शायद चुदासी थी मेरी ममेरी बहन

अब मैंने उसके पीछे जाकर लंड को उसकी चूत के छेद में लगाकर दबाया तो लंड बड़े आराम से अंदर चला गया. तभी वो बोली, “भैया, ऐसा लग रहा है कि यह अंदर कहीं टकरा रहा है.” लेकिन 2-3 आराम वाले झटकों के बाद अब उसे भी मज़ा आने लगा और वो ‘आह! आह!’ की आवाजें निकालने लगी…

हेलो दोस्तों, मेरा नाम यश है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र 27 साल है और अभी मैं नौकरी करता हूँ. यह जो बात मैं आप लोगों को बताने जा रहा हूँ वह काफी पुरानी है लेकिन है पूरी सच्ची.

यह उस समय की बात है जब मैं 11वीं में पढ़ता था. एक बार मैं ठंडी की छुट्टियों में मामा के घर गया था. जैसे ही मैं वहां पहुंचा तो सबसे पहले मुझे मेरे मामा की बड़ी बेटी दिखाई दी. उसको देखकर मैं पागल सा हो गया.

उसे देख मैंने उसी समय ठान लिया कि उसकी तो लेकर ही रहूँगा. अब मैं जरा आप सबको उसके बारे में बता दूं. उसका नाम रूही है और वो उस समय 10वीं में थी और वह 19 की उम्र की थी, लेकिन उसका शरीर पूरी तरह खिल चुका था.

जब मेरी नज़रें उससे मिलीं तो मैंने पाया कि वो भी मुझे चोरी-चोरी नज़रों से देख रही थी. अब मुझे लगा शायद वो भी वही चाहती है जो मैं चाहता हूँ. ठंड का मौसम था. रात हुई. वो और मैं एक साथ ही एक ही रजाई में घुस कर टीवी देखने लगे.

इस दौरान दोनों एक – दूसरे से चिपक कर बैठे थे. हम दोनों की जांघें आपस में चिपकी हुई थी. पहले मैंने रज़ाई के अंदर अपनी जांघ के ऊपर हाथ रखा और फिर धीरे – धीरे हाथ को खिसका कर उसकी जांघ तक पहुंच गया और उसकी जांघ को छूने लगा.

इतना करने पर भी वो कुछ नहीं बोली बस लगातार टीवी देखती रही. फिर मैंने धीरे – धीरे हाथ उसकी चूत के ऊपर ले जाकर उसकी चूत को सहलाने लगा. तो उसने एक बार मेरे हाथ के ऊपर अपना हाथ रख कर मुझे रोकना चाहा लेकिन मैं नहीं रुका और मैंने उसका हाथ अपने लंड के उपर रख दिया और अपना हाथ उसके लोवर के अंदर डाल दिया.

फिर जब मैंने उसकी मुलायम चूत को छुआ तो पाया कि उसमें से पानी निकल रहा है. यह देख मैं समझ गया कि इसकी चूत भी लंड के लिए मचल रही है. फिर जैसे ही मैंने उसकी चूत के दाने को मसला, वैसे ही उसके हाथ में भी हरकत शुरू हो गयी और वो मेरे लंड को सहलाने लगी.

उस रात हमारे बीच उससे ज़्यादा कुछ नहीं हुआ, लेकिन अगले दिन घर पर सिर्फ़ वो और मैं ही थे, बाकी के सब लोग किसी काम से बाहर गये हुए थे और शाम तक वापस आने वाले थे. अब हम दोनों साथ बैठकर डीवीडी पर एक अँग्रेज़ी फिल्म देखने लगे.

अचानक उस फिल्म में एक चुदाई का सीन आ गया. मैं उसके पास ही बैठा था. उस सीन को देख कर और उसके पास होने की वजह से मेरा लंड खड़ा हो गया. शायद वो भी चुदना चाहती थी, इसलिए उसने दोबारा से वही सीन लगा दिया. यह देख मैंने उसके मम्मों पर हाथ रख कर उनको जोर से दबा दिया. इससे उसके मुंह से ‘सस्स्सस्स….’ की आवाज निकल गयी.

फिर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रखे और फिर हम दोनों एक – दूसरे के होंठों को चूसने लगे. करीब 15 मिनट तक होंठ चूसते – चूसते कब दोनों के कपड़े शरीर से अलग हो गये पता ही नहीं चला. अब मैं उसके मम्मे चूसने लगा और उसकी चूत को उंगली से रगड़ने लगा.

थोड़ी देर चूत चूसने के बाद मैंने उसे लंड चूसने को बोला तो उसने झट से मेरा पूरा लंड मुंह में ले लिया और सटासट चूसने लगी. फिर मैंने भी उसे उल्टा कर दिया और उसकी चूत पर अपने होंठ लगाकर उसकी चूत में जीभ डालने लगा.

