शर्मीली गर्लफ्रेंड की कार में चुदाई

सबसे पहले मैंने उसके होठ पर किस किया और साथ ही उसके बूबे भी दबाने लगा. धीरे – धीरे मैंने उसके कपड़े निकलना शुरु कर दिया. उसने शर्म की वजह से उसने अपना मुंह हाथों से ढ़क लिया. मैं इतनी जल्दी में था कि हम दोनों के कपड़े हमारे बॉडी से कब अलग हुये हमें पता भी नहीं चला…

हेल्लो दोस्तों! मेरा नाम रोहित है और मैं कोटा, राजस्थान का रहने वाला हूं. मेरी उम्र 21 साल है. रंग गोरा और कद 5.11 इंच है. मेरा लंड 6 इंच लम्बा 2 इंच मोटा है और मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूं. मुझे अन्तर्वासना की सभी कहानियां बहुत अच्छी लगी इसलिए मैंने सोचा कि क्यों ना मैं भी अपनी आपबीती आप सब के साथ शेयर करूं. ये मेरी पहली कहानी है इसलिए अगर कोई गलती हो तो माफ़ कर दीजियेगा.

दोस्तों बात तब की है जब मैं ग्यारहवीं कक्षा में पड़ता था. तब तक मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी और कक्षा में सब नए थे तो मेरी सब से इतनी बातचीत भी नहीं हुई थी, पर जैसे – जैसे दिन निकलते गये मैं सब के साथ घुल मिल गया. उन सब में एक लड़की, जिसका नाम दिव्या था मुझे काफी पसंद थी. उसकी लम्बाई 5.6 इंच थी और फिगर 34-30-34 का रहा होगा. उसका रंग बहुत गोरा था या यूं कहें कि जैसे भगवान ने बड़ी ही फुर्सत से उसे बनाया हो.

वापस मैं अपनी कहानी पर आता हूं. मैं उसे रोज देखा करता था लेकिन वो थी कि कोई भाव ही नहीं देती थी. फिर एक दिन मैं उसकी फ्रेंड से बात कर रहा था तो मैं उसके बारे में पूछने लगा. वो भी बड़े गौर से हमारी तरफ देख रही थी. जब मेरी बात खत्म हो गई तो मैं वहां से चला गया. बाद में दिव्या ने अपनी दोस्त से पूछा कि रोहित क्या पूछ रहा था? तो उसने उसे सारी बात बता दी. तब से ही वो मुझ पर नजर रखने लगी. ये बात मुझे पता नहीं थी कि वो मेरे हर काम, हर चीज को नोटिस करने लगी है.

दिव्या की दोस्त थी पूजा, जिसका चक्कर मेरे दोस्त अनिल के साथ चल रहा था और ये बात दिव्या भी जानती थी. एक दिन अनिल ने मुझसे कहा की यार ये चॉकलेट ले जाकर पूजा को दे दे. मैंने हां में सर हिलाया और उसे चॉकलेट देने कक्षा में पहुंच गया.

जहां दिव्या के सामन हीे मैंने चॉकलेट पूजा को दिया, तब दिव्या ने बड़े ही प्यार से मुझसे कहा – मेरे लिए चॉकलेट नहीं लाया. मैं उसकी ये बात सुनकर चौंक सा गया और मैंने उससे कहा – रुको, लाता हूं. फिर मैं उसके लिए भी चॉकलेट लाया. तब से हमारी थोड़ी बातचीत होनी शुरू हो गई. अब हम रोज बातें करने लगे.

एक दिन रात को मैं घर पर टीवी देख रहा था, तभी किसी अनजान नंबर से मुझे कॉल आया. मैंने फोन उठाया, उधर से एक प्यारी आवाज आई – हेलो.

मैंने भी हेलो किया और पूछा – आप कौन बोल रही हैं? मैंने आप को नहीं पहचाना.

तब वो बोली – पहचान सको तो पहचान लो.

फिर मैंने थोडा जोर दे कर पूछा तो उसने कहा – मैं दिव्या बोल रही हूं.

मैंने उससे पूछा – मेरा नंबर कहां से मिला.

वो बोली – बस मिल गया.

फिर थोड़ी इधर – उधर की बातें हुई और उसने फ़ोन कट कर दिया. अब हमारी ऐसे ही रोज फ़ोन पर बातें होने लगी. दिन ऐसे ही निकलते गए. एक दिन रात को उसका फ़ोन आया तो मैंने उसे i love u बोल कर अपने प्यार का इजहार कर दिया. जैसे वो तो मेरी इसी बात का इंतजार कर रही थी. उसने तुरंत ही मेरी बात का जवाब देते हुये i love u to बोल दिया.

