पति से दुखी भाभी को छेड़छाड़ से बचाया, फिर होटल में चोदा

मेरे पड़ोस में एक भाभी रहती थीं. एक बार मैं मार्केट में घूम रहा था तो मैंने देखा कि कुछ लड़के भाभी को टीज कर रहे हैं. यह देख मैंने भाभी को उनके घर तक छोड़ा और हमारी दोस्ती की शुरुआत हो गई. फिर बात किस तरह चुदाई तक पहुंची ये आपको इस कहानी में जानने को मिलेगा…

हेलो दोस्तों, मेरा नाम जतिन है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूं. ये कहानी मेरी और मेरे पड़ोस में रहने वाली भाभी की है. वो काफी खूबसूरत हैं और उनका फिगर भी एक दम मस्त है. कुल मिला कर वो एक दम आयशा टाकिया जैसी लगती हैं.

कहानी शुरू करने से पहले मैं आप लोगों को अपने बारे में भी कुछ बता देता हूं. मेरी लम्बाई 5 फुट 6 इंच और रंग गेहुंआ है. दोस्तों, मेरी बॉडी एथेलेटिक है, इस वजह से लड़कियां मुझसे जल्दी फंस जाती हैं. मेरा लंड 6.5 इंच लम्बा और 2 इंच मोटा है, जिससे मैं किसी को भी संतुष्ट कर सकता हूं.

अब मैं अपनी कहानी पर आता हूं. बात पिछले साल दिसम्बर की है. तरीख थी 20. मैं अपने दोस्तों के साथ मेरी अपाचे बाइक लेकर मार्केट में घूम रहा था. तभी मुझे सामने से आती राधिका भाभी दिखीं. उन्हें कुछ लोकल बन्दे टीज कर रहे थे. यह देख मुझसे रहा न गया और मैंने अपने दोस्तों के साथ मिल कर उन्हें भगा दिया. फिर भाभी को बाइक पर बिठा कर उनके घर तक पहुंचाया. यहीं से हमारी दोस्ती शुरू हुई.

घर पर उनकी सास – ससुर और उनका 3 साल का बेटा ही रहते हैं. फिर धीरे – धीरे हमारे बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं और मेरा उनके यहां आना – जाना शुरू हो गया. अब हम साथ बैठ कर ढेर सारी बातें करते और उन्हें जब भी मार्केट जाना होता तो मेटे साथ ही जाती थीं. फिर उन्होंने मुझे अपना मोबाइल नम्बर भी दे दिया और हम फोन पर भी बात करने लगे.

फिर एक दिन जब मैं उनके घर गया तो देखा कि उनके हसबैंड आए हुए थे. वो आर्मी में ऑफिसर थे. चूंकि मैं उनका पड़ोसी था तो मुझे देख कर उन्हें कोई दिक्कत नहीं हुई. फिर मैं वापस आ गया.

कुछ दिन ऐसे ही बीत गए. एक दिन फिर जब मैं उनके घर गया तो देखा कि भाभी रो रही थीं और उनके जिस्म पर चोट के निशान थे. मैंने उनसे उन निशानों के बारे में पूछा तो वो कुछ नहीं बोलीं, बसरे गले लग कर रोने लगीं. फिर मैंने भी उनकी पीठ पर हाथ रख दिया और सहलाते हुए चुप कराने लगा.

कुछ देर में वह शांत हो गईं. शांत होने के बाद बोलीं कि तुम्हारे भैया मुझे प्यार और खुशी नहीं दे सकते, जब मैं उन्हें कहती हूं तो मुझे मारते हैं, फिर शराब पीकर सो जाते हैं और मैं तड़पती रहती हूं.

उनकी बात सुन कर मैंने भाभी के चेहरे को हाथ से पकड़ कर अपनी तरफ किया और होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें स्मूच करने लगा. उन्होंने भी मेरा कोई विरोध नहीं किया. काफी लम्बा स्मूच चला. तभी भाभी के पैरेंट्स आ गए और हम रिलैक्स होकर बैठ गए. फिर थोड़ी देर बाद मैं वहां से चला गया.

