सगी भाभी को चोद उनका पति बना

यह कहानी मेरी और मेरी नई नवेली भाभी की है. भैया का लंड तो मस्त था लेकिनवे थोड़ी ही देर मेम झड़ जाते थे. ऐसे में भाभी संतुष्ट नहीं हो पाती थीं. फिर उनकी वासना उन्हें मेरे पास लाई और मैंने उन्हें जम कर चोदा. मेरी चुदाई से खुश होकर भाभी ने मुझे अपना पति मान लिया…

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार! दोस्तों, मेरा नाम राकेश है और मैं 24 साल का हूँ. ये जो कहानी मैं आप सब को बताने जा रहा हूँ, वह पूरी तरह सच और मेरे साथ घटी घटना है.

मैं इलाहाबाद (प्रयागराज) में रहता हूँ. मेरे पापा एक सरकारी अधिकारी हैं और मां हाउस वाइफ हैं. मेरा एक बड़ा भाई है. जिसका नाम विपिन है. वह दिल्ली में जॉब करता है. पांच महीने पहले उसकी शादी हो गई है. मेरी भाभी का नाम सुमन है और उनकी उम्र 24 साल है. वो बहुत ही सुंदर हैं. भाई ने उनसे लव मैरिज किया था.

भाभी का फिगर 32 26 34 है और वह बेहद खूबसूरत महिला हैं. शादी के बाद वो कुछ समय तक हमारे साथ ही रहीं. घर में रहने के दौरान मैं भाभी से एक दम खुल गया था और हम हर तरह की बात कर लेते थे. कभी – कभी बातों ही बातों में मैं भाभी को टच भी कर लेता था लेकिन वो बुरा नहीं मानती थीं.

जब वो यहां रहती थीं तो मां के साथ ही उनके रूम में सोतीं थीं. मैं पापा के साथ सोता था. फिर भैया ने घर ले लिया और वो दिल्ली शिफ्ट हो गईं. जब भैया उन्हें लेने आये तो भैया – भाभी को मेरा और पापा वाला रूम दे दिया गया. अब मां और पापा एक रूम में सोने लगे. मैं ड्राइंग रूम में शिफ्ट हो गया.

पहले ही दिन शाम को बातों ही बातों में भैया ने बताया कि वो तीन – चार दिनों में भाभी को लेकर दिल्ली चले जाएंगे. रात को सबने खाना खाया और सोने चले गए. मुझे कुछ काम था तो मैं ड्राइंग रूम में बैठ कर उसे पूरा करने लगा.

दोस्तों, भैया और भाभी पूरे 1 महीने बाद मिले थे. ऐसे में उनको चुदाई करनी ही थी और इस बात से मैं भली भांति वाकिफ था. मैं ड्राइंग रूम में बैठा अपना काम कर रहा था. अभी 20 मिनट ही हुए होने कि भैया के कमरे की लाइट जली. उसे देख मैं समझ गया कि अब काम शुरू होने वाला है.

फिर मैं उनके रूम के दरवाजे पर गया और कान लगाकर खड़ा हो गया. अंदर की सारी बातें मुझे सुनाई दे रही थीं. भैया भाभी से पूछ रहे थे कि कुछ हो जाए? भाभी ने भी हां कह दिया. आखिर वो भी इतने दिनों ने प्यासी थीं.

तभी मैंने हल्के से दरवाजा को धकेला तो वो खुल गया. फिर मैंने तुरंत ही बन्द किया और थोड़ा सा खोल कर पूरा सीन देखने का निश्चय किया.

मैं वहीं खड़ा था. कुछ देर बाद लाइट बन्द हो गई और नाईट लैंप ऑन कर दिया गया. फिर मैंने थोड़ा सा दरवाजा खोल कर अंदर देखा तो दंग रह गया. भाभी पहले से ही अपने कपड़े उतार कर बैठी थीं और भैया केवल अंडर वियर और बनियान में थे. तभी भाभी ने भैया से कहा – अब देर न करो जल्दी से चोदो, इतने दिनों से चुदी नहीं हूँ. मेरी चूत प्यासी है.

फिर भैया ने भी अपनी बनियान और अंडर वियर को उतार दिया. इसके बाद वो भाभी की तरफ बढ़े और भाभी चूचियों को पकड़ कर पीने लगे. अब भाभी मस्त होने लगीं और उम्म आह आह की मादक आवाजें निकालने लगीं.

दोस्तों, भैया का लंड बड़ा और मोटा तो था लेकिन फिर दो मिनट बाद ही मम्मों को चूसते हुए उन्होंने पानी छोड़ दिया. इस पर भाभी तड़पते हुए बोलीं – ये क्या हुआ?

दोस्तों, उस वक्त भाभी बहुत चुदासी थीं. उनकी स्थिति देख मैं समझ गया कि किस हालत में हैं वो? अब भैया उनके ऊपर लेट गए और अपने झड़े लंड से उन्हें चोदने लगे. भाभी भी वैसे ही पड़ी रहीं तड़पती रहीं. उन्हें बिल्कुल मज़ा नहीं आ रहा था. यह देख मैं समझ गया कि अब कुछ नहीं होने वाला. फिर मैं अपने बेड पर आ गया.

दूसरे दिन पापा ऑफिस चले गए और मां भैया के साथ किसी काम से मौसी के यहां चली गईं. जाते टाइम भाभी से बोलीं कि तुम और राकेश खाना खा लेना. हम दोनों वहां से खा कर आएंगे. इतना कह के वो दोनों भी चले गए.

