स्मिता भाभी की चुदाई

मैंने सोचा कि थोड़ी देर मैं और पड़ा रहा तो कुछ गलत कर बैठूँगा. मैं वापिस अपने बिस्तर पे जाकर सोने का नाटक करने लगा. थोड़ी देर बाद मैं उठा और बाथरूम में जाकर भाभी के नाम की मुठ मार के सो गया……..

हेलो दोस्तों! अन्तर्वासना पर ये मेरी पहली कहानी है. आशा करता हूँ कि आप लोगों को पसंद आएगी| यह कहानी मेरी और मेरी ममेरी भाभी के बीच की है. यह कहानी आज से 6 महिने पहले की है. अब भाभी के बारे में बता देता हूँ. मेरी भाभी का नाम स्मिता है. है न सेक्सी नाम.  वो मेरे मामा के बेटे की पत्नी है.

तो ये गर्मियों की बात है जब मैं अपने मामा के घर गया हुआ था. मैं हमेशा छत पे ही सोने जाता था. जबकि घर के बाकी लोग सिर्फ लाइट न होने पे ही छत पर सोते थे. पिछले दो दिन से भाभी भी लाइट होने पर भी छत पे ही आके सो जाती थीं. उनका कहना था कि यूँ बीच में उठकर आने से उनकी नींद में खलल पड़ता है.

भाभी मुझे अजीब सी निगाहों से देखती थी. एक दिन भाभी मुझसे बात नहीं कर रही थी. मैंने पूछा तो उन्होंने कहा- आप रोज रात को नींद में चलकर मेरे ऊपर आके सोते हो.

सहसा मुझे यकीन नहीं हुआ. मैंने उन्हें सॉरी बोला.

उन्होंने कहा- कोई बात नहीं! जो कुछ भी हुआ वो नींद में हुआ.

कहकर भाभी मुस्कुराते हुए चली गयी. तब तक मुझे भाभी के लिए कोई गलत विचार नहीं था. लेकिन उस पूरे दिन मेरी नजरें बार-बार उनके सेक्सी बदन को निहारते रहीं. जब रात हुयी तो मैं तो पहले ही जाकर छ्त पे सो गया. थोड़ी देर में भाभी भी आयीं और अलग अपना बिस्तर बिछा कर सो गयीं.

मेरी आखों में तो नींद ही नहीं थी लेकिन फिर भी मैं सोने का नाटक करता रहा. अचानक मुझे आइडिया आया. फिर जैसा की भाभी ने दिन में मुझसे कहा था वेसे ही मैं जान बूझकर सोने का नाटक करते हुए भाभी को हग करके उनके उपर ही थोड़ी देर सो गया. मेरा लंड साड़ी के ऊपर से ही उनकी टांगों के बीच लग रहा था. अब मेरा लंड टाइट हो गया था. फिर मैंने भाभी के बूब्स टच किये.

मैंने सोचा कि थोड़ी देर मैं और पड़ा रहा तो कुछ गलत कर बैठूँगा. मैं वापिस अपने बिस्तर पे जाकर सोने का नाटक करने लगा. थोड़ी देर बाद मैं उठा और बाथरूम में जाकर भाभी के नाम की मुठ मार के सो गया.

अगले दिन जब मै सुबह उठा तो भाभी के सामने अपनी नजर नहीं मिला पा रहा था. भाभी ने मुझे स्माइल दी तब मुझे पता चला की रात को भाभी भी नाटक कर रही थी. तब मुझे थोड़ी
राहत मिली और मै उनका सारा खेल समझ गया. लेकिन उसी दिन किसी ज़रूरी काम की वजह से मुझे अपने घर वापिस आना पड़ा.

उस दिन के बाद मुझे फिर भाभी के कॉल्स आने लगे और हमारी बाते होने लगी. लेकिन साधारण बाते ही होती थी. फिर एक दिन भाभी ने उस रात की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उस रात को क्या कर रहे थे?

मैं- क्या भाभी (अनजान बन के)?

भाभी- वही जो तुम कर रहे थे.

मैं- क्या कर रहा था भाभी?

भाभी- क्यों तुझे नहीं पता?

मैं- ना भाभी.

भाभी- ठीक है.. अगली बार आयेगा तब बताउंगी.

और भाभी ने फ़ोन रख दिया और मैं बहुत खुश हो गया और मामा के वहां जाने का मौका ढूँढने लगा. तभी मेरे कजिन मामा के बेटे की शादी पड़ी और मुझे मौका मिल गया वहां जाने का. फिर जब में वहां गया सबसे मिला पर भाभी नहीं दिख रही थी.

मैंने मामी से पूछा – भाभी कहाँ है?

