साँवली सलोनी चूत की चुदाई

शमा भी देख सकती थी की उसका “जवान जिस्म” मुझ पर, क्या असर कर रहा है. या यूँ कहें की दिखा रही थी की उसका “कमसिन जिस्म” क्या कयामत ढा सकता है. जब भी मौका मिलता, तो वो मेरे सामने झुक कर मुझे अपनी मस्त, सांवली चूची की झलक, दिखा ही देती.

दोस्तों! मेरा नाम कपिल है. गाँव का रहने वाला हूँ, लेकिन कॉलेज की पढाई के लिए इंदौर कके एक नामी कॉलेज में मेरा एडमिशन हो गया था. कॉलेज में ये मेरा दूसरा वर्ष है. मेरी क्लास में लड़के और लड़कियां एक साथ ही बैठती हैं. उन्ही में से एक है अंकिता. जो प्पहली ही नजर में मेरे दिल को भा गयी. वो इंदौर की ही रहने वाली है. अथाह सौन्दर्य की मालकिन अंकिता किसी लड़के से बात तक नहीं करती थी. बस अपनी कुछ गिनी चुनी सहेलियों के बीच ही रहती. जिनमे शमा नाम की एक लड़की उसकी सबसे खास सहेली थी.

अंकिता के पिताजी का देहान्त 6 वर्ष पहले ही हो चुका था और वो अपनी माँ आशा देवी के साथ रहती थी. उनका घर काफी बड़ा था और कालेज के काफी नजदीक था. इसलिए कुछ कमरों को उन्होंने कॉलेज के लड़के-लड़कियों को किराए पे दे दिया था.

इधर मैं अंकिता के लिए दीवाना हुआ जा रहा था. धीरे-धीरे मैंने उससे हाय- हेलो वाली दोस्ती कर ली थी लेकिन मामला वहीँ अटका पड़ा था. कई मौकों पे तो वो मुझे इग्नोर भी कर देती थी. अंकिता के घर में ही गौरव नाम का लड़का किराए पे रहता था. मैंने उससे दोस्ती गाँठ ली. फिर उसे अंकिता के प्रति अपने आक्कर्षण के बारे में भी बता दिया. अब गौरव कभी-कभी मुझे अपने घर भी ले जाता. इसी दौरान एक आध बार मेरी मुलाकात आशा देवी से भी हुयी. लेकिन फिर वहीँ तक बात अटकी पड़ी थी. दो तीन बार जाने के बाद भी एक आध बार ही अंकिता के दर्शन हो पाते.

गौरव को अंकिता में कोई दिलचस्पी नहीं थी. उसका एक दूसरी लड़की के साथ चक्कर चल रहा था. गौरव ने अपनी पहली सुहागरात उस लड़की के साथ मेरे कमरे पे ही मनायी. क्योंकि आशा देवी के यहाँ ये संभव नहीं था लेकिन मेरा घर मकान मालिक के किट-किट से दूर था. उस दिन वो बहुत खुश था. उसने मुझसे जो चाहे मांगने को कहा तो मैंने कहा – क्यों न हम अपना कमरा एक्सचेंज कर लें? तेरा काम भी हो आयेगा और मैं भी अंकिता के नजदीक आ जाऊंगा.

गौरव को ये आइडिया काफी पसंद आया. उसने अगले दिन ही आशा देवी से खुद के वहां से जाने और मेरे वहां रहने के बारे बात कर ली. आशा देवी भी मुझसे एक आध बार मिल ही चुकी थीं, इसलिए उन्होंने हाँ कर दी.

वहां जाकर पता चला की अंकिता की ख़ास सहेली शमा भी वहीँ मेरे बगल वाले कमरे में ही किराए पे रहती है. मैंने उससे दोस्ती बढ़ानी शुरू कर दी. फिर हमारे बीच खाने-पीने की चीजों और घरेलू सामान का आदान प्रदान भी शुरू हो गया.

शमा का रंग, सांवला था..

नैन नक्श तीखे, जिस्म भरा हुआ, आँखें चमकीली. उसकी चूची का साइज़, ज़रूर 36-38 का रहा होगा और चूतड़ काफ़ी गद्देदार. शमा जब चलती, तो अपने कूल्हे मटकाती हुई चलती और मेरा लण्ड खड़ा कर देती.
शमा भी देख सकती थी की उसका “जवान जिस्म” मुझ पर, क्या असर कर रहा है. या यूँ कहें की दिखा रही थी की उसका “कमसिन जिस्म” क्या कयामत ढा सकता है. जब भी मौका मिलता, तो वो मेरे सामने झुक कर मुझे अपनी मस्त, सांवली चूची की झलक, दिखा ही देती.

