तलाकशुदा लड़की को जमकर चोदा

एक बार मैं ऑफिस से रूम जा रहा था. मेट्रो में मुझे एक खूबसूरत लड़की मिली, जो भीड़ का फायदा उठाकर मेरे लन्ड को मसल रही थी. फिर क्या था, बुला लिया मैंने उसे अपने रूम और की जमकर चुदाई…

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम अमरदीप सिंह है और मैं दिल्ली में रहता हूं. मैं सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूं और यहां एक बड़ी कंपनी में जॉब करता हूं. यह मेरी पहली कहानी है लेकिन मैं 2010 से ही अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूं और इसकी हर एक कहानी को पढ़ता हूं.

दोस्तों, जब तक लड़के की शादी नहीं होती है तब तक वह पोर्न देख कर या सेक्स स्टोरीज पढ़ कर अपनी वासना शांत करता है. मेरी भी ज़िंदगी कुछ इसी तरह चल रही है.

अब मैं आप लोगों का ज्यादा समय न लेते हुए अपनी कहानी पर आता हूं. जब मैं पहली बार दिल्ली आया था तो मैंने बस घूमने में ही अपना पूरा समय दिया था. मैं अपने दोस्तों के साथ दिल्ली के सभी दर्शनीय इलाकों में गया. वो दोनों भी लड़के थे और मेरी तरह ही सिंगल थे.

हमने दिल्ली के बारे में बहुत सारी बातें सुनी थी. हमें किसी ने बताया था कि यहां सेक्स बहुत कॉमन है और यहां की लड़कियां बहुत फ्रैंक और मॉडर्न होती हैं.

मैं अपने दोस्तों के साथ जहां जाता वहां एक से एक खूबसूरत लड़कियां दिखती थीं. हालांकि, किसी से बात करने की हमारी हिम्मत नहीं होती थी. बाहर मैं तो बस उनको देख कर ही अपने मन को शांत करता था. इसके बाद जब मैं घर आता तो हस्तमैथुन करके खुद को शांत करता था.

दोबारा आने पर मैंने ड्यूटी जॉइन किया और नियमित तौर पर ऑफिस आने – जाने लगा. दिल्ली में मैं अपने दोस्त के साथ ही रहता था. मुझे लगभग 2 घंटे मेट्रो में ट्रेवल करके ऑफिस जाना पड़ता था.

एक दिन की बात है. उस दिन जब मैं ऑफिस से अपने रूम आ रहा था तो मेट्रो में काफ़ी भीड़ थी. जिस वजह से सभी एक – दूसरे में चिपक कर खड़े थे. मेरे से चिपक कर एक लड़की खड़ी थी. उसने मेरी तरफ मुंह कर रखा था और वह मेरे से लम्बाई में भी बड़ी थी. इस वजह से बार – बार उसके बूब्स मेरे मुंह से चिपक रहे थे.

माफ करना दोस्तों, आप लोगों को अपनी हाइट के बारे में बताना ही भूल गया. मेरी हाइट 5 फुट और 8 इंच है. करीब 10 मिनट तक ऐसे ही चलता रहा. फिर उसने मुझसे पूछा कि मेरे यहां खड़े रहने से आपको कोई दिक्कत तो नहीं हो रही है न? इस तरह किसी लड़की के साथ खड़े होने में भला किस लड़के को दिक्कत होती है. मुझे भी नहीं थी. इसलिए मैंने कह दिया कि जी नहीं, मुझे बिलकुल दिक्कत नहीं है.

बार – बार उसके बूब्स के टकराने की वजह से मेरे अंदर कामुकता आ गई थी. धीरे – धीरे उस लड़की ने अपने हाथ नीचे कर लिए लेकिन मैंने अपने दोनों हाथों से मेट्रो की हैंडल पकड़ रखी थी, इस वजह से मेरे दोनों हाथ ऊपर ही थे.

इसी बीच उस लड़की ने अपना एक हाथ मेरे लंड पर रख दिया. मेरा लन्ड पहले ही खड़ा हो चुका था. हालांकि, उसके चेहरे पर कोई बदलाव नहीं आया. ऐसा लग रहा था जैसे कि उसने अनजाने में किया हो और उसे ये भी न मालूम हो कि उसका हाथ मेरे लन्ड पर है.

उसके ऐसा करने से मेरी सिट्टी पिट्ठी गुम हो गई. मैंने भी कोई रिएक्शन नहीं दिया और इस बात से एक दम अंजान बन के खड़ा रहा. फिर जब उसे मेरी तरफ से कोई नेगेटिव प्रतिक्रिया नहीं मिली तो उसने धीरे – धीरे मेरे लंड को सहलाना स्टार्ट कर दिया. दोस्तों, मैं क्या बताऊं! मेरी तो ऐसी सिचुएशन हो गई थी कि काटो तो खून नहीं. लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा और मज़े लेता रहा.

फिर थोड़ी देर बाद मेरा स्टेशन आने वाला था और वहीं मुझे उतरना था. तब मैंने उससे कहा कि नेक्स्ट स्टेशन पर मुझे उतरना है. इस पर वह थोड़ा झुकी और मेरे कानों के पास आकर बोली – मज़ा आया?

मैं बोला – जी हां बहुत मज़ा आया.

तब उसने पूछा – अकेले रहते हो?