फिर हमारी कुछ बातें हुई और जब मैंने उससे पूछा कि तुम मुझे कब से लाइक करने लगी. तब उसने बताया कि जब तुम पूजा को चॉकलेट देने आये थे तब से. उसने ये भी बताया कि वो तब से मुझ पर नजर भी रखने लगी थी. अब हम जब भी मिलते खूब बातें करते और कभी कभार किस भी कर लेते थे. ऐसे ही कब पूरा साल निकल गया हमें पता ही नहीं चला. लेकिन किस के आगे हमारे बीच कुछ ज्यादा नहीं हुआ.

लेकिन जैसे ही हम बारहवीं में आए तो हमारे बीच चुदाई की बातें भी होने लगी और दोंनो पर चुदाई का भूत चढ़ता गया. कभी – कभार हम फ़ोन सेक्स भी कर लेते थे, लेकिन इससे हमारा पेट नहीं भरता था.

फिर हमने चुदाई का प्लान बनाया और वो दिन भी जल्दी ही आ गया. हमारे एग्जाम पास ही थे और सभी टीचर हमारा कोर्स दुबारा करवाने में लगे हुये थे. इसी बीच हम मौका देख स्कूल से निकल गये लेकिन समस्या ये थी कि कमरे का जुगाड़ नहीं हुआ.

मैंने उससे बोला – अगर हम हमारा काम कार में करें तो तुम्हें कोई ऐतराज तो नहीं होगा.

तब दिव्या बोली – मुझे कोई प्रोब्लम नहीं होगी.

तब मैंने उससे कहा – में कार लाता हूं. तुम अगली गली में मेरा इन्तजार करना.

मैं घर से कार लाया और हम दोनों सिटी से बाहर निकल गये. मैंने एक सुनसान जगह पर कार रोकी. वो थोड़ा शरमा रही थी. साथ ही मुझे डर भी लग रहा था, कि कोई आ ना जाए. इसलिए मैंने जल्दी से काम करना बेहतर समझा.

सबसे पहले मैंने उसके होठ पर किस किया और साथ ही उसके बूबे भी दबाने लगा. चुदाई के लिए वह बहुत उतावली हो रही थी साथ ही वह बहुत शरमा भी रही थी. धीरे – धीरे मैंने उसके कपड़े निकलना शुरु कर दिया. उसने शर्म की वजह से उसने अपना मुंह हाथों से ढ़क लिया. मैं इतनी जल्दी में था कि हम दोनों के कपड़े हमारे बॉडी से कब अलग हुये हमें पता भी नहीं चला.

मैंने देर ना करते हुये जल्दी से काम खत्म करने की सोची क्योंकि हमारे पास ज्यादा टाइम नहीं था. मैंने दिव्या से पिछली सीट पर जाने को बोला वो भी जल्दी में थी और जल्दी से पिछली सीट पर चली गई. मेरा लंड अब पूरा खड़ा हो चुका था तो मैंने देर ना करते हुये जल्दी से लंड उसकी चूत पे रखा. चूत गीली होने की वजह से मेरे लंड का अगला हिस्सा फिसल कर चूत में चला गया. उसका ये पहली बार था तो उसकी चीख निकल गई और वह बाहर निकालने को बोलने लगी.

लेकिन मैंने उसे समझाया और मैं थोड़ी देर रुक गया. जब वो नॉर्मल हुई तो मैंने एक और धक्का दिया और पूरा लंड उसकी चूत में चला गया. इस बार उसकी आँखों से आंसू निकल आए और वो चिल्लाती रही कि रोहित प्लीज छोड़ दो, मैं मर जाउंगी. लेकिन मैंने उसकी एक ना सुनी और धक्के लगता रहा. थोड़ी देर बाद वो नार्मल हो गई और अब टाइम भी ज्यादा हो गया था.

अब मैंने जल्दी से काम खत्म करने की सोची और 15-20 धक्कों के बाद मैं झड़ गया. फिर हम अलग हो गए. वो अभी भी ऐसे ही लेटी हुई थी और अपना मुह ढ़क रखा था. फिर हम दोनों ने कपड़े पहने और वहां से वापस स्कूल आ गये.

तो दोस्तों ये थी मेरी सच्ची कहानी आप सब को कैसी लगी जरूर बताना. मैं आप सबके ईमेल का वेट करूंगा. एक बात और अब मेरा इटरेस्ट आंटियों और भाभियों में है. ऐसी ही एक भाभी की कहानी अगली बार लिखूंगा.

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