एक दिन, मैंने हौसला कर के उसकी चूची को टच कर ही लिया.. जब वो, मुझे ग्लास पकड़ा रही थी. वो तुरंत बड़ी बेशर्मी से मुझसे बोली – बच्चू, अभी छोटे हो. ऐसी हरकत तब करना, जब मर्द बन जाओ. बेटे, मुझे बच्चों में कोई दिलचस्पी नहीं है. मर्दों का काम, बच्चा नहीं कर सकता.

उसकी बात सुन कर, मैं जल भुन गया. मेरी गाण्ड सुलग उठी. उस रात से ही, मैं शमा को अपनी “पहली औरत” बनाने की स्कीम बनाने लगा. बेशक, अब मैं जवान था. लण्ड बेचैन था. मुझे भी चोदने के लिए, औरत चाहिए थी. शमा, बुरी नहीं थी. बस, मुझसे उम्र में बड़ी थी.
दूसरा कारण शमा को फसाने का, ये था की अंकिता के दिल में जलन पैदा हो जाएगी और वो मेरी तरफ आकर्षित हो जाएगी. और साली, “दो कौड़ी की रांड़” की हेकड़ी भी तो निकलनी थी यानी, एक चूत से दूसरी का शिकार.

उसी रात को मैं बिस्तर में लेटा हुआ था, जब शमा की आवाज़ मेरे कानो में पड़ी.
वो, कोई गाना गा रही थी. नहाते हुए गाना, आम बात है. लेकिन मेरी कल्पना, अब शमा का “नहाता हुआ नंगा जिस्म” देखने लगी. मैंने अपने कान, दीवार से लगा दिए. दीवार में किस्मत से, मुझे अचानक एक छेद दिखाई पड़ा. लगता है, साले गौरव ने पहले ही ये नजारा देखा हुआ था.

खैर, मैंने छेद में झाँका. छेद छोटा सा ही था, लेकिन “शमा की नंगी जवानी की झलक” दिखाई पड़ ही गई. उसका भीगा बदन, पानी से चमक रहा था और वो सबून मल मल कर नहा रही थी. मेरा लण्ड तन गया और मैंने मूठ मारनी शुरू कर दी. उस वक़्त, मैं बस यही सोच रहा था, काश! शमा मेरे सामने आ कर, मुझसे चुदवा ले. तभी मैंने देखा, उसने अपनी चूत को रगड़ना शुरू कर दिया. उसकी मखमल जैसी चूत, फड़फाडा रही थी! फिर, उसकी उंगली उसकी सांवली, चिकनी चूत में घुस गई और वो भी उंगली से अपनी चूत चोदने लगी.

शमा, बाथरूम में अपनी उंगली से चूत चोद रही थी और मैं कमरे में मूठ मार रहा था. उफ़!! दो जवान जिस्म चुदाई की आग में जल रहे थे. दोनों, एक दूसरे से अंजान. तभी, मेरे मुँह से एक हल्की सी चीख निकल गई – आ ह ह हह. और मेरे लण्ड ने रस छोड़ दिया. शमा ने शायद, मेरी सिसकारी सुन ली. वो घबरा उठी और उसने अपने हाथ को रोक दिया और तौलिया लपेट कर तुरंत बाहर चली गई.

मैं भी घबरा गया और मन ही मन सोच रहा था की शमा को पता चल गया है की मैं उसको नहाते हुए देख रहा था और वो मेरी शिकायत आशा देवी को लगाएगी. मेरी घर से, छुट्टी हो जाएगी. खैर, दूसरे दिन शमा मुझ से आँख नहीं मिला रही थी और ना ही मुझ से बात कर रही थी.

एक अजीब बात ये थी की शमा और अंकिता छुप छुप कर, धीमी आवाज़ में आपस में बातें कर रही थी. उस दिन, सारा दिन मुझे स्कूल में उदासी लगी रही. लेकिन, रह रह कर शमा का नंगा जिस्म भी मेरी नज़रों के सामने आ जाता. स्कूल से वापिस आते हुए, अंकिता मुझे अजीब नज़रों से देख रही थी.