तो मामी ने बताया- वो अपने कमरे में है ऊपर.

तो में फाटक से ऊपर गया और रूम में गया तो देखा की वो अकेली थी और सोई हुई थी. मैंने जा के भाभी को उठाया. मुझे देख कर वो काफी खुश हुयीं. भाभी ने मुझे एक गाल पर किस
कर दिया. मैं खुश हो गया और भाभी को हग कर दिया.

मै- अब आगे का क्या प्रोग्राम है?

भाभी- तेरे लिए इतनी तड़पी हूँ तो तू आज रात तक तो रुक जा.

मैं- ओके भाभी.

मै बेसब्री से रात का इंतज़ार करने लगा. शादी का माहौल था तो घर के सारे लोग कार्यक्रम  स्थल पे काम में बिज़ी थी. तभी घर से भाभी का कॉल आया. उन्होंने बोला कि उन्हें कुछ काम है. फिर क्या? मै सीधा घर चला गया.

घर में कोई नहीं था. भाभी ने मुझे ऊपर बुलाया. मै जाकर उनके बगल में बैठ गया. हम दोनों बातें करने लगे. फिर मैं बात करते करते भाभी के पीठ पर अपना हाथ घुमाने लगा. भाभी गरम हो गयी और उठ कर रूम का दरवाजा अन्दर से लॉक कर दिया.

अब वो मुझे पागलो की तरह किस करने लगी. फिर क्या था? मेरा सपना मुझे पूरा होते दिख रहा था. मैंने भाभी को एक लम्बा लिप किस किया. फिर मै उसके बूब्स दबाने लगा. क्या बूब्स थे? जैसे की रस गुल्ले हो. भाभी ने मेरा शर्ट उतार दिया और सीने पर किस करने लगी.

मैंने उसका साड़ी-ब्लाउज उतार दिया. नीचे उसने लाल रंग की ब्रा पेंटी पहनी थी. भाभी बिलकुल कयामत लग रही थी. एक दम गोरी- गोरी. फिर मैंने ब्रा उतार दी. अब वो सिर्फ पैंटी में थी. फिर मैं कभी बूब्स को काटता तो कभी जोर- जोर से चूसता था.

फिर भाभी ने मेरी पैन्ट और अंडरवियर भी उतार दी और मेरा लंड देख कर पागल सी हो गयी. मैंने आज तक मेरे लंड का साइज़ नहीं नापा है पर हर औरत की प्यास बुझा सकता है. फिर मैने लंड उसके हाथ में दिया और वो हिलाने लगी तो मेने उसे मुँह में लेने को कहा.  वो मना करने
लगी पर मैने जबरदस्ती अपना लंड उसके मुँह  में डाल दिया. लेकिन भाभी ने करीब 2 मिनट तक ही लंड को चूसा.

क्योंकि उसका फर्स्ट टाइम था इसलिए मैने भी बहुत ज्यादा जबरदस्ती नहीं किया.

वो बोली- अब रहा नहीं जा रहा! चोद दे मुझे!

फिर क्या था? मैंने उसकी पैंटी उतार दी और लंड को उसकी चूत पर रख दिया. यह मेरा भी
पहली ही बार था, इसलिए मुझे पता नहीं था की कैसे करते है?

उसने मेरा लंड हाथ में लिया और अपनी चूत पर रख दिया. फिर मुझे धक्का मारने को कहा. एक ही धक्के में मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया.

वो चिल्ला उठी- उईईईईई माआआ माराआआआअ गयीईईई, पहली बार  चोद रहा है. फिर भी हथोड़े जैसा है तेरा.

मैं- क्या करूँ भाभी तुम्हें याद कर-कर के बहुत मुट्ठ मारे है ना इसलिए.

भाभी- फिर भी शांति से कर! बहुत टाइम से मैंने भी अपनी चुदाई नहीं कराई है.

मैं- क्या भाई नहीं चोदता है?

भाभी- ना!

मैं- इतना अच्छा माल छोड़ कर मैं तो कही ना जाऊं.

मैं उन्हें और जोर जोर से चोदने लगा.

भाभी- आआह्ह्ह्ह धीरे कर!!

फिर भाभी डॉगी स्टाइल में आ गयी और मैं पीछे से उनकी चूत में लंड डाल कर जोर- जोर से चोदने लगा और साथ में बूब्स भी दबाने लगा. करीब 30 मिनट के बाद हम दोनों झड़ गये. हम 5 मिनट तक ऐसे ही लेटे रहे. थोड़ी देर बाद मैं बाहर चला गया.

अब वो मुझे हर बार बुलाती है चोदने के लिए. तो कैसी लगी मेरी कहानी? मुझे जरूर बताना.

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