रूपा का रूप और सेक्स का पुजारी- भाग१

तब तक वो खुद ही मेरा हाथ अपनी चूत के पास उसके दाने के पर रगङ ने लगी थी। तो मैने भी अपनी एक उगली उसकी चूत के छेद के अन्दर कर दी तो वो सिसक पङी। उसने एक हाथ से मेरे पायजामे के अंदर कड़क हो चुके लंड को पकड़ लिया. अब मै उसकी चूत में ऊँगली करते हुए उसकी चूत को चोदे जा रहा था और वो मेरे लंड को पकड़ कर मुठ मार रही थी……

नमस्कार मैं पुजारी, मंदिर वाला नहीं सेक्स का. आज मैं आप सबको अपनी सच्ची कहानी बताने वाला हूँ। मैं जब 12वीं में पढता था ये कहानी तब की है।

मैं लखनऊ में रहता हूँ। जहाँ गर्मीयों की छुट्टी में मेरी मौसी की लडकी(रूपा) और उसका भाई (रुपेश) आये। रूपा को मै तकरीबन 5 साल बाद देख रहा था. 18 साल की उस हूर और कोहीनूर के मिक्सचर को तो मैं देखता ही रह गया. क्या गजब लग रही थी वो? उसकी फिगर  36-28-38 की होगी।

जब वो आयी तो तकरीबन 5-6 घंटे बाद रुपा का भाई, रूपा और मेरी माँ सभी बाहर घूमने गये.
मैं घर के दूसरे कमरे, वो गेस्ट रूम जिसमे रूपा और रुपेश का सामान रखा हुआ था, गया. मैंने देखा गया कि वहाँ रुपा के कुछ कपङे रखे हुये थे। उन कपड़ो के साथ ही मुछे रुपा की ब्रा और पेंटी भी पड़ी मिली। मैने उसकी पिंक कलर वाली पैंटी उठायी और उसकी चूत वाली जगह सूंघने लगा. क्या मस्त महक थी, उस एक धागे वाली पेंटी की? मैं एक दम से सारे काम भूल गया और उस पेंटी को अपने लंड पर रगङने लगा.

उस समय ऐसा लग रहा था मानो मै पैंटी पे नहीं रूपा की चूत पे अपना लंड रगड़ रहा हूँ. घिसते-घिसते लंड ने अपनी पिचकारी छोड़ दी और मैंने अपना सारा माल उसी पैंटी पे गिरा दिया. फिर वापस मैंने वो पैंटी  उन्ही कपङो में रख दी।

अब तो मुझ पर रुपा को चोदने का भूत सा सवार होने लगा. कुछ देर के बाद सारे लोग वापस घर आ गये। मैने सोचा के कोशिश की जाये ताकी रूपा को चोद सकूं। क्योकि मै बचपन से ही एक हरामी लङका था और ब्लू फिल्म देखते- देखते मैं सेक्स की सभी चीजो में माहिर हो ही गया था।

शाम को जब सब लोग एक साथ बैठ कर खाना खा रहे थे तो रूपा मेरी तरफ अजीब सी नजरों से देख रही थी. मैंने अपनी नजरें नीची कर ली. सच बताऊं तो मै डर गया था. खाना खाने के बाद जब मै उपर अपने कमरे में गया तो देखा वही पैंटी मेरे कमरे में पड़ी हुयी है. मेरी तो गांड फट गयी. मैं समझ गया की रूपा ने मेरी हरकत भाँप ली है.

गर्मी के कारण उस दिन हम सभी छत पर सोने के लिए गये। छत पर भी हम लोग टेबुल फैन लगा के सोते थे. मैं पखें के एक दम पास ही सोता था, और चूँकि रूपा पहली बार घर आयी थी तो माँ ने उसे भी पखें के पास सोने के लिए भेज दिया। अब आलम यह था कि पहले मैं, फिर रूपा बीच में पानी की ग्लास रखा टेबल, फिर  उसका भाई रुपेश और फिर माँ और पापा लेटे हुयें थे।

रात में अचानक से मेरी आँख खुली तो मेरा और रूपा का सर बहुत ही पास था। मेरे मन में गन्दे- गन्दे ख्याल आने लगे. मुझसे रहा नही गया और उसको गहरी नींद मे देखकर मैने अपना एक हाथ रूपा की चूचिंयो पर रख दिया और जब रूपा की तरफ कोई हलचल नही दिखी तो मै उसकी चूचिंयो को धीरे सहलाने लगा.

