वासना का बुखार और उमा चाची

चाची के गदराये बदन और मेरे उन्नत लंड को बेइन्तहां एक दूसरे की जरूरत थी. लेकिन पहल नहीं हो पा रही थी. लेकिन वासना का ज्वार भाटा आखिर कब तक शान्त रहता. और फिर उस दिन वो बाँध टूट ही गया…….

दोस्तों! मेरा नाम आकाश है और मेरी उम्र २६ साल है। बात ३ साल पहले की है जब मै बी एड की पढ़ाई पूरी करने के बाद अल्मोड़ा से अपने गाँव आया था। गाँव में हमारे पडोस में एक तलाकशुदा चाची रहती थी, जो हमारे घर का काम करने आया करती थी। उनका नाम उमा है और फिगर ३६-३२-३० का है. उम्र ४० के करीब की होने के बाद भी वो काफी सेक्सी लगती हैं.

मै जब भी उसे देखता था उसे चोदने को मन करता था. एक दिन उमा चाची हमारे घर में झाड़ू लगा रही थी. उनकी गोल-गोल चूचियां उनके ब्लाउज के अन्दर से दिख रही थी. तभी चाची ने मेरी तरफ देखा. मै तो घबरा गया और बाहर जाने लगा. तभी मैने देखा कि चाची मुझे देख कर हँस रही थी. उस दिन से मै उन्हें चोदने का मौका ढूंढने लगा।

एक दिन मै बाज़ार जा रहा था तो चाची ने मुझसे कुछ सामान मँगाया. सुबह 11 बजे के करीब में मैं जब सामान देने चाची के घर जाकर मैंने उसे आवाज लगाई तो शायद उनके बाथरूम से आवाज आई- मैं नहा रही हूँ. थोड़ी देर रुक जाओ.

मुझे लगा ये मौक़ा सही है. जवाब में मैंने कह दिया- ठीक है. मै कमरे में इन्तजार कर रहा हूँ।

लेकिन मै चुपके से बाथरुम के पास चला गया. उनके बाथरुम में दरवाजे नही है, तो चाची ने धोती का परदा लगाया था. जो हवा के कारण उड रहा था. मै बाथरुम की दीवार के सहारे खड़ा हो गया. अब मैंने अन्दर झाँका तो देखा कि उमा चाची नहा रही थी और पूरी नंगी थी. चाची के बदन पर सिर्फ चड्डी थी.

चाची के बूब्स देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया. मेरी साँसे उन्हें देखकर तेज चलने लगीं. लेकिन शायद चाची को अहसास हो गया था कि मै उसे देख रहा हूँ. वो फटाफट कपड़े पहनने लगी. तब तक मै उनके कमरे में आ गया। मै अन्दर ही अन्दर काफी डर गया था की अब चाची मुझ पर गुस्सा करेगी. और कहीं यदि मेरे घर वालों से कह दिया तो?

लेकिन जब वो कमरे मे आई तो उनके चेहरे की मुस्कुराहट देखकर मेरा डर जाता रहा. भीगी ज्जुल्फों में चाची तो क्या माल लग रही थी? मेरा लंड फिर टाईट हो गया. मैने सामान चाची को दिया तो उनकी नज़र मेरे लण्ड पर पड़ी.

कहने लगी- क्या छुपाया है?

उनकी बेशर्मी देखकर मेरा भी हौसला बढ़ा, मैने कहा- खुद ही देख लो.

चाची ने अपना हाथ मेरे लण्ड पर रख दिया और कहने लगी- बहुत बड़ी चीज लगती है.

