ठंड के मौसम में मेट्रो गर्ल के साथ गर्मागर्म चुदाई

इस पर भी उसके विरोध ना करने पर मैंने उसको स्मूच करना स्टार्ट किया. वो भी मेरा साथ दे रही थी. अब हमारे मुंह से ‘उम्म मम्म उम्मम’ की आवाजें निकल रही थीं. हमने लगभग 10 मिनट तक लगातार स्मूचिंग किया…

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा लंड हिला के नमस्कार और सभी चूतों को लंड उठा के प्यार. दोस्तों, मेरा नाम रवि है और मैं दिल्ली में 4 साल से रहता हूं. मैं भी आप लोगों की तरह अन्तर्वासना का पुराना पाठक हूं और यहां प्रकाशित होने वाली सभी कहानियों को पढ़ता हूं. आशा करता हूं, आप सभी ठीक होंगे. इसलिए अब देर ना करते हुए सीधे कहानी पर आते हैं. लेकिन उससे पहले सभी पाठक अपने लंड को पकड़ के बैठ जाएं और लड़कियां अपनी चूत में उंगली डाल लें.

बात पिछले साल की है. ठंड शुरू हो चुकी थी. ये तो आप लोग जानते ही हैं कि दिल्ली में कितनी ठंड पड़ती है. एक दिन सुबह – सुबह मैं अपने ऑफिस जा रहा था. जैसे ही मैं मेट्रो स्टेशन पहुंचा, मुझे एक मस्त माल दिखाई दी. मैं उसे देखता ही रह गया और दिमाग में बस यही ख़याल आया कि काश, अगर इसकी चूत मिल जाए तो मज़ा आ जाए!

यही सोचते हुए फिर मैं मेट्रो में घुस गया. जैसा कि आप लोग जानते ही हैं कि सुबह – सुबह ऑफिस टाइम में दिल्ली मेट्रो में कितनी भीड़ होती है, उस दिन भी भीड़ बहुत थी. दोस्तों, उसका नाम सोमया था, जो मुझे बाद में पता चला. उसका फिगर 34 28 36 का था. वह मुझे इतनी सेक्सी लग रही थी कि मैं खुद को रोक नहीं पाया.

मेट्रो में भीड़ बहुत थी तो उसका फायदा उठा कर मैं उसी लड़की के पीछे जाकर खड़ा हो गया. धीरे – धीरे भीड़ और बढ़ने लगी तो मैं उससे एक दम चिपक कर खड़ा हो गया और अपना लंड उसकी गांड पर दबाने लगा. धीरे – धीरे मेरा लंड खड़ा होने लगा और उसको पीछे की तरफ चुभने लगा. उसको भी इस बात का एहसास हो चुका था लेकिन उसने कुछ नहीं कहा. शायद वह भी मज़ा लेने लगी थी.

कुछ देर बाद उसका स्टेशन आ गया तो वो उतर कर जाने लगी. वैसे मुझे तो आगे जाना था लेकिन उसे उतरते देख मैं भी उसके साथ ही उतर गया और पीछे – पीछे जाने लगा. फिर थोड़ी देर बाद उसने पीछे मुड़ के मुझे देखा और एक स्माइल पास कर दी. जवाब में मैंने भी मुस्कुरा दिया. उसका रिएक्शन देख कर मैं समझ गया कि काम हो गया.

फिर मैं उसके पास गया और हेलो बोल कर बात आगे बढ़ाई. उसने भी मुझे हेलो कहा. फिर हम इधर – उधर की बात करते आगे बढ़ने लगे. इसी दौरान मैंने उससे उसके बारे में पूछ लिया. उसने बताया कि उसका नाम सोमया है और वो यहीं एक कम्पनी में काम करती है. इसके बाद फिर बाहर निकलते टाइम मैंने उसका मोबाइल नम्बर मांगा तो उसने भी बिना किसी हिचक के झट से अपना नम्बर दे दिया और अपने ऑफिस चली गयी. मैंने भी वापस आकर मेट्रो पकड़ी और अपने ऑफिस निकल गया.

ऑफिस में पूरा दिन मैं बस उसी के खयालों में खोया रहा. वापस आने पर रात को मैंने उसके नंबर पर ‘हाय’ लिख कर मैसेज किया. उसने भी रिप्लाई दिया और फिर हमारी बात स्टार्ट हो गयी. हम लगभग रोज ही चैटिंग करते और फोन पर घण्टों इधर – उधर की बात भी करते थे.

कुछ दिन के बाद मैंने उसको मिलने को बोला तो वो मान गयी. मैंने उसे अपने रूम पर आने के लिए इन्वाइट किया. फिर हमने अगले ही दिन मिलने का तय किया और अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली. निर्धारित समय पर वो मेरे रूम पर आई. उसने जीन्स और टॉप पहन रखा था जिसमें वो गजब की माल लग रही थी.

