रात को पहली बार

उम्र की एक खास दहलीज पे पहुँचने के बाद जवान बदन में सेक्स की दहक खुद ही प्रज्वलित हो जाती है. उसे खुद को धधकने के लिए सिर्फ एक मौका चाहिए होता है. ऐसा ही मौका मुझे मिला जिसने पहली बार मुझे एक शानदार चुदाई का स्वाद दिलाया…

हेलो दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं एक साधारण दिखने वाला लड़का हूँ। मेरी ऊचाई 5.5 फीट और रंग साँवला है। मेरी पढ़ाई ख़त्म होचुकी है और अभी मैं एक अच्छी नौकरी कर कर रहा हूँ। आज मैं अपने जीवन की एक सच्ची कहानी आपके साथ शेयर करने वाला हूँ.

बात तब की है जब मैं कॉलेज की छुट्टियों में गाँव गया था। मेरा गाँव रत्नागिरि, महाराष्ट्र मैं है और बहुत ही सुंदर है। मेरे गाँव मे छुट्टियों में मेरे सारे भाई- बहन आते थे और हम बहुत ही मजे करते थे। नए नए खेल खेलते थे। घूमने जाते थे। उस साल हमारे गाँव में एक और नया बना था तो उस मौक़े पर एक फंक्शन रखा गया था। उस फंक्शन में बहुत सारे मेहमान आये थे. उसकी फंक्शन में हमारे एक दूर की रिश्तेदारजो रिश्ते में बहन ही लगती थी आई थी.उसका नाम था तेजस्विनी. उसे हम सब प्यार से तेजू बुलाते हैं। वो दिखने मैं साँवली ही थी पर शरीर से भरी हुई थी। उसका कद 5 फुट था और उसके मम्मे काफी गोल-मटोल थे।

जब फंक्शन ख़त्म हुआ तो हम सारे भाई- बहन बैठकर गप्पें लड़ा रहे थे. मेरी एक बुआ की लड़की ‘छोटी’ जो 3 साल की थी, वो  मेरे साथ ही खेलती रहती थी. मेरे साथ ही खाना खाती थी। तो हम सब लोग उसके साथ खेल रहे थे और मैने उसे गोद में उठाया हुआ था.

फिर तेजू बोली – उसे मेरे पास दे दो ।

मै छोटी को उसके हाथ मैं दे रहा था, तभी मेरा हाथ गलती से उसके मम्मे को लग गया. ये बात उसे भी पता चली पर उसपर उसने इतना ध्यान नही दिया और वो छोटी के साथ खेलने लगी। मेरे मन मे थोड़ी सी हलचल हुई पर मैंने खुद को संभाल लिया और उसके साथ खेलने लगा। उसके बाद हमारा खाना हुआ और सब सोने की तैयारी करने लगे।

हमारे घर में एक बहुत बड़ा कमरा था तो हम सब भाई-बहन एक ही कमरे में सोने की जिद करने लगे, जिसे बड़ों ने मान लिया. तेजू ने भी हमारे कमरे में सोने की इच्छा जताई तो छोटी बोली – हाँ दीदी! तुम हमारे साथ सोने आ जाओ और मेरे बाजू में सोना और मूसे कहानी सुनाना। ठीक!

उसकी ये बात सुनकर सब लोग हँसने लगे और हम सब कमरे मे चले गए।
सब बच्चे जिद करने लगे कि “दीदी कहानी सुनाओ ना” तो मैंने सबको बोला कि दीदी थक गई है उसको सोने दो. लेकिन तेजू बोली- मैं कहानी सुनाती हूँ! सबका बहुत मन है, नहीं तो सब नाराज हो जाएंगे.

फिर वो कहानी सुनाने लगी. सब कहानी सुनने में व्यस्त हो गए। कहानी सुनते- सुनते सबको नींद आने लगी तो मैने एक लाइन में गद्दे बिछाके सबको सोने को बोला. तेजू बोली – मैं कोने में छोटी के साथ सोना पसंद करुँगी.

मैने बोला – ठीक है!

