साहब का मनचला प्यार

फिर साहब धीरे – धीरे मजे लेकर मेरे मम्मों को दबाने लगे और मम्मे दबावा कर मैं मजे लेने लगी. फिर मैंने साहब का लंड अपने हाथों में ले लिया और उसे सहलाने लगी. वाकई, साहब का लन्ड मेरे पति के लन्ड से कहीं ज्यादा लंबा और तगड़ा था…

हेलो दोस्तों, मेरा नाम मनचला है और मैं अपने साहब के यहां काम कर के अपना जीवन व्यतीत करती हूँ. मेरे साहब और मेरी मेम साहब दोनों ही एक कंपनी में प्राइवेट नौकरी करते हैं.

उनके घर के ठीक बगल में एक पति – पत्नी रहते हैं. उनकी अभी हाल ही में नई – नई शादी हुई थी. उसके पति सेना में हैं और वो अक्सर अपनी नौकरी के सिलसिले में बाहर ही रहते हैं. उस घर में सास, ससुर और बहु बस ये तीन लोग ही रहते हैं. उनका हमारे साहब के घर पर अक्सर आना – जाना होता रहता था.

एक दिन जब मेम साहब काम के लिए अपने ऑफिस गई हुई थी. मैं घर में अपना काम कर रही थी और साहब बाथरूम में थे कि तभी अचानक से पड़ोसी की बहु अंदर आ गई और “दीदी, दीदी” कह कर आवाज लगाने लगीं. जब उन्हें समझ आया कि मालकिन घर पर नहीं हैं तो उन्होंने मुझसे कहा – तुम्हारी मेम साहब कहां है?

मैंने कहा – काम पर गई हैं.

यह सुन कर उन्होंने मुझसे कहा, “और तुम्हारे साहब कहां हैं?” तो मैंने उनसे पूछ लिया कि क्या काम है? इस पर वो वो नाराज हो गईं और बोलीं, “चुदना है और बोल, हरामी साली.” उन्होंने मुझे गाली दिया तो मैंने भी पलट कर कहा – गाली मत दे चुप रह.

अब वो और गुस्सा हो गईं और बोली – चार घर में काम करती है और कहां – कहा कराती है मुझे सब मालूम है.

अब मैं भी गुस्से में आ गई और बोली – हां, मै कराती हूँ तो तेरे को क्या है? मै साहब से भी करवाउंगी समझी.

अब वो बोली – तो चुदवा न तुझे किसी ने मना थोड़े न किया है.

अब साहब बाहर आ गये. उन्होंने हमारी लड़ाई सुन ली थी. बाहर आकर उन्होंने कहा – ये सुबह – सुबह बहस क्यों हो रही है?

इस पर मैं बोली – वो वो, कुछ नहीं साहब, हम बस ऐसे ही मजाक कर रहे थे.

फिर साहब ने दोनों को देखा. एक दम अलग तरीके से. दोनों ही चुदावाने को तैयार थे. फिर साहब बोले – कौन चुदाई करवाने को कहा रहा था?

इस पर हम दोनों एक साथ बोल पड़े “मैं वो वो…” अभी हम दोनों को बात पूरी नहीं हुई थी कि साहब फिर से बोल पड़े, “ठीक है पहले कौन कराएगा? आपस में बात करके तय कर लो.” इतने में उनके पास मेम साहब का फोन आ गया. मेम साहब ने कहा – सोमू, कहां हो तैयार हो गये कि नहीं?

तो साहब बोले – अभी नहीं यार, बस हो रहा हूँ.

अब मेम साहब बोली – आज एक अर्जेट मीटिंग है इसलिए मैंने फ़ोन किया है कि मुझे आने में देर हो जायेगी. बाकी अपना ध्यान रखना ओके.

फिर साहब ने भी हां बोल दिया और इसके बाद फोन काट दिया. फिर हमारी तरफ देख कर बोले – चलो ठीक है तुम दोनों को जब भी करवाना हो तो कह देना और मजा ले लेना ठीक है.

फिर थोड़ा रुक कर उन्होंने अपनी पड़ोसन से बोला – अच्छा अब आप ये बताईए कि कैसे आना हुआ आपका?

तो वो बोली – कुछ काम था.

