरा मदहोश हो गया और ज़ोर – ज़ोर से उसके चूचों को दबाने लगा. अब वो आहें भरने लगी. मेरा लंड खड़ा हो चुका था और उसकी साड़ी के ऊपर से ही अंदर घुसना चाह रहा था.

फिर मैंने झट से उसकी साड़ी खोल दी. साड़ी खुलते ही उसने अपनी पैंटी भी निकल दी. इसके बाद मैंने अपना पैंट नीचे करके लंड बाहर निकाला और उसके बाल पकड़ के पूरा उसके मुंह में घुसा दिया.

अब मुझ पर हवस हावी थी. मैं ज़ोर – ज़ोर से उसके मुंह में ही लंड अंदर – बाहर कर रहा था. इससे उसे सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था. थोड़ी देर तक लगातार लंड अंदर – बाहर करने के बाद मैं पूरा का पूरा उसके मुंह में ही झड़ गया. इसके बावजूद मेरा लंड अभी खड़ा ही था. वो हसीन औरत मेरे सामने नंगी खड़ी थी. ऐसे में लंड के सुस्त होने का तो सवाल ही नहीं था.

फिर मैंने उसे उठा कर टेबल पर लिटा दिया और फिर से अपना लंड उसके मुंह में दे दिया और उसकी चूत चाटने लगा. वो कसमसा रही थी. उसकी चूत से लगातार पानी बह रहा था. जिसे मैं चाट गया था.

कुछ देर बाद मैं सीधा हो गया और उसके पैरों को अपने कंधे पर रख कर लंड सीधा उसकी चूत में डाल दिया. अब उसने आंखें बंद कर ली थी और टेबल को पकड़ रखा था. वह जोर – जोर से आहें भर रही थी. उसकी आहें पूरे केबिन मे गूंज रही थीं और मैं जोर – जोर से उसे पेल रहा था. थोड़ी देर बाद वो अकड़ गई और अपना माल छोड़ दिया.

अब मेरा ध्यान उसकी मस्त गांड पर गया. फिर मैंने उसे टेबल से उतार कर घोड़ी बना दिया. दोस्तों, शायद उसने कभी गांड नहीं मरवाई थी इसलिए वो डरने लगी. लेकिन मैं कहां मानने वाला था. अब मैं उसकी गांड को चाटने लगा.

मेरे ऐसा करने से उसे मज़ा आने लगा और वो फिर से तैयार होने लगी. उसकी मस्त और भरी हुई गांड देख के मुझे और और जोश आने लगा था. उसकी गांड एल दम कोरी थी. शायद कभी किसी ने मारने के लिए ज़ोर नहीं किया था या वहां गांव में गांड मारने का कल्चर ही न रहा हो.

फिर मैंने उसकी गांड पर लंड सेट किया और ज़ोर का धक्का लगा कर उसकी गांड में पेल दिया. अभी आधा ही लंड अंदर घुस पाया था कि उसे तेज दर्द हुआ और वो ज़ोर से ‘छोड़ दो… छोड़ दो… दर्द हो रहा है’ करके चिल्लाने लगी. लेकिन मुझे तो उसकी गांड का सुख भोगना था इसलिए मैंने उससे कहा – शांत रहना निकलता हूं.

फिर वो थोड़ी शांत हुई तो मैंने फिर से एक धक्का लगा कर पूरा का पूरा लंड अंदर पेल दिया. अब वो फिर से चिल्लाने लगी लेकिन इस बार मैंने बिना रुके धक्के लगाना जारी रखा. करीब 5 मिनट तक लगातार धक्के लगाने के बाद मैं उसकी गांड में ही झड़ गया.

अब मैं एक बाद मज़ा ले चुका था. फिर मैंने लंड निकाला और उसे छोड़ा तो वो जमींन पर गिर पड़ी. उसकी हालत खराब थी. फिर मैंने उसे पानी पिलाया. जब उसे कुछ आराम हुआ तो उसने मुझे बताया कि शादी के बाद उसने पहली बार किसी दूसरे मर्द के साथ चुदाई की है. और वह भी इसलिए ताकि उसके पति को नौकरी मिल सके.

यह सुन कर मैंने उसके पति को नौकरी देने का वादा किया. वो पैसे के लिए कुछ भी करने को तैयार थी. फिर उसने कपड़े पहने और जाने लगी तभी मुझे एक और काम याद आया. मैने उससे कहा कि मेरे रहने की व्यवस्था कहीं हो जाए तो देख लेना और चाहो तो तुम भी वहां काम कर सकती हो.

दोस्तों, उसके पति को पहले एक जगह नौकरी मिली थी लेकिन हमारी कंपनी बड़ी कंपनी थी और पैसा अच्छा देती थी. इसी के कारण विद्या उसे यहां नौकरी करवाना चाहती थी और इसी लालच के कारण वह मेरे पास आई और मुझसे चुद कर मेरी रखैल बन गई.

खैर फिर मैंने विद्या के पति को नौकरी दे दी. उसने मेरे रहने के लिए भी इंतजाम कर दिया था. जहां वह दिन भर काम करती और जब मैं पहुंचता तो जम कर उसकी चुदाई करता था. दोस्तों, उसके मैंने उसके साथ बहुत ऐय्याशी की. अपनी अगली कहानी में मैं बताऊंगा कि कैसे मैंने विद्या को उसके पति के सामने 4 लोगों के साथ चोदा और किस तरह उसने अपनी बहन को भी मुझसे चुदवाया.

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