इस पर मैंने झूठ बोल दिया और हां में जवाब दिया. फिर वो बोली कि अगर लाइफ में और एन्जॉय करना चाहते हो तो कॉल करना. इसके बाद उसने मुझे अपना नंबर दे दिया. फिर मेरा स्टेशन आ गया और उतर गया, वो आगे चली गई.

अगले दिन संडे था और मेरी छुट्टी सो मैंने उसे फ़ोन किया और अपने बारे में बताया. वो तुरंत ही मुझे पहचान गई और बोली कि अपना एड्रेस मुझे मैसेज कर दो. फिर उसने पूछा कि तुम्हारा कमरा सेफ है न? मैंने कहा – हां, एक दम सेफ है. इसके बाद हमने फोन रख दिया.

लगभग 2 घंटे बाद उसका फ़ोन आया. उसने मेरे घर के नज़दीक के बस स्टैंड का नाम लिया और बोली कि मैं यहां पर खड़ी हूं, तुम आ जाओ. फिर मैं गया और उसे अपने रूम पर लेकर आया. दोस्तों, संडे को मेरे दोस्तों की छुट्टी नहीं थी और वे ऑफिस गए हुए थे.

रूम में घुसते ही मैंने कुण्डी लगाई. जैसे ही दरवाजा बन्द हुआ वो मुझे स्मूच करने लगी. तब मैंने उससे पूछा कि तुम कहीं रंडी तो नहीं हो न जो किसी अंजान के साथ सेक्स के लिए रेडी हो गई हो? इस पर वो बोली कि रंडी होती तो पहले पैसे की डिमांड करती लेकिन मैं रंडी नहीं बस सेक्स की भूखी हूं. उसने आगे कहा कि जब से मेरे पति ने मुझे छोड़ा है तब से मैं किसी से चुदी नहीं हूं.

उसकी यह बात सुन कर मुझे समझ आ गया कि वो तलाकशुदा महिला है. खैर, मेरा क्या मुझे तो बस चूत चाहिए थी. फिर मैंने भी जल्दी – जल्दी अपने सारे कपड़े उतारे और अपनी हवस को शांत करने के लिए उसका साथ देने लगा. हम काफी देर तक किस करते रहे.

इसके बाद मैंने उसे नंगा कर दिया. जब मैंने उसे नंगा किया तो उसकी खूबसूरती और ज्यादा निखर के सामने आई. अब वो किसी परी से कम नहीं लग रही थी. उसके बड़े – बड़े बूब्स, क्लीन शेव बुर बहुत मस्त लग रहे थे. दोस्तों, वैसे तो मैं भी काफी गोरा हूं लेकिन अब उसका बदन मुझसे भी ज्यादा गोरा नज़र आ रहा था.

मैंने उसकी चूत को बहुत देर तक अच्छे से देखता रहा. उस पर से मेरी नज़र ही नहीं हट रही थी. यह देख वो बोली – सिर्फ देखना ही है या कुछ करना भी चाहते हो? तब मैंने कहा – पहली बार देख रहा हूं और पता नहीं बाद में इतनी मस्त बुर दिखेगी भी या नही इसलिए देख रहा हूं.

खैर, फिर मैंने अपनी नज़र हटाई और जीभ उसकी चूत पर लगा दी. जैसे ही मैंने ऐसा किया वो जोर – जोर से सिसकारियां लेने लगी. उसकी मस्त आवाज सुन कर मैं और भी जोश में आ गया. अब मैं जल्दी – जल्दी बुर चाटने लगा.

चूत चाटने के बाद मैं उठा और फिर मैंने अपने खड़े लंड पर थोड़ा थूक लगाया. इसके बाद लन्ड को उसकी चूत के ऊपर रख कर एक बार में ही पूरा अंदर धकेल दिया. अब वो आहें भरने लगी और मैं जोर – जोर से धक्का देने लगा. अभी 3 मिनट ही हुए थे कि मेरे लन्ड ने उसकी चूत में ही अपना पानी छोड़ दिया. शायद पहली बार होने की वजह से ऐसा हुआ.

फिर मैंने उसे अपना लंड चूसने को कहा. वो कुछ देर तक चूसती रही और जैसे ही मेरा लंड खड़ा हुआ मैंने फिर से उसकी उल्टा करके उसकी चूत में पेल दिया. इस बार लगभग 40 मिनट तक हमारी चुदाई चली और मैं फिर से उसकी चूत में झड़ गया. इस दौरान उसकी चूत 7 बात पानी छोड़ा था. उसी ने मुझे यह बात बताई.

बाद में उस दिन मैंने 2 बार और उसकी चुदाई की. चार बार चूत चोद कर मैं बहुत थक गया था. वह भी थक गई थी लेकिन उसके चेहरे से खुशी झलक रही थी. थोड़ी देर आराम करने के बाद फिर वो तैयार हो गई.

इसके बाद हम दोनों बाहर आये पास के एक रेस्टोरेंट में खाना खाया. फिर मैंने उसको ऑटो में बैठा कर विदा किया और अपने रूम चला आया. इसके बाद मैंने उसे 3 दिन और चोदा. बाद में उसने दोबारा शादी कर ली और मैं फिर से अकेला हो गया. खैर अब भी उसको याद करके अपना हाथ जगरनाथ कर लेता हूं.

दोस्तों, आपको मेरी ये पहली कहानी कैसी लगी? मुझे मेल करके जरूर बताएं. मेरी मेल आईडी – [email protected]

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