तो साहब ने कहा – बताईये, क्या काम था?

इस पर वो बोली – आज न मेरे ससुर और सास दोनों बाहर जा रहे हैं तो मैं दीदी से पूछने आयी थी कि क्या आज वो मेरे साथ रह लेंगीं क्या?

इस पर साहब बोले – नहीं भई, अभी उनका फोन आया था, उन्होंने बताया कि वो देर से आयेगी.

यह सुन कर फिर वो चली गई. अब मैं और साहब बस दोनों ही घर पर थे. तभी अचानक से मैंने कहा, “साहब इसको बात करने की बिल्कुल भी तमीज नहीं है. बिना मतलब गुस्सा दिलाती रहती है.”

अब साहब बोले – छोड़ न मनचला, अब शांत रह.

ये कहते हुये उन्होंने अपने टावेल को निकाल दिया तो उनके खड़े लन्ड को देख कर मनचला बोली – क्या सहाब रात को चुदाई नहीं की न, इसीलिए ये पप्पू खडा हो गया है!

अब साहब बोले – हां यार, चल अच्छा बैठा दो न अब. चलो अब देर न करो.

फिर बोल कर साहब ने मुझे को अपनी बाहों में लिया. अब मैं बोली, “छोडो न साहब, कोई देख लेगा.” तो साहबने कहा, “कोैन आयेगा मेरे यहां?” फिर इतना कहते हुये साहब ने मेरे के मम्मों को मसल दिया. मुझको दर्द हुआ तो उसने कहा, “सहाब धीरे – धीरे दबाओ न”.

फिर साहब धीरे – धीरे मजे लेकर मेरे मम्मों को दबाने लगे और फिर मम्मे दबावा कर मैं मजे लेने लगी और फिर मैंने साहब का लंड अपने हाथों में ले लिया और उसे सहलाने लगी. वाकई, साहब का लन्ड मेरे पति के लन्ड से कहीं ज्यादा लंबा और तगड़ा था.

अब साहबने कहा – तुम्हारे पति का लन्ड कैसा है?

यह सुन कर मैं बोली – क्या साहब, मेरे दुबले पति का ऐसा तगड़ा कैसे हो सकता है? मैं तो कब से इस लन्ड से चुदने का इंतजार कर रही थी और आज वो दिन आ ही गया है.

फिर यह कह कर मैंने झुक कर उसका लन्ड सीधे अपने मुंह में ले लिया. अब साहब को मज़ा आ रहा था और वो “आह आह, चूसो रानी, मजा आ रहा है आह” बोल रहे थे. अब मैं थोड़ा रुक कर बोली – साहब, मेम साहब मुंह में नहीं लेती क्या?

तो साहब बोले – नहीं यार, उसको ये सब पंसद नहीं है. पता नहीं क्या औरत है? इसके बिना क्या मजा कैसा? चूसने और चुसाने में ज्यादा मजा आता है लेकिन पता नहीं उसको क्यों नहीं पसंद!

अब मैं पूरा का पूरा मुंह में लेकर मजे देने लगी और फिर बोली, “साहब कभी आप पीछे की चुदाई का मजा लिये हो?” तो वो बोले, “नहीं यार, अब तक तो नहीं किया.” अब मैं बोली – जब पीछे का मज़ा नहीं लिया तो क्या लिया. खैर, चलो आज मैं आपको मजा कराती हूँ.

फिर हम बाथरूम में आ गये और अब हम दोनों अपने – अपने कपड़े अपने बदन से अलग कर चुके थे. फिर साहब बोली – कितनी रोशनी है न, यहां अच्छा नहीं लग रहा है.

साहब बोले – यहां क्यों अच्छा नहीं लग रहा है?

मैं बोली – साहब, शर्म आती है.

अब साहब बोले – अच्छा जी, और क्या आता है आप को?

अब मैं बोली – लो न साहब, जल्दी करो न. समय खराब खोटा न करो.

फिर थोड़ा रुक कर मैं बोली – साहब, आप का मैं साफ कर दूं फिर आप मेरा करना ठीक है.

