रोमांस की चाह और एक गैर मर्द

जब दो विपरीत लिंगी रोमांस के आकर्षण की वजह से एक स्थायी रिश्ते में बंध जाते हैं और फिर जिम्मेदारियों की वजह दोनों विपरीत दिशा में सोचना शुरू कर देते हैं तो फिर ऐसी रिक्तता एक तीसरे व्यक्ति के लिए संभावना उत्पन्न कर देती है. एक युगल की प्राथमिकताएं विलग होने पे उनके मार्ग भी अलग दिशा में मुड़ जाते हैं. एक ऐसे ही प्रेमी युगल की कहानी……….

कड़ाके की ठण्ड अब धीरे धीरे गुलाबी ठण्ड में परिवर्तित होकर वर्ष के सबसे सुहावने माह की ओर बढ़ रहा है. लेकिन प्रेम विवाह कर सात जन्मों तक साथ निभाने की कसमे खाने वाला जोड़ा एक ही बिस्तर पे अलग अलग सो रहा था. या यूँ कहें की सोने का असफल प्रयत्न मात्र कर रहा था.

अल्पना और वैभव ने अपने परिवार वालों की मर्जी के खिलाफ जाकर प्रेम विवाह किया था. शादी के बाद एक दो साल तो दोनों ने प्रेम की खूब पींगें पढ़ी. अल्पना की गोद में एक प्यारा सा बच्चा आने के बाद तो दोनों के परिवार ने भी उन्हें उनके बच्चे के साथ अपना लिया था. लेकिन जीवन भी एक मौसम की तरह है. इसमें भी उसी तरह उतार-चढाव, नर्म-गर्म आते रहते हैं. फ़िलहाल इस बसंत के मौसम में भी इन दोनों के रिश्तों में पतझड़ की शुरुवात हो चुकी थी.

अल्पना को अब वैभव में वो पहले सी रूमानियत नहीं नजर आती थी. घर गृहस्थी और ऑफिस के बीच सामंजस्य बिठाते-बिठाते पहले का रोमांटिक और हर वक़्त चंचल रहने वाला वैभव जिम्मेदारियों के बोझ तले दब कर एक धीर गंभीर युवक में परिवर्तित हो गया था. फिल्मों की शौक़ीन और आसमान की उड़ान की चाह रखने वाली अल्पना अभी भी अपनी रोमांटिक फंतासी वाली दुनिया में जी रही थी. वो चाहती थी की अब भी ऑफिस से आने के बाद वैभव उसे खींच कर बिस्तर में ले जाय. बाथरूम में निर्वस्त्र होकर उसके साथ घंटो  शावर का मजा ले. लेकिन अब तो ये सिर्फ अल्पना की कल्पना तक ही सीमित था.

अल्पना और वैभव का बच्चा सुयश अब 5 वर्ष का हो चुका था. स्कूल भी जाने लगा था. सुयश बड़ा प्यारा बच्चा है. डांस करने का उसे बड़ा शौक है. शौक तो अल्पना को भी है लेकिन वो कभी सीख नहीं पाई. पर सुयश को वो बाकायदा डांस का प्रशिक्षण दिलवाना चाहती थी. लेकिन वो चाहती थी की कोई उसके घर पे आकर सुयश को डांस सिखाये.

एक दिन अल्पना ने पेपर में एक एड देखा जिसमे घर जाकर डांस सिखाने वाले का नंबर दिया था. अल्पना ने फ़ोन मिला दिया. उधर से एक मेल की आवाज आई…. उसका नाम अनुज था. अनुज डांस सिखाने के लिए राजी हो गया. और रोज आकर सुयश को प्रैक्टिस करने लगा. सुयश भी अनुज से काफी घुल मिल गया. अनुज एक जिंदादिल मिजाज का हंसमुख नौजवान था. जब भी वो घर में आता, घर में एक अजीब सी ख़ुशी का माहौल बन जाता.

अल्पना भी सुयश का डांस देखकर खुश होती और अनुज से बातें कर के भी. धीरे धीरे अनुज ने कल्पना के दिल में भी घर बना लिया. अब सुयश के साथ साथ वो अल्पना को भी डांस सीखाने लगा. डांस सीखते वक़्त जब अनुज के शरीर का स्पर्श अल्पना के उरोजों या कमर के हिस्से से होता तो अल्पना के बदन में एक अजीब सी सिहरन हो उठती.

एक बार जब अनुज डांस सीखने के लिए घर पे आया तो पता चला आज सुबह ही  सुयश अपने नाना नानी के घर उनके साथ गया हुआ था और वैभव भी ऑफिस में था तो अनुज वापिस जाने लगा. लेकिन अल्पना के रिक्वेस्ट पे वो रुक गया और वहीँ बैठ कर अपने आदत के अनुरूप हंसी मजाक करने लगा. बातों बातों में कल्पना से उसकी गर्ल फ्रेंड के बारे में पूछा. जाने क्यों अनुज का नकारात्मक जवाब सुनकर उसे एक अजीब सी ख़ुशी हुयी.