थोड़ी देर बाद मैं मम्मी – पापा के कमरे में चला गया और बेड पर लेट गया. लेटने के कुछ देर बाद मुझे हल्की नींद सी आने लगी. तभी भाभी आईं और बोलीं – राकेश चलो नहा लो मैं रोटी बना देती हूँ. तब मैंने कहा पहले आप नहा लो फिर मैं नहाता हूँ. इस पर वो अच्छा कह के चली गईं.

फिर मैं अपनी आंखें बन्द किये लेटा रहा. तभी भाभी फिर से आईं और मेरे पास आकर बैठ गईं. मैंने उनकी तरफ देखा तो उन्होंने मैक्सी पहन रखी थी लेकिन अंडर गारमेंट्स नहीं पहना था. मुझे उनके बूब्स दिख रहे थे. मैंने देखा कि भाभी काफी उदास थीं. इस पर मैंने उनसे उदासी का कारण पूछा. तभी अचानक उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और अपने बूब्स पर रख दिया.

इस पर मैंने चौंकने का बहाना करते हुए उनसे कहा कि भाभी ये क्या कर रही हो? हालांकि मैं जानता था कि ये क्या हो रहा है और क्यों हो रहा है. मुझे ये भी पता था कि आगे क्या होगा? मेरे सवाल का जवाब दिए बिना वो मेरे पैंट का बटन खोलने लगीं.

यह देख मैं हैरान था लेकिन मुझे मज़ा भी आ रहा था. तभी अचानक भाभी ने अपनी मैक्सी उतार दी और मुझ पर टूट पड़ीं. अब वो मुझे पागलों की तरह चूमने लगी थीं. इससे मेरा अपने ऊपर से कंट्रोल खोने लगा. दूसरी तरफ मेरा 6 इंची लम्बा लंड भी खड़ा होने लगा था. जब मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ तो फिर मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए और भाभी का साथ देने लगा.

मैंने देखा कि भाभी की चूत फड़क रही थी और पूरी तरह गीली हो चुकी है. यह देख मैं उनकी चूत में उंगली फेरने लगा. साथ में उनके मम्मों को मुंह में लेकर चूसने लगा. इससे भाभी उत्तेजित होने लगीं और उम्म आह हां ओह्ह आह की मादक आवाज निकालने लगीं. वो कह रही थीं कि राकेश आज मुझे चोद कर चुदाई का असली मज़ा चखा दो.

मैंने कहा हां सुमन मेरी जान अब जब इतना कर लिया तो चोदे बिना छोडूंगा नहीं. चिंता न करो. तब वो बोलीं – हां चोदो जल्दी चोदो, मैं रात भर से प्यासी हूँ. तुम्हारे भैया मज़ा नहीं दे पाते. अब तुम देर न करो बस चोद दो मुझे.

तब मैंने भाभी से कहा कि लंड मुंह में ले लो और चूसो मज़ा आएगा. मेरे कहने भर की देर थी कि सुमन ने लपक कर लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी. थोड़ी देर बाद उन्होंने कहा कि माल मुंह में मत निकालना, उसे चूत में छोड़ना. मैंने कहा ठीक है.

फिर मैं भी उल्टा हो गया और सुमन की चूत चाटने लगा. वो मस्त हो गईं और अपनी गांड हिलाने लगीं. थोड़ी देर बाद वो बोलीं कि अब अपना लंड डाल कर फाड़ दो मेरी चूत को.

अब मैंने भी उन्हें तड़पाना उचित नहीं समझा और उन्हें सीधा करके उनकी दोनों टांगों को अपने कंधे पर रख लिया. इसके बाद मैंने लंड उनकी चूत पर सेट किया और एक ही बार में पूरा अंदर घुसा दिया. सुमन हल्का सा चीखते हुए बोली – फाड़ दी, फाड़ दी. पता नहीं ये वो दर्द की वजह से बोलीं थीं या खुशी से.

फिर मैं तेजी से धक्के लगाने लगा. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. थोड़ी देर बाद वो बोलीं – मज़ा आ गया राकेश, आज से तुम ही मेरे पति हो अब तुम मुझे रोज चोदना.

फिर करीब 20 मिनट बाद मैंने अपना सारा माल उनकी चूत में निकाल दिया. सुमन इस चुदाई से एक दम मस्त हो चुकी थीं. थोड़ी देर बाद वो फिर मुझे पागलों की तरह चूमने लगीं. इसके बाद मैंने एक बार फिर उनकी चुदाई की. मेरी चुदाई से वह पूरी तरह संतुष्ट हो चुकी थीं.

इसके बाद मैंने मौका देख कर सुमन को खूब चोदा. अब उनके दो बच्चे भी हैं जो मेरे हैं. घर वालों और भैया को लगता है कि बच्चे उनके हैं. कभी – कभी सुमन उनसे मुझे पापा कहलवा देती है. यह सुन कर मुझे बहुत खुशी मिलती है.

अब मेरी भी शादी हो गई है. लेकिन काम के चक्कर में अक्सर दिल्ली जाना लगा रहता है. जब भी मैं दिल्ली जाता हूँ भैया के घर पर ही ठहरता हूँ और सुमन को खूब चोदता हूँ.

दोस्तों, आपको मेरी कहानी कैसी लगी, कमेंट करके जरूर बताना. मेरी पत्नी भी बहुत खूबसूरत और सेक्सी है. वो भी मुझसे खूब चुदती है. बाद में मैंने अपनी साली को भी चोदा लेकिन वो कहानी फिर कभी. मेरी ज़िंदगी में हर तरफ सेक्स ही सेक्स है. नमस्कार.

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