और फिर मैं साबुन ले कर उनके लंड को नहलाने लगी. लन्ड को झाग में डूबा हुआ देख कर मैं साहब से बोली, “बहुत मज़ा आ रहा है न साहब”. साहब ने भी हां में अपना सिर हिलाया. फिर मैं पीछे हो गई और अब साहब पीछे जाकर मेरी गांड़ पर अपना लन्ड रगड़ ही रहे थे कि तभी मैं बोली, “साहब, अब धीरे – धीरे अंदर डाल ही दो.”

यह सुन कर साहब ने छेद पर लन्ड रखा और धक्का मार दिया. दूसरी तरफ मैंने खुद पीछे की तरफ धक्का मार कर लन्ड को अपने अंदर कर लिया. फिर साहब ने अपनी स्पीड बढा दी. अब मैं कहने लगी, “साहब, जल्दी – जल्दी करो न, आह आह और जोर से ओहहह आहहह”, “साहब, कुछ गिर रहा है”. तो साहब ने कहा, “मनचली, जो गिर रहा है गिरने दो उसे, बहुत मजा आ रहा है”.

फिर साहब मेरी गांड़ में झड़ गए. अब उनका लन्ड एक दम छोटा सा हो गया था. यह देख कर मैं बोली, “कोई बात नहीं साहब, अब मेरा कमाल देखना कैसे 10 मिनट में मैं इस शेर को जगाती हूँ.

फिर मैंने लंड को साफ कर मुंह में ले लिया और पीने लगी. काफी देर बाद वो फिर से खड़ा हो गया. अब मैं बोली, “साहब, अब मैं आपके साथ जो करूंगी देखना उसमें कितना मजा आएगा”. फिर यह कह कर मैंने उन्हें बेडरूम में चलने को कहा. इस पर साहब ने कहा कि देखना कहीं कुछ गड़बड़ ना हो जाये. तो मैं उनसे कहा, “साहब, आप फ्रिक न करो, कुछ गड़बड़ नहीं होगा”.

यह बोल कर मैंने उसे घक्का मार कर गिरा दिया और फिर उनके ऊपर आ गयी और उनसे बोली – साहब, अब आप लड़की और मैं लड़का, देखना कैसे चुदायी करती हूँ मैं आपकी.

इतना बोलने के बाद फिर मैंने अपने दोनों पैर फैला कर साहब का लंड अपने चूत में ले लिया और खुद चुदायी करने लगी. साहब को और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. अब साहब बोले – बहुत मज़ा आ रहा है यार, इस पोज के बारे में तो मैंने सपने में भी कल्पना नहीं की थी.

ऊपर होकर मैं ऐसी चुदाई कर रही करने लगी थी मानो वाकई में एक लड़का, एक लडकी की चुदाई कर रहा हो. मैंने भी पहली बार इस प्रकार की चुदाई की थी और उत्तेजना वश अब मैं झड़ने वाली थी इसलिए साहब के दोनों पैर अपने हाथों से थोड़ा और फैला कर मैं पूरी स्पीड से चुदाई करने लगी.

हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था. फिर थोड़ी देर बाद मैं झड़ने लगी और स्पीड से चुदाई करते हुए साहब के बदन पर गिर गई और फिर साहब से बोली, “मजा आया न साहब”. साहब बोले, “हां मनचला, बहुत मज़ा आया यार”.

फिर मैं बोली – साहब, मेरी एक मालकिन है वो मेरे को रोज कहती है कि एक आदमी ला कर दे मैं तुम्हें भी और उसे भी रूपए दूंगी.

अब साहब थोड़ा चौंक कर बोले – क्यों पति नहीं है क्या?

मैं – है न साहब, लेकिन सिर्फ नाम का है. सुबह से रात तक काम ही काम. बस महीने में एक – दो बार करता है वो भी ठीक से नहीं. तो अगर आप कहें तो मैं बात करूं.

यह सुनते ही साहब एक दम खुश होते हुए बोले, “सच, तब तो बहुत मजा आयेगा”.

अब मैं बोली – हां साहब, फिर तो हम तीनों एक साथ होगें और मस्ती करेंगे.

उसके बाद फिर मैं घर चली आई और फिर मैंने अपनी उस मालकिन को बता दिया और साहब को ले जाकर फिर हम तीनों ने बहुत मज़े किए और पैसे भी बनाए लेकिन वो कहानी फिर कभी.

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