इसके कुछ दिन बाद भाभी अपने मायके चली गईं. उनका मायका दिल्ली के झंडेवालान इलाके में था. वहां जाकर भाभी ने मुझे फ़ोन किया और बताया कि मैं अपने मायके आ गई हूं. हालांकि उस दिन और उन्होंने कुछ नहीं कहा.

फिर हम रोज फोन पर बात करने लगे. अब हमारी बातें रात – रात भर चलने लगी थीं. फिर एक दिन हमने मिलने का प्लान बनाया. क्योंकि तड़प तो दोनों ही रहे थे.

भाभी के हां कहने के बाद मैंने 2 जनवरी को पीतमपुरा इलाके के एक होटल में रूम बुक किया और भाभी को उसका एड्रेस रूम नम्बर सहित बता दिया. वो घर पर अपनी सहेली की शादी का बहाना बना कर होटल पहुंच गईं.

उस दिन उन्होंने गुलाबी पटियाला सूट पहना था, जिसमें वो बहुत मस्त लग रही थीं. मैं तो उन्हें देखता ही रह गया. फिर हमने अंदर से दरवाजा बंद किया और एक – दूसरे को बाहों में लेकर ऐसे चूमने लगे जैसे कि बरसों बाद मिले हों.

थोड़ी देर बाद फिर मैंने भाभी के कपड़े उतारे और उनकी बॉडी को प्यार से चूमने – चाटने लगा. दोस्तों, मेरी एक आदत बहुत खराब है वो ये कि मैं चूत बहुत चूसता हूं और उसका पानी पी जाता हूं. चूत के पानी से मुझे एनर्जी मिलती है.

चूत चाटने से भाभी बिल्कुल गर्म हो गईं और मेरा सिर अपनी दोनों टांगों के बीच दबा लिया. इसके बाद थोड़ी ही देर में वह पानी छोड़ कर निढाल हो गई. मैं उसका सारा पानी चाट गया.

इसके बाद मैंने फिर से भाभी की चूचियों को चूस कर उन्हें गर्म किया और खुद नंगा हो गया. मेरा लम्बा लंड देख कर उनके चेहरे पर चमक आ गई. फिर उन्होंने झट से उसे अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

फिर थोड़ी देर बाद मैंने भाभी के पैर फैलाए और लंड को उनकी चूत पर सेट करके हल्का सा एक धक्का मारा. मेरा आधा लंड उनकी चूत में घुस गया. भाभी मेरा शॉट झेल नहीं पाईं और उनकी आंखों से आंसू निकलने लगे. यह देख मैंने भाभी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और एक जोरदार शॉट मारते हुए पूरा लंड उनकी चूत में घुसा दिया. मेरा लम्बा लंड सीधा जाकर उनकी बच्चेदानी से टकराया. अब मैंने उनकी चूचियों को चूसते हुए धकापेल चुदाई शुरू कर दी. बहुत मज़ा आ रहा था.

अब भाभी भी उछल – उछल के लंड अंदर ले रही थीं. दूसरी तरफ मैं चुदाई के साथ – साथ उनके होंठों का रसपान कर रहा था और चूचियों को भी दबा रहा था. फिर थोड़ी देर बाद भाभी ने अपना पानी छोड़ दिया. लेकिन मेरा नहीं हुआ था. मैं लगातार धक्के लगाता रहा. करीब 20 मिनट की चुदाई के बाद मैंने अपना पानी भाभी की चूत में छोड़ दिया. इस दौरान वो चार बार झड़ चुकी थीं.

इसके बाद फिर हम दोनों नंगे ही एक – दूसरे से चिपक कर सो गए. जब नीद खुली तो हमने एक बार और चुदाई की. भाभी मेरी चुदाई से पूरी संतुष्ट थीं और खुशी उनके चेहरे से साफ झलक रही थी. अब हमारे वहां से निकलने का वक्त हो गया था. हमने कपड़े पहने और निकल लिए. जाते टाइम भाभी की आंखों में आंसू आ गए. तब मैंने उन्हें फिर से गले लगाया और हमेशा ऐसे ही प्यार करने का वादा किया.

दोस्तों, ये थी मेरी और भाभी की प्यार भारी चुदाई की कहानी. आप लोगों को कैसी लगी? मुझे मेल करके जरूर बताएं. मेरी मेल आईडी – [email protected]

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