लेकिन कुछ देर बाद माँ पानी पीने को उठी. उन्हें मेरा हाथ रुपा की चूचिंयो पर दिख गया और मै भी ये जान गया था तो मैने हाथ को हरकत न देते हुये सोने का नाटक करते हुए यूँ ही पड़ा रहा. माँ ने मेरा हाथ रूपा के उपर से हटा दिया तो फिर मैं सोने लगा और कुछ देर बाद फिर से मेरी नींद खुली तो रूपा का एक हाथ इस बार मेरे उपर था. मै उसके और पास खिसक गया और अपना हाथ फिर से रूपा की चूचिंयो पर रख दिया और धीरे से दबाने भी लगा फिर कुछ देर बाद चूचिंया दबाने के बाद मै अपना हाथ नीचे की तरफ सरकाने लगा।

धीरे-धीरे उसकी सलवार तक मेरा हाथ पहुँच गया तो मैं बिना हिले डुले उसकी सलवार का नाङा खोलने लगा पर डर भी बहुत लग रहा था. क्योकि उसका भाई मेरी माँ और पापा बगल मे ही सोये हुये थे। पर मुझ पर तो चुदायी का भूत सवार था. वैसे भी हमारे यहाँ कहावत है “पहले मजा फिर सजा”।

मैने रूपा की सलवार का नाङा खोल दिया और अपना हाथ आगे बढ़ाने लगा तो किसी ने मेरे हाथ को पकङ लिया. मैने डर की वजह से नीदं मे होने का नाटक करने लगा। वो हाथ रूपा का था लेकिन उसने मेरा हाथ पकङ कर अपनी पैंटी में डाल दिया। ये तो प्यासे को पानी मिलने वाली बात हो गयी।

फिर वो मेरे पास आई और कान मे धीरे से बोलने लगी- बहुत जल्दी मे हो क्या?

मैने उसके कान मे कहा- तुम जैसी लङकी बगल मे लेटी हो तो जल्दी अपने आप हो जाती है।

तब तक वो खुद ही मेरा हाथ अपनी चूत के पास उसके दाने के पर रगङ ने लगी थी। तो मैने भी अपनी एक उगली उसकी चूत के छेद के अन्दर कर दी तो वो सिसक पङी। उसने एक हाथ से मेरे पायजामे के अंदर कड़क हो चुके लंड को पकड़ लिया. अब मै उसकी चूत में ऊँगली करते हुए उसकी चूत को चोदे जा रहा था और वो मेरे लंड को पकड़ कर मुठ मार रही थी.

कुछ देर बाद  उसने पानी छोङ दिया जिससे मेरा पूरा हाथ गीला हो गया और उसी वक़्त मेरे लंड ने भी सारा वीर्य उगल दिया.

मैंने कहा- तुमने मेरा पायजामा गन्दा कर दिया.

उसने कहा- मैंने मेरी पैंटी गन्दा करने का बदला ले लिया.

मैं झेंप गया. तभी वो उठी और बाथरूम मे जा कर मूतने लगी. बाथरूम के दरवाजे के खुलने के शोर से माँ जाग गयी. तब तक सुबह भी होने वाली थी। फिर कुछ ही देर सोने बाद मुझे गर्मी लगी तो मै उठा और देखा धूप निकल आयी थी. मैने मोबाईल पर टाईम देखा तो सुबह के 8:45 हो रहे थे तब मै उठ कर नीचे अपने कमरे मे जाने लगा तभी माँ ने कहा – बहुत सो लिया अब नहा के आ जाओ. चाय बन चुकी है.

तो मै जल्दी से उठा और टॉयलेट में जाकर बैठ गया. मुझे रात की सारी बातें याद आई तो मस्ती चढने लगी. तभी बाथरूम का दरवाजा खुला. दरअसल हमारे यहाँ बाथरूम और टॉयलेट की दीवारें एक ही हैं. रूपा नहाने आई थी. टॉयलेट में जो नल की पाइप लगी थी वहां से एक छिद्र बना हुआ था. मैं उस छेद से झाँक कर रूपा का रूप निहारने लगा. पहले रूपा ने हेयर रिमूवल क्रीम लगाकर अपनी झांटे साफ़ की और नहाने लगी. उसको अपनी चूचियां और चूत मल कर नहाते देख मैं भी मुठ मारने लगा. तब पहली बार मै किसी लङकी को हकीकत मे पूरा नंगा देख रहा था.

खैर कुछ ही देर में मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी. खैर उसी वक़्त मैंने ठान लिया कि लंड की अगली पिचकारी रूपा की चूत में ही छोडूंगा.

मैं अब अपनी अधूरी इच्छा को पूरी करने का इंजार करने लगा।
कहानी जारी रहेगी. अगर कहानी पसंद आ रही हो तो अपने विचार मुझे भेज सकते है.

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