रूम पर आने के बाद मैंने उसको कॉफी के बोला तो उसने मना कर दिया. फिर उसने मुझे उस दिन के बारे में बात करने लगी, जो मेट्रो में हुआ था. उसने मुझे बताया कि उसे सेक्स किये हुए काफी टाइम हो गया तो मेरा पीछे से उसकी गांड में लंड चुभाना अच्छा लग रहा था.

यह बात बोल कर उसने मुझे हरी झंडी दे दी. मैंने भी कहा कि मुझे भी काफी टाइम हो गया था यार, इसलिए मैं कंट्रोल नहीं कर पाया. फिर इतना कह कर मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा. उसने कोई विरोध नहीं किया तो मैंने हल्के से उसके फेस को ऊपर किया और गाल पर एक किस कर दिया.

इस पर भी उसके विरोध ना करने पर मैंने उसको स्मूच करना स्टार्ट किया. वो भी मेरा साथ दे रही थी. अब हमारे मुंह से ‘उम्म मम्म उम्मम’ की आवाजें निकल रही थीं. हमने लगभग 10 मिनट तक लगातार स्मूचिंग किया.

फिर मैंने उसकी टॉप निकाल दी. अंदर उसने रेड कलर की कप वाली ब्रा पहन रखी थी. मैंने उसे भी खोल दिया. ब्रा सरक कर नीचे गिर गई. ब्रा के निकलते ही उसके बूब्स उछल कर बाहर आ गये. अब मैंने देर ना करते हुए एक बूब्स को दोनों हाथों में भर लिया और एक को मुंह में लेकर चूसने लगा. अब उसके मुंह से अजीब अजीब सी आवाजें आने लगीं. वह काफी उत्तेजित हो चुकी थी और जोर – जोर से चूसने को बोलने लगी.

दोस्तों, उसके निप्पल बहुत ही सॉफ्ट थे. उन्हें चूसने और दबाने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. थोड़ी देर बाद फिर मैंने उसकी जीन्स भी निकाल दी. अन्दर उसने लाल रंग की ही पैंटी पहन रखी थी. जिसमें वो एक दम कमाल की लग रही थी.

फिर मैंने उसको लिप किस करना स्टार्ट किया और धीरे – धीरे उसकी गर्दन पर आकर उसको लव बाइट किया तो वो चिहुंक उठी और उसके मुंह से एक मादक सिसकारी निकल गई.

फिर मैंने उसके क्लीवेज पर लिक किया और बूब्स को मुंह में भर के निप्पल को काट दिया. मेरे ऐसा करने पर उसके मुंह से दर्द भरी एक हल्की सी आवाज़ आई, “आअहह आआहह धीरे से करो”. फिर मैंने उसके पेट पर किस करने लगा. इसके बाद धीरे – धीरे मैं नीचे आया और पैंटी के ऊपर से चूत को मुंह में भर लिया तो उसके मुंह से एक सिसकारी निकल पड़ी और उसने कहा, “आराम से राजा”.

फिर मैंने हल्का सा मुंह पैंटी में डाला तो एक अजीब सी खुशबू आई. इसके बाद मैंने मुंह से पैंटी पकड़ के खींच दी और उसकी चूत पर टूट पड़ा और उसके दाने को मुंह में लेकर काटने लगा. मेरे ऐसा करने से वो पागल हुई जा रही थी और मेरा सिर अपनी चूत में दबा रही थी. उसके मुंह से लगातार ‘आईई ईईई उम्मम उम्मम’ की आवाज आ रही थी, जो मुझे और भी कामुक बना रही थीं.

फिर मैंने अपने कपड़े निकाल के फेंक दिए और एक दम नंगा हो गया. जैसे ही उसने मेरा खड़ा लंड देखा वो एक दम से उस पर टूट पड़ी और उसे मुंह में लेकर चूसने लगी. वह लॉलीपॉप के जैसे चूस रही थी. बड़ा मज़ा आ रहा था.

फिर कुछ देर बाद वो बोली, “अब देर न करो मेरे राजा, जल्दी से अपनी रानी को चोद दो, बहुत प्यासी हूं मैं”. फिर मैंने भी देर ना करते हुए उसकी चूत पर अपना लंड रखा और रगड़ने लगा. वो तड़प उठी.

फिर मैंने एक ही झटके में पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया. उसके मुंह से एक आह निकल गई और उसने कहा कि धीरे से करो जान. फिर मैंने धीरे – धीरे से धक्के लगाने स्टार्ट किए. अब हम दोनों के मुंह से मादक आवाज़े आ रही थीं.

धीरे – धीरे मैंने अपनी स्पीड तेज़ की और धकापेल चुदाई करने लगा. करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ ही झड़ गए. दिल्ली की भयंकर ठंड में भी हम दोनों को गर्मी लगने लगी थी. उस दिन हमने 3 बार चुदाई की. उसके बाद भी हम कई बार मिले और जब भी मिलते चुदाई करते. दोस्तों, आप लोगों को मेरी यह कहानी कैसी लगी? मुझे मेल करके जरूर बताना. मेरी मेल आईडी-
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