अल्पना चाय लेकर आई और इस बार अनुज के करीब ही बैठ गयी. अल्पना ने उस वक़्त टाइट लैग्गिंग और टी शर्ट पहनी हुयी थी. अचानक अनुज की चाय उसके कपड़ो पे ही गिर गयी और हडबडाहट में उसका हाथ से कप छूट कर अल्पना की दोनों जांघों के बीच गिर गया. अल्पना जलन से छटपटाने लगी. उधर अनुज का भी सीना जल रहा था. दोनों एक साथ बाथरूम की ओर भागे. बाथरूम में जाकर जब अल्पना को कुछ न सूझा तो उसने शावर ऑन कर दिया.

अनुज के सीने को तो तुरंत से राहत मिल गयी. लेकिन अल्पना को भीगे कपड़ों में देखकर एक दूसरी ही ज्वाला उसके मन में प्रज्वलित होने लगी. अल्पना ने टी शर्ट के अन्दर कुछ नही पहना था भीगे टी शर्ट उसकी चूचियों से चिपक गयी थी. और उसके निप्पल का उभार साफ समझ में आ रहा था. अल्पना ने अनुज की आखों में वासना के डोरे तैरते हुए अनुभव किया.

अनुज ने धीरे से अल्पना से पूछा- क्या आप की जलन शांत हो गयी?

अल्पना ने अपनी चूत सहलाते हुए ‘ना’  में सर हिलाया. फिर यही सवाल जब अल्पना ने अनुज से पूछा तो अनुज ने कहा – सीने की जलन अब अन्दर दिल तक पहुच रही है. क्या तुम्हारे पास इसका कोई इलाज है?

अब अल्पना ने आगे बढ़कर अनुज के सीने पे अपने होठों से चुम्बन करते हुए बोली

“क्या अब जलन शांत हुयी?

अनुज ने कहा – हाँ !! पर थोड़ी.

अल्पना ने फिर से चुम्बन किया लेकिन इस बार सीने से थोडा ऊपर गर्दन पर. फिर वही सवाल दोहराया. अनुज की हर हाँ पे वो एक और चुम्बन करती. दोनों के शरीर की गर्मी बढती जा रही थी. अब अल्पना अनुज के होठों को चूम रही थी. फिर अनुज ने खुद को अलग करते हुए अल्पना की जलन के बारे में पुछा और घुटनों के बल बैठकर लैग्गिंग के ऊपर से ही अल्पना की चूत पे किस किया. अल्पना की सिसकारी निकल गयी.

शावर का पानी अनवरत चालू था. इधर अल्पना की चूत से भी रस निकल रहा था. उसने खुद से अपनी लैग्गिंग नीचे सरका दी. धीरे धीरे दोनों ने ने अपने सारे कपडे उतर दिए. अब अनुज ने अल्पना के शरीर के जर्रे जर्रे को चूमना शुरू किया. फिर दोनों 69 की अवस्था में आकर एक दुसरे के यौनांगों से खेलने लगे. अनुज अल्पना के चूत के होठों को अपने होठों से चूस रहा था.

फिर वो अल्पना की चूत को अपनी जीभ से ही चोदने लगा. अल्पना भी अब अनुज का लंड अपने मुह में लेकर उसकी चुसाई बड़ी तन्मयता से कर रही थी. 10 मिनट के बाद अनुज ने पोजीशन बदलते हुए अल्पना की टांगों को चौड़ा किया और उसकी चूत में अपना लंड घुसाने लगा लेकिन बार बार उसका लंड  फिसल जाता. अल्पना ने हंसकर उसे अनाड़ी कहा और उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत का रास्ता दिखाया.

खुद को चुदक्कड़ साबित करने के लिए अनुज बहुत तेजी से धक्के लगाने लगा.

तब अल्पना ने उसे कहा -आराम से करो! पूरा मजा लो!

तब अनुज ने धक्कों की स्पीड कम करते हुए हौले हौले अपना लंड अप्लना के गुलाबी सुराख़ में आगे पीछे करना शुरू किया. अब अल्पना की चुदास अपनी पराकाष्ठा पे पहुँच गयी. उसने तुरंत अनुज को नीचे लिटाया और उसके लंड की सवारी करने लगी. १० मिनट की चुदाई के बाद उसका पानी छूटने लगा वो अनुज को अपने नाखूनों से काटने लगी. अनुज ने भी ठीक उसी वक़्त अपना वीर्य अल्पना की चूत में ही छोड़ दिया. इसके बाद दोनों ने वहीँ नहाया और अपने शरीर को तौलिये से पोछते हुए बाहर आ गए.

अब अल्पना ने अनुज को वैभव के कपडे पहनने को दिए और खुद भी कपडे बदल कर अनुज को रवाना कर दिया…..लेकिन सिर्फ आज के लिए…..अब तो दोनों को जब भी मौका मिलता एक हो लेते…..

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