दोपहर को खाना खाने के बाद, मैं अपने कमरे में लेटा हुया था जब किसी ने दरवाज़ा खटखटाया. बाहर, शमा खड़ी थी. वो, लाल रंग की सलवार कमीज़ पहने हुए थी और बहुत सीरीयस लग रही थी. फिर वो मेरी आँखों में देखती हुई, बोली – कपिल, मेरे कमरे में आओ. ज़रूरी बात करनी है. अब, मेरी गाण्ड फटी जा रही थी.

मैं उसके पीछे-पीछे उसके कमरे में गया. अन्दर जाकर शमा ने दरवाजा बंद कर लिया और मेरे गाल पे एक चांटा जड़ते हुए बोली- साले! कल बाथरूम में क्या झाँक रहा था? मेरी चूत देखने की कोशिश कर रहा था?

मैं गाल सहलाता हुआ चौंका. उसके मुँह से ऐसी बोली सुनकर मैं समझ गया की ये पहले से ही खेली खायी है.

तभी शमा फिर बोली- मैंने कहा था न! पहले मर्द बन. तो तू ये ताका-झांकी पे उतर आया. मुझे अपनी बेइज्जती का बदला चाहिए.

मैं समझ गया इसे क्या चाहिए. मैंने तुरंत अपना लोअर और अंडरवियर नीचे कर दिया और अपना लंड हाथ में पकड़ कर बोला- लो तुम भी मेरा देख लो! हो गया हिसाब बराबर?

अब एक तीखी मुस्कान के साथ शमा ने मेरे बड़े लंड को देखा फिर इठलाते हुए और अपना दुपट्टा अपने बिस्तर पे फेंकते हुए मेरी ओर बढ़ी. इस दौरान लगातार उसकी नजर मेरे लंड पे थी. वो आई और घुटनों पे बैठ गयी. उसने मेरा लंड पकड़ा और इधर उधर हिला कर देखा और कहा- सिर्फ लंड बड़ा होने से कोई मर्द नहीं होता. अपनी मर्दानगी साबित कर सकते हो?

मैंने अपना लंड उसके होठों से सटा दिया. उस रांड ने भी गपाक से मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और अन्दर बाहर करने लगी. कुछ ही देर में मेरा लंड बहुत कड़क हो गया और अपने पूरे आकर में आ गया. मैंने अब शमा को अपनी गोद में उठाया और बिस्तर पे लिटा दिया. सेकेंडों में हम दोनों के शरीर वस्त्र विहीन हो चुके थे.

हालाँकि उसकी चूत के दर्शन तो मैं पहले ही कर चुका था लेकिन नजदीक से उसकी तपिश महसूस करना एक अलग एहसास था. मैंने उसकी चूत चूसनी शुरू की. शायद वो भी काफी प्यासी थी इसलिए तुरंत ही झड़ गयी. लेकिन फिर भी मैंने चूत चुसाई जारी राखी. अब हम दोनों को सहन नहीं हो रहा था. इसलिए मैं उसके ऊपर आ गया और उसकी टांगों को चौड़ा करके उसकी भूरी चूत पे अपने लंड को टिकाया. चूत इतनी गीली और गर्म थी की मुझे लगा लंड खुद ब खुद अन्दर फिसल रहा है.

किसी चूत में लंड पेलने का मेरा ये प्रथम अवसर था, हालाँकि ब्लू फिल्मे मैने काफी देखी थीं. जबरदस्त धक्कम पेल चालू हो चुकी थी. चथ-चथ की और फच फच की आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी. शमा की सिसकारियाँ बढ़ने लगीं थी और साथ ही मेरी भी. चूत में धक्के लगाने के साथ मेरे हाथ शमा की चूचियों को मसले जा रहे थे और मेरे होंठ उसके होठों को. अचानक से मेरा फव्वारा छूटने लगा. मैं अपनी गलती का एहसास करते हुए अपना लंड बहार खींचना चाहता था, लेकिन शमा ने कस कर मेरे कमर को पकड़ लिया और बोली- दवा ले लूंगी. घबराओ मत!

मैंने अपना सारा वीर्य उसकी चूत में ही गिरा दिया. और फिर कुछ देर उसके ऊपर ही लेटा रहा.

फिर तो हम अक्सर ही चुदाई करने लगे. कई बार तो वो रात में मेरे कमरे में ही आकर सो जाती. लेकिन ये सिर्फ चुदाई का रिश्ता था. दिल के तार तो मेरे अभी भी अंकिता के लिए ही बजते थे.

फिर शमा ने ही मेरे और अंकिता के बीच के फासले को मिटाने में मदद की. लेकिन वो कहानी फिर कभी. मुझे पूरा विश्वास है कि ये कहानी आपको पसंद आयी होगी.

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