वो एक कोने में लेट गयी. उसके बाजू में छोटी और छोटी के बाजू में सब बच्चा पार्टी. मैं दूसरे कोने मे मैं सोने चला गया। लेकिन लाईट बंद करते ही कमरे मे पूरा अंधेरा हो गया तो छोटी डर गई और मुझे आवाज देके बोली- भैया मेरे बाजू में आ जाओ! मूजे डर लग रहा है।

मैं उसके बाजू में चला गया। तेजू भी अभी सोयी नहीं थी। तो अब मेरे और तेजू के बीच में छोटी सोयी हुयी थी. मैं छोटी के पीठ पे थपकी देकर उसको सुला रहा था. वो जल्दी ही सो गई।

मैंने तेजू से कहा- मुझे नींद नहीं आ रही है.

फिर हम दोनों धीमी आवाज में बातें करने लगे. मेरा हाथ छोटी के पीठ पर ही था. तभी तेजू ने करवट बदल लिया. उसके स्तन मेरे हाथ से सट गए। मेरे मन मे फिर से हलचल होने लगी. इस बार मेरे हाथ को उसके नरम स्तन का मीठा स्पर्श होने लगा। मैंने धीरे से मेरी उंगली उसके निप्पल पर घुमाई तो वो थोडा सा पीछे हो गई. मैं भी थोड़ा डर गया।

थोड़ी देर बाद उसने उसका हाथ छोटी के पीठ पे रखा तो मेरे हाथ को उसके हाथ का स्पर्श हुआ. फिर धीरे से मैं ने एक उंगली उसके उंगली के ऊपर रख दी. उसका कुछ विरोध नही आया. मेरी हिम्मत थोड़ी और बढ़ गई. अब मैने मेरा पूरा हाथ उसके हाथ के ऊपर रख दिया। इस बार उसने हाथ नही हटाया तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मैंने उसके हाथ को धीमे से सहलाया. उसने इसका भी विरोध नही किया बल्कि वो भी मेरा हाथ सहलाने लगी।

मेरे मन मे तो लड्ड़ू फूट गया गया, साथ ही मेरे सब्र का बांध भी टूट गया। फिर हमने एक दूसरे का हाथ पकड़ लिया. उसका हाथ गरम हो गया था. मैने मेरा हाथ छोटी के ऊपर से तेजू के पेट पर रख दिया और उसके पेट को सहलाने लगा. वो भी थोड़ा मेरे बाजू होकर मेरा साथ देने लगी. मेरी हिम्मत और बढ़ गई. मैंने मेरा हाथ थोड़ा ऊपर ले जाके उसके स्तन के ऊपर रखा।

अंधेरे में सिर्फ स्पर्श महसूस हो रहा था। फिर मैं उसके मम्मे धीरे- धीरे दबाने लगा. तेजू के सिसकियाँ निकलने लगी थीं। मुझे भी मजा आने लगा था। उसने सलवार कमीज पहनी थी। तो मैं उसके अंदर से हाथ डालके उसके पेट को सहलाने लगा. फिर हाथ थोड़ा ऊपर ले जाके ब्रा के अंदर से निप्पल के ऊपर उंगली घुमाने लगा। वो और उत्तेजित हो गई। फिर वो मेरा हाथ अपने पीठ के पास लेके गई और ज़िप खोलने का इशारा किया। मैंने ज़िप खोलके ब्रा का हुक खोल दिया और पीठ सहलाने लगा। वो और उत्तेजित हो रही थी।

फिर मैंने मेरा हाथ उसके होठों पे पर रख के किस का इशारा किया। वो धीरे से बोली – छोटी को थोडा सा और किनारे करो और तुम इधर आ जाओ.

मैंने भी वैसे ही किया और उसके बाजू मैं सो गया। मेरे बाजू में आते ही वो थोडासा शरमा गई और करवट बदल दी. तो मैंने उसके पीठ पे मेरे होंठ रखकर किस करने लगा। फिर धीरे से उसके बदन को पकड़ कर अपनी तरफ घुमा दिया। उसकी गरम सासों का मुझे एहसास होने लगा। फिर हमने एक दूसरे के होंठ नजजीक लाके एक दूसरे को किस करना शुरू किया। हमारे किस की आवाज पूरे कमरे में घूम रही थी। क्योंकि हमारा पहली ही बार था। बहुत देर तक किस करने के बाद मैं उसके पूरे गले पे किस करने लगा। तेजू पूरी मदहोश होने लगी।