मेरी हिम्मत थोड़ी और बढ़ी मैं समझ गया की चाची की चूत में भी खुजली मच रही है. मैने चाची को अपनी ओर खींचा और किस करने लगा. चाची भी गरम होने लगी. लेकिन फिर उन्होंने खुद को मुझसे अलग किया और बोली- दरवाज़ा बन्द करके आती हूँ।

दरवाजा बन्द करके चाची मुझसे लिपट कर बेड पर ले गई और मेरे कपडे ऊतारकर चूमने चाटने लगी. अब मै सिर्फ चड्डी में था. मै भी चाची के कपड़े उतारने लगा. चाची के शरीर पे अब सिर्फ उनकी गुलाबी ब्रा और पैन्टी बची थी. कुछ देर उनके अन्तःवस्त्र के ऊपर से ही उनकी चूचियों को मसलने के बाद मैंने उनकी ब्रा और पैन्टी भी ऊतार दिया. हाय क्या मस्त चूचियाँ थीं?

खैर उनकी चूचियों के दर्शन तो पहले भी कर चुका था लेकिन उनकी हलके झांटों वाली चूत के दीदार तो आज ही हुए थे.

मैंने चाची को बेड पे लिटा दिया और उनके बगल में खुद भी लेट गया. अब चाची के मुलायम बूब्स मेरे हाथों की गिरफ्त में थे. मै उसके बूब्स चूसने लगा. दूसरे हाथ से चूत सहलाने लगा. चाची गरम हो रही थी. उसकी चूत गीली हो गयी अब चाची ने मेरे बाल पकड़े और मेरा मुह अपनी चूत पर रख दिया. अब मै पूरी तल्लीनता से उसकी चूत चाटने लगा. ५ मिनट में ही उसका बदन अकडने लगा और झड गई.

अब मैंने अपना लंड निकालकर चाची के मुह में दे दिया. चाची चूसने लगी. मैं उसके बूब्स दबा रहा था. चाची गर्म होकर फिर से झड़ने के लिए तैयार हो गई। मैंने चाची की टांगों को फैला दिया और उनकी चूत में अपनी एक ऊँगली पेल कर अन्दर- बाहर करने लगा. चाची की सिसकारियाँ बढ़ने लगी. उन्होंने भी मेरे मूसल जैसे लंड को अपने हाथों में ले रखा था.

चाची बोली- आअ…अआह.. आकाश अब ऊँगली नहीं तेरे लंड की जरूरत है. इस मूसल को मेरी ओखली में डाल दे.

मैंने कहा- चाची लगता है काफी समय से तुम्हारी चूत प्यासी है.

चाची- हाँ…. मेरे राजा… आज तेरे लंड के पानी से अपनी चूत की प्यास मिटाऊँगी.

मैंने देर करना उचित नहीं समझा और अपने लण्ड को चाची की चूत पर रखा और हल्का सा धक्का लगाया. चाची की चीख के साथ मेरा आधा लण्ड उनकी चूत में घुस गया.

चाची कई सालों के बाद चुदवा रही थी. चूत में कसाव की वजह से उसे हल्का दर्द हो रहा था. अब मैंने दूसरे दमदार झटके से पूरा लण्ड पेल दिया और उसके होठ चूसने लगा. चाची की आखों में आंसू आ गए थे. कुछ देर तक कोई हरकत न करते हुए मै सिर्फ उसके होठों का रसपान करता रहा.

फिर हलके धक्को के साथ मैंने फिर से चुदाई शुरू की. अब चाची भी अपनी गांड ऊछाल- ऊछाल कर साथ देने लगी. ५०-६० धक्के में ही वो झड गई और ढीली पड गई. मै धीरे- धीरे धक्के लगाता रहा. चाची को मजा आने लगा और कहने लगी- मेरी प्यास बुझा दे.

मैंने स्पीड और बढ़ा दी. १० मिनट में हम दोनो झड़ गये. चाची की पूरी चूत वीर्य से भर गई. कुछ देर तक हम ऐसे ही सोये रहे। फिर अपने-अपने कपड़े पहने. चलने से पहले मैंने चाची को फिर से किस किया ।

इसके बाद भी कई बार मैंने चाची को चोदा. बाकी की बात अगली कहानी में बताऊंगा.

दोस्तों! मेरी ये कहानी कैसी लगी? बताना जरूर. मुझे मेल नीचे दिए पते पे करें.

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