उसे बहुत मज़ा आ रहा था. फिर मैंने उसको लेटाया और उसकी टांगों को खोला दिया. इसके बाद फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत में डालने की कोशिश करने लगा, लेकिन उसकी चूत बहुत टाइट थी, इसलिए लन्ड अंदर डालने में काफी दिक्कत हो रही थी.

यह देख मैंने अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगाया और थोड़ा सा उसकी चूत पर भी लगाया. जिससे वो बहुत मचल रही थी. अब मैंने लन्ड को चूत पर सेट करके हल्का सा दबाव डाला तो लंड झट से अंदर चला गया और वो दर्द की वजह से ऊपर को हो गयी.

अब मैंने एक बार फिर से कोशिश करके की सोच कर उसे ज़ोर से पकड़ लिया और एक झटका मारा तो मेरा आधा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया और वो मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी, लेकिन मैंने उसे बहुत ज़ोर से पकड़ा था, इसलिए वह छूट न पाई.

उसे काफी दर्द हो रहा था और चूत से खून भी निकल रहा था, इसलिए मैं लगातार उसे चूमे जा रहा था. फिर मैंने उसके होंठों को अपने होंठों का शिकंजे में लेकर चूसने लगा. थोड़ी देर के बाद जब उसका दर्द कम हुआ तो उसने अपने शरीर को ढीला छोड़ना शुरू कर दिया.

अब एक बार फिर मैंने एक आखिरी झटका मारा और लंड को उसके चूत की जड़ तक पहुंचा दिया. इस बार वो दर्द की वजह से बिलबिला उठी. मुझे लगा कोई इसकी आवाज़ ना सुन ले तो मैंने जल्दी से उसके होंठ अपने होंठों में जकड़े और उन्हें चूसने लगा. इस वजह से उसकी आवाज़ बाहर नहीं आ पाई.

अब मैं थोड़ी देर रुक गया. कुछ देर बाद वो फिर जोश में आने लगी और नीचे से अपनी कमर ऊपर की ओर उठाकर मेरे लंड पर ज़ोर लगाने लगी थी. अब मुझसे भी नहीं रहा गया तो मैं भी लंड को अंदर – बाहर करने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने उससे घोड़ी बनने को बोला तो वो जल्दी से घोड़ी बन गयी.

अब मैंने उसके पीछे जाकर लंड को उसकी चूत के छेद में लगाकर दबाया तो लंड बड़े आराम से अंदर चला गया. तभी वो बोली, “भैया, ऐसा लग रहा है कि यह अंदर कहीं टकरा रहा है.” लेकिन 2-3 आराम वाले झटकों के बाद अब उसे भी मज़ा आने लगा और वो ‘आह! आह!’ की आवाजें निकालने लगी.

अब उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था और वो मेरा पूरा साथ दे रही थी. मैं एक दम उत्तेजित होकर उसे लगातार चोदे जा रहा था. थोड़ी देर बाद उसने मुझसे कहा, “भैया, कुछ हो रहा है.” तो मैं समझ गया कि उसका पानी निकालने वाला है. अब मैं और जल्दी – जल्दी झटके मारने लगा.

करीब 10 -15 झटकों के बाद उसने मुझे ज़ोर से पकड़ लिया और फिर वह झड़ गयी. मैं भी उसकी चूत के गरम पानी की वजह से 20-25 झटके मारने के बाद उसकी चूत में ही झड़ गया.

अब थोड़ी देर तक हम यूं ही आराम से लेटे रहे और आधे घंटे बाद मैंने उसे दोबारा पकड़ लिया तो वो बोली, “भैया, अब रहने दो, कहीं कोई आ ना जाए.” लेकिन मैं नहीं माना. मेरे थोड़ा छेड़ने से थोड़ी देर में उसकी चूत ने फिर से पानी छोड़ना शुरू कर दिया था. अब मैं उसे उठा कर बाथरूम में ले गया और शॉवर खोल कर वहीं उसकी चुदाई शुरू कर दी.

अब वो पूरी तरह खुल चुकी थी तो बाथरूम में खूब उछल – उछल कर चुदवा रही थी. करीब आधे घंटे के बाद हम दोनों एक साथ फिर से झड़ गए. मैने इस बार भी अपना माल उसकी चूत में ही निकाल दिया.

तो दोस्तों, अन्तर्वसना पर यह मेरी पहली कहानी है. इसमें अगर मुझसे कहीं कोई ग़लती हुई तो माफ़ कर देना. आप लोगों को मेरी यह कहानी कैसी लगी? मुझे मेल करके ज़रूर बताना. मेरी मेल आईडी – [email protected]

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