मैने उसकी कमीज को ऊपर करके पेट पे किस किया. किस करते- करते ऊपर आके ब्रा के ऊपर से स्तन को किस किया। ब्रा का हुक तो निकाला हुआ था तो मैंने उसको निकालकर बाजू मे रख दिया और निप्पल की चूसने लगा। अब वो तड़प रही थी। एक हाथ से मैं मम्मे दबा रहा था और दूसरे मम्मे को होठों से चूस रहा था। हमे डर था कि कोई कमरे में उठे ना और बाजू में छोटी भी थी उसको धक्का ना लगे।

अब मैने उसके ऊपर के सारे कपड़े उतार दिए. उसने भी मेरा टी शर्ट उतार दिया। फिर हम एक दूसरे से इतना जोर से चिपक गए कि उस वक़्त हमारे बीच से हवा भी नहीं गुजर सकती थी. ऐसा लग रहा था की हम दोनो कई सालो से भूखे हों, सेक्स के लिए।

फिर मेरा हाथ उसकी जांघों पर गया। मैं उनको सहलाते सहलाते उसकी बुर तक गया और सलवार के ऊपर से ही हल्का सा बुर को सहलाया। उसकी तो सिसकिया निकल गई। फिर मैंने उसकी सलवार को उतार दिया और पैंटी में हाथ डालकर बुर को सहलाने लगा। उतने में ही उसने पानी छोड़ दिया। मेरा हाथ पूरा गिला हो गया। अब वो धीरे धीरे रिलैक्स हो रही थी। पर मैने उसको चूमना जारी रखा.

उसने मेरे पैन्ट में हाथ डालकर मेरा लंड पकड लिया और चौंकते हुए बोली- इतना बड़ा होता है, ये तो  मुझे तो पता ही नही था।

मैं बोला- हाँ रानी! और इसे तुम्हारे अन्दर भी डालना होता है.

वो डर गई और बोली- मेरी बुर तो कितनी छोटी है, कैसे जाएगा?

मैं बोला- तू बस मजे ले! बाकी मैं देख लूंगा.

मैंने उसे किस करना चालू कर दिया। वो फिर उत्तेजित हो गई। तो मैने बोला- क्या तुम इसको मुँह में लोगी?

उसने बोला- नहीं! बाद मे कभी. अभी नहीं।

फिर हम दोनों एक दूसरे की चूमने लग गए। मैंने उसकी पैंटी उतार दी। अब तो वो शरमाने लगी। मैं बोला- अंधेरे मे क्या शर्माना?

तो उसने बुर से हाथ हटा दिया। अब मेरा लंड उसके बुर को चिपकने लगा था.

मैंने उसी अवस्था में लंड को उसकी बुर पे दबाव बनाते हुए पेलना चाह. पर अंदर नही जा रहा था। मैंने बहुत कोशीश की पर जा नही रह था। तो मैं उसको ऊपर लेट गया और पैर ऊपर करके जोर का धक्का मारा. उसको बहुत दर्द हुआ पर उसने समझदारी दिखाते हुए अपना मुँह बन्द रखा। मैंने अंदर- बाहर करना चालू किया। थोड़ी देर बाद उसने भी साथ देना चालू किया। हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था. अब तेजू जोर-जोर से सिसकिया लेने लगी और गांड उठा उठा कर साथ देने लगी।

फिर मैं उसके ऊपर से हटा और एक बाजू से उसका पाँव ऊपर लेके चोदने लगा। अब हम ऊपर से किस कर रहे थे और नीचे से चुदाई। इतने मे ही उसने मुझे जोर से पकड़ा. उसके नाखून मेरे पीठ पर लग गए. वो झड़ रही थी। मैं भी झड़ने वाला था। मैंने भी उसे कस के पकड़ कर जोर से धक्के मारने चालू किये और अंदर ही झड गया।

हम दोनो ने चरम सीमा पार कर ली थी। फिर मैंने खुद ही उसको उसके सब कपड़े पहनाये और अपने भी सब कपड़े पहने। मैं छोटी के इस बाजू आया और हम एक दूसरे के हाथ पकड़ कर सो गए.

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